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    गाजियाबाद के हरीश को आज से पानी देना बंद:एम्स में डॉक्टरों ने पाइप से भोजना देना बंद कराया, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी पर इच्छामृत्यु

    5 hours ago

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    13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाया जाने लगा है। आज से एम्स में पानी देना भी बंद कर दिया जाएगा। यह पानी ट्यूब किे जरिए उन्हें दिया जाता था। इससे पहले सोमवार को एम्स में डॉक्टरों ने पूरी प्रिक्रिया को शुरू करते हुए नलियों से भोजन भी नहीं दिया। हरीश राणा से अब परिवार और कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं मिल सकता है। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू की गई है। इसके लिए हरिश को 14 मार्च को गाजियाबाद के राज नगर स्थित राज एंपायर सोसायटी स्थित घर से शिफ्ट किया गया था। सोमवार से उनके टेस्ट की पूरी प्रिक्रिया शुरू की गई। अब एम्स में उनके फोटो और वीडियो पर पूरी तरह से रोक लगाई है। ऑक्सीजन हटाया गया, डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी दिल्ली के एम्स में आईआरसीएच के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती हैं। सोमवार को डॉक्टरों की एक मीटिंग हुई, जिसमें अलग-अलग विभागों के सीनियर डॉक्टर शामिल रहे। इसके बाद देर शाम उन्हें ट्यूब के जरिए भोजन नहीं दिया गया। इसी कड़ी में आज मंगलवार को पानी भी नहीं दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को डॉक्टरों की टीम बड़ी बारीकी से देखते हुए इस पर नजर रखी हुई। इच्छामृत्यु के लिए पूरा प्रॉटोकॉल बनाया गया है। उनका ऑक्सीजन सपोर्ट भी हटा दिया गया। डॉक्टरों ने यह बताया कि खाना पानी बंद होने के बाद औसतन एक वीक तक ही इंसान जीवित रह सकता है। घर से एम्स ले जाने से पहले का वीडियो सामने आया… 14 मार्च को जब हरीश को गाजियाबाद स्थित राज एंपायर सोसायटी के फ्लैट से एम्स ले जाया जा रहा था, उसके ठीक पहले उसके घर पहुंचीं ब्रह्मकुमारी लवली ने हरीश राणा के माथे पर चंदन का टीका लगाया। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- हरीश राणा का परिवार करीब 18 साल से ब्रहमकुमारीज से जुड़ा है। करीब 6 साल पहले पूरा परिवार गाजियाबाद शिफ्ट हुआ था। इससे पहले 13 साल तक हरीश राणा के पिता अशोक राणा दिल्ली रहे। बीके लवली ने बताया कि दो- 3 साल पहले हरीश की पीडा के बारे में परिवार ने बताया। कि अब हम पर इतना दर्द नहीं देखा जाता। जहां हरीश के भाई, बहन और मां और पिता हर रोते हैं। मां हमेशा अपने बेटे को सहलाती है। गाजियाबाद से विदाई के समय ब्रह्मकुमारी ने हरीश के माथे पर चंदन का टीका भी लगाया। इसके बाद हरीश अपने अंतिम सफर पर निकल पड़े। इस दौरान हरीश के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं। पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी। बोले- न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा है। ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा है राणा परिवार ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द बहन लवली से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, 'हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया। हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है। हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी डॉक्टरों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे। बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे। एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे, जैसे कोई व्रत करता है। जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत सम्मान से घर लाएंगे और उसे अंतिम विदाई देंगे। परिवार और सोसायटी में खामोशी छाई हरीश के दिल्ली एम्स में शिफ्ट होने के बाद परिवार में खामोशी है। पिता भी किसी से मिल नहीं रह रहे हैं, सोसायटी के लोग इतना बताते हैं कि वह भावुक हैं। बहन और मां दिल्ली से आने के बाद भी रोए। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा। दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके, ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था। हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने बेटे का इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए… दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। तब से न वह बोल पा रहे हैं और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे हैं। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज पूरी तरह फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं होती। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। ------ यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी:13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। देश में इस तरह का यह पहला मामला है। पूरी खबर पढ़ें
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