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    गणेश चतुर्थी कल, काशी के ज्योतिषाचार्य से जानें पूजा विधि-मुहूर्त:दोपहर 1.30 बजे तक मूर्ति स्थापना; इस दिन चांद न देखें

    3 hours ago

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    कल, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी दिन हरितालिका तीज भी है। इससे एक ही दिन पूरे शिव परिवार के पूजा का योग बन रहा है। गणेश चतुर्थी सुबह 7.11 बजे से शुरू होगी। पूजा और मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11.15 से दोपहर 1.30 बजे तक है। इसी दिन महिलाएं हरितालिका तीज का व्रत रखेंगी। काशी के जगन्नाथ संस्था के ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया- इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगा। 12 दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। इस बार चतुर्थी ज्यादा फलदायी होगी। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। जानें पूजा विधि और गणेश जी के जन्म से जुड़ी कहानियां… 21 दूर्वा, 21 लड्डू और 21 फूल चढ़ाएं ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया- गणेश जी की पूजा में 21 संख्या का विशेष महत्व है। पूजा में 21 दूर्वा, 21 लड्डू, 21 मिठाई और 21 पुष्प अर्पित किए जाते हैं। भगवान गणेश को मोदक भी प्रिय है। पूजा में शुद्ध घी से बने 21 मोदक या लड्डू चढ़ाना चाहिए। जिन घरों में गणेश जी की प्रतिमा नहीं है, वे नई प्रतिमा लाकर स्थापित कर सकते हैं। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र से पूजा शुरू करें। इसके बाद अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर और 21 दूर्वा अर्पित करें। पुष्प चढ़ाकर धूप-दीप और नैवेद्य से पूजा करें, आरती और भजन करें। गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन से बचें ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया- गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से कलंक लगता है। इसे ढेलहवा चांद भी कहते हैं। वहीं, काशी के बड़े गणेश मंदिर के महंत राजेश तिवारी ने बताया कि कुछ राशियां ऐसी होती है, जो अगर इस दिन का चांद देख लेते हैं तो सालभर के अंदर उन पर कोई कलंक लगता है। फसल और अच्छे कारोबार के लिए प्रार्थना करें ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया- गणेश उत्सव का संबंध केवल धार्मिक आयोजन से नहीं है। इस समय बारिश और धान की खेती का मौसम होता है। किसान अच्छी फसल और किसी तरह की परेशानी न आने की कामना से गणेश जी की पूजा करते हैं। इस साल की फसल को किसानों के लिए सोने के समान बताया जा रहा है, इसलिए अच्छी पैदावार की प्रार्थना करें। गणेश उत्सव के साथ त्योहारों का सीजन भी शुरू होता है। नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आगे आते हैं। व्यापारी वर्ग अच्छी खरीदारी और बिक्री की कामना से गणेश जी की पूजा करता है। देश की खुशहाली और तरक्की की प्रार्थना भी की जाती है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। अनंत चतुर्दशी पर 25 सितंबर को विसर्जन करें महंत राजेश तिवारी ने बताया कि 5-6 साल में तीज के साथ चतुर्थी पड़ने का ऐसा संयोग बनता है। कई बार चतुर्थी तीज के आसपास भी पड़ती है। इस बार दोनों तिथियां एक साथ आने से यह विशेष संयोग बना है। घर में अगर गणेश जी की पीतल की प्रतिमा पहले से है, तो उसे हर साल बदलने की जरूरत नहीं है। उस प्रतिमा की सालभर पूजा की जा सकती है। विशेष दिनों में अलग से पूजा और श्रृंगार किया जा सकता है। मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना करने वाले 12 दिन उत्सव मनाकर अनंत चतुर्दशी पर 25 सितंबर को विसर्जन करेंगे। तीज और गणेश चतुर्थी पर महिलाएं रहेंगी निराजल हरितालिका तीज 13 सितंबर को ही शुरू हो रही है, लेकिन उदया तिथि की मान्यता के कारण तीज का त्योहार भी इस बार 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन तीज सुबह 7.19 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने कहा- उदया तिथि के कारण तीज का मान पूरे दिन रहेगा। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। यानी एक ही दिन माता पार्वती और भगवान गणेश की आराधना का संयोग बन रहा है। ऐसी महिलाएं जो हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों का व्रत रखती हैं, उनके लिए निराजल व्रत का विधान बताया गया है। वहीं गणेश चतुर्थी का व्रत रखने वाले पुरुष और अन्य श्रद्धालु फलाहार कर सकते हैं। गणेश जी के बाल रूप की कहानियां जानिए गणेश जन्म से जुड़ी पुराणों की 4 कहानियां 1- शिव पुराण: देवी पार्वती ने शरीर के मैल से बनाए गणेश देवी पार्वती ने नहाने से पहले अपने शरीर के मेल से एक बच्चे का पुतला बनाया और उसमें प्राण डाले। देवी ने उसे द्वारपाल बनाकर आज्ञा दी कि कोई भीतर न आए। जब शिव आते हैं तो बालक उन्हें रोकता है। शिव और उस बालक के बीच युद्ध होता है। शिव अपने त्रिशूल से उस बच्चे का सिर काट देते हैं। बच्चे को देख पार्वती दुखी होती हैं। उनके गुस्से से सृष्टि को बचाने के लिए बच्चे के शरीर पर हाथी का सिर लगाया जाता है। उसे फिर से जीवन दिया जाता है। शिव बच्चे को गजानन नाम और प्रथम पूज्य होने का वरदान देते हैं। 2- लिंग पुराण: शिवजी ने प्रकट किया गणेश को, विघ्नेश्वर कहलाए देवगण बृहस्पति के साथ शिव से प्रार्थना करते हैं कि अधर्मियों के कामों में विघ्न डालने वाला एक देव रूप दें, जिससे धर्मात्मा सुखी हों। तब शिव ने गणेश्वर को प्रकट किया। पार्वती उन्हें गजानन रूप देती हैं। शिव पुत्र-जन्म के संस्कार कराते हैं। वरदान देते हैं कि तीनों लोक में सबसे पहले तुम्हारी पूजा होगी। साथ ही तुम विघ्नेश्वर और विनायक कहलाओगे। तुम्हारे गण अधर्मियों के कामों में रुकावटें पैदा करेंगे। इसके बाद गणेश अपने विघ्न-गणों की स्थापना करते हैं। 3- वराह पुराण : रुद्र से प्रकट हुए गणेश, विनायक नाम पड़ा ऋषि मुनियों की पूजा में आसुरी शक्तियां रुकावट डाल रही थीं। ऐसे में देवता और पितर कैलाश जाकर शिव से उपाय मांगते हैं। शिव देवी पार्वती को देखते हुए विचार करते हैं कि मेरी देह पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु में तो है, लेकिन आकाश में क्यों नहीं और हंस पड़ते हैं। रुद्र के इस भाव से तेजस्वी बालक प्रकट होता है। उसे देखकर पार्वती मुग्ध हो जाती हैं। इस पर रुद्र को गुस्सा आता है। वो बालक को श्राप देते हैं कि तुम्हारा मुंह हाथी जैसा हो जाए, पेट बड़ा हो जाए और तुम्हारी जनेऊ नाग बन जाए। तब ब्रह्मा आकर कहते हैं कि जो रुद्र के भाव से उत्पन्न हुआ, वो गणपति बने। तब शिव का गुस्सा शांत होता है। उस बालक को विनायक, विघ्नकर और गणेश नाम दिया जाता है। वरदान भी दिया जाता है कि हर पूजा आराधना से पहले गणपति की पूजा अनिवार्य है। 4- स्कंद पुराण: पार्वती ने बनाया गजमुखी बालक, शिवजी ने वरदान दिया राक्षसों के कामों में रुकावट डालने के लिए देवताओं ने देवी की स्तुति की। देवी पार्वती ने अपने शरीर के मेल से गजमुख बच्चे की मूर्ति बनाई। शिव ने उसमें प्राण डाले और कहा ये मेरी तरह पराक्रमी होगा। पापी और धर्म का अनादर करने वालों को विघ्न देगा। बिना इसकी पूजा के कोई शुभ काम पूरा नहीं होगा। शिव उस बालक को तारकासुर से लड़ने के लिए भेजा। उस युद्ध में गणेश ने तारकासुर को परेशान किया और कार्तिकेय ने वध किया। तब से गणेश विघ्नेश्वर कहलाए। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए- यूपी चुनाव जमीन पर कम, मोबाइल पर ज्यादा लड़ा जाएगा, भाजपा-सपा ने बनाई रीच बढ़ाने की रणनीति यूपी में इस बार विधानसभा चुनाव जमीन से ज्यादा मोबाइल पर लड़ा जाएगा। लोग नेताओं के लंबे भाषणों से ज्यादा रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुद्दों को समझ रहे हैं। दिल्ली में 6 जून से 25 जुलाई तक चले जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद सोशल मीडिया की राजनीतिक ताकत और ज्यादा दिखाई दे रही है। पढ़ें पूरी खबर…
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