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    गिरफ्तारी में मामूली चूक भी पड़ सकती है भारी:प्रयागराज में 2102 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तारी के नियमों, ई-साक्ष्य ऐप ट्रेनिंग मिली

    18 hours ago

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    गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी पुलिस की कार्रवाई को अवैध करा सकती है, वहीं डिजिटल साक्ष्य जुटाने में हुई चूक का लाभ आरोपी को मिल सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रयागराज कमिश्नरेट में 9 से 11 अक्टूबर तक पुलिसकर्मियों को नए आपराधिक कानूनों और ई-साक्ष्य ऐप का प्रशिक्षण दिया गया। रिजर्व पुलिस लाइन्स के त्रिवेणी सभागार में आयोजित इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 2102 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। थानों के पुलिसकर्मी गूगल मीट के जरिए ऑनलाइन जुड़े। गिरफ्तारी के नियमों की दी जानकारी प्रशिक्षण के पहले दिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान समझाए गए। अभियोजन अधिकारियों ने बताया कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी करने या न करने के कारण लिखित रूप में दर्ज करना जरूरी है। जरूरत के मुताबिक नोटिस देने और गिरफ्तारी की कानूनी शर्तों का पालन करने की जानकारी भी दी गई। इस दौरान गिरफ्तारी मेमो तैयार करने, गिरफ्तार व्यक्ति के परिजनों को सूचना देने, गिरफ्तारी के आधार बताने, चिकित्सीय परीक्षण कराने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने जैसे प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। महिलाओं की गिरफ्तारी से संबंधित नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया। डिजिटल साक्ष्य की कड़ी सुरक्षित रखना जरूरी दूसरे दिन पुलिसकर्मियों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया बताई गई। अधिकारियों ने समझाया कि साक्ष्य की बरामदगी से लेकर अदालत में पेश किए जाने तक प्रत्येक हस्तांतरण का रिकॉर्ड होना चाहिए। इसे चेन ऑफ कस्टडी कहा जाता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 के तहत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता के लिए निर्धारित प्रमाणपत्र और हैश वैल्यू के महत्व की जानकारी दी गई। वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 105 के तहत तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा सात साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ से घटनास्थल का निरीक्षण कराने के प्रावधान समझाए गए। मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती, सीलबंदी, मालखाने में जमा करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया। ई-साक्ष्य ऐप से रिकॉर्डिंग का दिया प्रशिक्षण तीसरे दिन ई-साक्ष्य ऐप का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सीसीटीएनएस क्रेडेंशियल से लॉगिन, संबंधित एफआईआर का चयन और घटनास्थल, तलाशी व जब्ती की जियो-टैग और टाइमस्टैम्प वाली फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया समझाई गई। पुलिसकर्मियों को रिकॉर्डिंग अपलोड करने, हैश वैल्यू तैयार होने, क्लाउड में साक्ष्य सुरक्षित रखने और नेटवर्क नहीं होने पर ऑफलाइन रिकॉर्डिंग कर बाद में सिंक करने का तरीका बताया गया। अस्पष्ट वीडियो, अधूरी रिकॉर्डिंग और गलत एफआईआर से साक्ष्य जोड़ने जैसी गलतियों से बचने की हिदायत दी गई। प्रशिक्षण में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े वास्तविक मामलों की केस स्टडी के जरिए बताया गया कि सही तरीके से साक्ष्य जुटाने से अभियोजन का पक्ष मजबूत होता है। अभियोजन अधिकारियों ने दिए व्याख्यान प्रशिक्षण में अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार पांडेय और सहायक अभियोजन अधिकारी जय किशोर राय, पवन कुमार सिंह एवं अनिल कुमार ने व्याख्यान दिए। तीसरे दिन पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया भी वर्कशॉप में शामिल हुए। इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त समेत अन्य अफसर-कर्मचारी मौजदू रहे।
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