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    गोरखपुर के BRD मेडिकल कालेज में विवाद खत्म:डॉक्टरों ने माफी मांगी; नर्सिंग स्टाफ भी काम पर लौटा

    16 hours ago

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    बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को इंटर्न डॉक्टर व मेल नर्सों के बीच हुआ विवाद शनिवार की शाम को समाप्त हो गया। मेडिकल कालेज प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में लगभग 3 घंटे तक चली वार्ता के बाद दोनों पक्ष मान गए। डॉक्टरों ने माफी मांग ली और दोनों पक्षों ने साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई। यह भी विश्वास दिलाया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी। इसके साथ ही मेल नर्स व इंटर्न डॉक्टर पर चिकित्सकीय कार्य न करने को लेकर लगाया गया प्रतिबंध भी हटा लिया गया है। समझौते के बाद प्रिंसिपल डा. रामकुमार जायसवाल और राजकीय नर्सेज संघ की प्रदेश अध्यक्ष बीना त्रिपाठी ने हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन किया। समझौते के लिए मेडिकल कालेज प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट रवि कुमार सिंह भी मौजूद रहे। सुबह से आंदोलित थे नर्सिंग कर्मचारी इस घटना को लेकर तीसरे दिन शुक्रवार की सुबह से ही नर्सिंग कर्मचारी आंदोलित थे। राजकीय नर्सेज संघ की प्रदेश अध्यक्ष बीना त्रिपाठी भी गोरखपुर पहुंच गई थीं। उनके नेतृत्व में नर्सों ने मेडिकल कालेज के विभिन्न वार्डों में घूमकर अपनी एकता भी दिखाई। उसके बाद बाहर प्रदर्शन किया। नर्सों के फेडरेशन की ओर से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। मामला बढ़ता देख प्रशासन के अधिकारी भी पहुंचे नर्सों के न मानने से मामला बिगड़ता जा रहा था। जिसे देखते हुए एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंच गए। उनकी मौजूदगी में ही वार्ता चली। कई बार ऐसा लगा कि बातचीत विफल रहेगी लेकिन अंतत: मेडिकल कालेज प्रशासन दोनों पक्षों को समझाने में सफल रहा। डॉक्टर भी पहुंच गए थे प्रिंसिपल आफिस इस खींचतान के बीच इंटर्न डॉक्टर भी प्रिंसिपल आफिस पहुंच गए थे। इससे तनाव और बढ़ गया था। उनके पहुंचने से दबाव दूसरी ओर से भी बढ़ गया था। पूरे समय पुलिस वहां तैनात रही। वार्ता के बीच में ही एक समय ऐसा आया जब एक नर्स बाहर निकल आयीं और कहा कि ट्रामा में ड्यूटी कर रही नर्स फरजाना के साथ डॉक्टर बदतमीजी कर रहे हैं। इसपर नर्सिंग स्टाफ आक्रोशित हो गए। हालांकि वह मामला भी सुलझ गया। प्रशासन की ओर से भी गठित है समिति इस मामले में जांच के लिए प्रशासन की ओर से भी तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में गठित कमेटी में सीओ गोरखनाथ व एक एडिशनल सीएमओ को शामिल किया गया है। दूसरी ओर मेडिकल कालेज प्रशासन की ओर से गठित कमेटी को भी भंग नहीं किया गया है। हालांकि समझौता होने के बाद जांच रिपोर्ट को लेकर कोई उत्सुकता नहीं रह गई है। पहले जानिए क्या है मामला गुरुवार को दिन में इंटर्न डॉक्टरों ने आन ड्यूटी कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी। कर्मचारियों का कहना है कि दोपहर करीब 2 बजे सर्जरी विभाग का एक इंटर्न डॉक्टर ट्रॉमा वार्ड में इंजेक्शन लेने पहुंचा। वह एक साथ पूरा पैकेट ले जाने लगा। ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उसे रोका और कहा कि जितनी जरूरत हो उतनी ही दवा ले जाए, क्योंकि सभी दवाओं का रिकॉर्ड वार्ड में दर्ज किया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना एंट्री के दवा ले जाने से हिसाब गड़बड़ा जाता है और बाद में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। बहस हाथापायी में बदल गई। नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि इसके बाद इंटर्न डॉक्टर वहां से चला गया और डेढ़ दर्जन से अधिक साथियों के साथ दोबारा वहां पहुंचा। नर्सिंग स्टाफ संतोष मसीह, शिवम मिश्रा और जय प्रकाश को पीटा गया। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है। घटना के विरोध में देर रात तक नर्सिंग कर्मचारी धरने पर रहे। उनके सामने इंटर्न डॉक्टरों के साथ एमबीबीएस छात्र भी खड़े हो गए थे। मरीजों के लिए भी दिक्कत डॉक्टर व नर्सिंग कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ने से वहां भर्ती मरीजों पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारी भले ही यह कह रहे हैं कि उनकी ओर से बारी-बारी से ड्यूटी की जा रही है लेकिन डॉक्टरों के साथ तनातनी होने के कारण काम प्रभावित था। इस पूरे घटनाक्रम से मरीजों के परिजन भी घबराए हैं। जानिए क्या मेडिकल कालेज प्रशासन का पक्ष प्राचार्य डा. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों को समझाया गया, वे मान गए हैं। सारे गिले-शिकवे भुलाकर साथ काम करने को तैयार हो गए हैं। अब कोई विवाद नहीं रहा। सभी लोग काम पर लौट गए।
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