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    गोरखपुर में मातृ मृत्यु दर घटाने की पहल तेज:डॉक्टरों- स्टाफ नर्सों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण, हर प्रसव को सुरक्षित बनाने की तैयारी

    13 hours ago

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    गोरखपुर में शनिवार को दोपहर 3 बजे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और हर गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां और तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों के लिए चार दिवसीय क्षमता संवर्धन (कैपेसिटी बिल्डिंग) कार्यक्रम शुरू किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को हाई रिस्क गर्भावस्था की समय पर पहचान, प्रसव के दौरान आने वाली जटिल परिस्थितियों के प्रभावी प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ‘मातृ सेवा’ अभियान को मिल रही नई मजबूती वर्चुअल माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी सोच के साथ जिले में “मातृ सेवा” अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नियमित फॉलो-अप, स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और मजबूत रेफरल सिस्टम के कारण अब तक आधा दर्जन से अधिक हाई रिस्क गर्भवतियों का सफलतापूर्वक सुरक्षित प्रसव कराया जा चुका है। जिन अस्पतालों में अधिक प्रसव सीएमओ ने बताया कि प्रशिक्षण के पहले चरण में उन सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को शामिल किया गया है, जहां हर महीने 100 से अधिक प्रसव होते हैं। इन स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसव संबंधी जटिलताओं की शीघ्र पहचान, गंभीर मरीजों के वैज्ञानिक प्रबंधन और इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराया जा सके। अब निजी अस्पतालों के स्वास्थ्यकर्मियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग जल्द ही जिले के लगभग एक दर्जन निजी अस्पतालों के चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ेगा। इसके लिए उन निजी अस्पतालों का चयन किया जा रहा है, जहां प्रसव की संख्या अधिक है। विभाग का मानना है कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ने से जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। हाई रिस्क गर्भवतियों की लगातार निगरानी डॉ. राजेश झा ने बताया कि आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) वाली महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। नियमित फॉलो-अप और समय पर रेफरल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी गर्भवती को इलाज में देरी न हो। उन्होंने विश्वास जताया कि क्षमता संवर्धन कार्यक्रम से “मातृ सेवा” अभियान को और मजबूती मिलेगी तथा जिले में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
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