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    गोरखपुर में शिक्षकों ने BSA कार्यालय पर किया प्रदर्शन:प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, कानून में संशोधन की उठाई मांग

    13 hours ago

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    गोरखपुर में RTE अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग को लेकर गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने DM के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि सेवा शर्तों में वर्षों बाद बदलाव से हजारों शिक्षकों के भविष्य पर प्रभाव पड़ सकता है। 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ था RTE अधिनियम ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में RTE अधिनियम-2009, 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उस तिथि से या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था। वहीं, इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से मुक्त रखा गया था। इसी व्यवस्था के तहत पूर्व में नियुक्त शिक्षक वर्षों से नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय जो सेवा शर्तें लागू थीं, उन्हीं के आधार पर उन्होंने नियुक्ति स्वीकार की थी। उस समय TET की अनिवार्यता पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू नहीं थी, इसलिए अब बाद में नई शर्त जोड़ना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बदली स्थिति शिक्षकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद देश के विभिन्न राज्यों में RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने हेतु TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य माना जा रहा है। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर दिशा-निर्देश जारी होने की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिससे शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अब सेवा सुरक्षा, वेतनमान और पदोन्नति को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। कई शिक्षक सेवानिवृत्ति के नजदीक हैं, ऐसे में उनके लिए दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता व्यवहारिक कठिनाई पैदा करेगी। सेवा शर्तों में परिवर्तन पर आपत्ति ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अधिनियम लागू होने के समय स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था की गई थी कि पूर्व नियुक्त शिक्षक TET की अनिवार्यता से बाहर रहेंगे। ऐसे में वर्षों बाद सेवा शर्तों में बदलाव करना समानता के सिद्धांत के विपरीत है। शिक्षकों ने इसे पूर्व नियुक्त शिक्षकों के साथ असमान व्यवहार बताया है और कहा है कि इससे उनके संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। शिक्षकों ने बताया कि देशभर में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले इस मुद्दे को लेकर आंदोलन चल रहा है। विभिन्न राज्यों में ज्ञापन, धरना और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार इस विषय में स्पष्ट नीति बनाए, ताकि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सके। अध्यादेश और कानूनी संशोधन की मांग प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मांग की गई है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में RTE अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने के लिए अध्यादेश लाया जाए। साथ ही संसद के माध्यम से आवश्यक संशोधन कर स्पष्ट प्रावधान जोड़ा जाए, जिससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हित सुरक्षित रह सकें। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने DM को ज्ञापन सौंपा और मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई। शिक्षकों ने कहा कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आगे भी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
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