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    गोरखपुर तरंग ओवरब्रिज बंद:लंबी दूरी से बचने को पैदल निकल रहे लोग, रिश्तेदारों के घर खड़ी की गाड़ी

    14 hours ago

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    गोरखपुर में तरंग मोड़ से हड़हवा फाटक को जोड़ने वाला तरंग ओवरब्रिज इन दिनों मरम्मत कार्य के चलते पूरी तरह बंद है। पुल पर एक्सपेंशन ज्वाइंट और बेयरिंग बदले जा रहे हैं, जिसके कारण 30 जुलाई तक सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। पुल की मजबूती और सुरक्षा के लिए यह कार्य जरूरी है, लेकिन इसका असर अब शहर के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। सुबह दफ्तर जाने की जल्दबाजी हो, बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो, कॉलेज जाना हो या दुकान खोलने निकलना हो, हर किसी का सफर पहले से कहीं ज्यादा लंबा, महंगा और मुश्किल हो गया है। जिस रास्ते से लोग महज पांच मिनट में अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे, अब वहीं पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। कई लोग पुल के दोनों ओर वाहन खड़ा कर पैदल सीढ़ियां चढ़कर पुल पार कर रहे हैं, तो कई लोग वैकल्पिक रास्तों पर लगने वाले जाम में फंसने को मजबूर हैं। बारिश के कारण हालात और भी खराब हो गए हैं। बदल गया हजारों लोगों का रूटीन तरंग ओवरब्रिज बंद होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिनका रोजाना इसी रास्ते से आना-जाना होता है। पहले लोग बाइक, ऑटो या ई-रिक्शा से सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे, लेकिन अब कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे न केवल सफर का समय बढ़ा है, बल्कि ऑटो और ई-रिक्शा का किराया भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासी गोल्डी वर्मा बताती हैं कि पहले वह बच्चों को ऑटो से आराम से स्कूल छोड़ने और वापस लाने चली जाती थीं। अब पहले पैदल पुल की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, फिर दूसरी तरफ जाकर ऑटो मिलता है। रोज यह प्रक्रिया दोहराने से काफी थकान होती है और छोटे बच्चों के साथ सफर करना भी मुश्किल हो गया है। तस्वीरें देखिए… इसी तरह कॉलेज छात्रा सारिका अग्रहरी बताती हैं कि पहले कॉलेज जाने के लिए सीधे ऑटो मिल जाता था, लेकिन अब पहले पैदल पुल पार करना पड़ता है, फिर दूसरी तरफ से ऑटो पकड़ना पड़ता है। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है और रोजाना की भागदौड़ भी बढ़ गई है। रिश्तेदारों के घर खड़ी कर रहे गाड़ी पुल बंद होने के बाद कई लोगों ने अपनी मजबूरी का नया तरीका निकाल लिया है। संतोष यादव रोज अपनी बाइक अपने चाचा के घर खड़ी कर देते हैं। वहां से पैदल पुल पार कर अपने घर आते हैं। अगले दिन फिर पैदल जाकर बाइक लेते हैं और उसके बाद काम पर निकलते हैं। वहीं गोपाल विश्वकर्मा भी हड़हवा फाटक की तरफ अपनी बाइक खड़ी कर देते हैं। दूसरी ओर पहुंचने के लिए किसी परिचित को बुलाते हैं, जो उन्हें लेने आता है। उनका कहना है कि रोज ऐसा करना मजबूरी बन गया है। बुजुर्गों के लिए सीढ़ियां बनीं सबसे बड़ी चुनौती पुल पर बनी सीढ़ियां बुजुर्गों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। बुजुर्ग नंदलाल गोंड रोज साइकिल से इस रास्ते से आते-जाते हैं। अब उन्हें साइकिल हाथ में उठाकर सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ती हैं। उनका कहना है कि हर बार यही डर लगा रहता है कि कहीं पैर फिसल गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं, गुड़िया वर्मा कहती हैं कि उम्र ज्यादा होने के कारण पैरों में पहले से दर्द रहता है। जब भी दुर्गाबाड़ी की तरफ जाना होता है, तो पुल की सीढ़ियां चढ़ना-उतरना बेहद मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि बुजुर्गों के लिए कोई अलग व्यवस्था होनी चाहिए थी। दोपहिया वाहनों के लिए खोलना चाहिए था पुल विकास कुमार बताते हैं कि पहले इसी रास्ते से कॉलेज और अन्य कामों के लिए निकलते थे। अब लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। ऑटो का किराया बढ़ गया है और पहले की तुलना में काफी ज्यादा समय लग रहा है। वहीं, स्थानीय निवासी गुलशन कुमार का कहना है कि पुल की मरम्मत जरूरी है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने के बजाय कम से कम दोपहिया वाहनों के लिए रास्ता खुला रखा जा सकता था। इससे हजारों लोगों को राहत मिलती और वैकल्पिक मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होता। दूसरे रास्तों पर निर्माण और बारिश ने बढ़ाई मुश्किल विकास गुप्ता का कहना है कि शहर के आसपास कई अन्य सड़कों पर भी निर्माण कार्य चल रहा है। कई जगह सड़कें अधूरी हैं, बारिश के कारण जलभराव और गड्ढे हैं। ऐसे में तरंग ओवरब्रिज को पूरी तरह बंद कर देने से लोगों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि अगर मरम्मत के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होता तो आम लोगों को इतनी दिक्कत नहीं होती। 30 जुलाई तक करना होगा इंतजार लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार पुल पर एक्सपेंशन ज्वाइंट और बेयरिंग बदलने का कार्य 30 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। तब तक पुल पर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। हालांकि लोगों का कहना है कि पुल की मरम्मत जरूरी है, लेकिन काम में तेजी लाकर इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि शहर की एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन फिर से चालू हो सके। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि तरंग ओवरब्रिज पर वाहनों की आवाजाही भले ही थम गई हो, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निकलने वाले हजारों लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। किसी को पैदल सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं, कोई वाहन छोड़कर दूसरी ओर जा रहा है, तो कोई लंबा चक्कर और जाम झेलकर अपनी मंजिल तक पहुंच रहा है।
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