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    घाटमपुर में आज भी जीवंत हैं पुरानी परंपराएं:होली के दूसरे दिन गांव-गांव गूंजी फाग, लोकगीतों से सराबोर रहा वातावरण; गांव-गांव फाग गायन हुआ

    3 hours ago

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    कानपुर के घाटमपुर में होलिका दहन के उपरांत होली के दूसरे दिन बुधवार को क्षेत्र के गांवों में पारंपरिक फाग गायन की मनोहारी छटा देखने को मिली। शाम ढलते ही ढोलक की मधुर थाप, मंजीरा और झींका की झंकार से पूरा वातावरण गूंज उठा। ग्रामीणों की टोलियां इकट्‌ठा होकर लोकगीतों के माध्यम से न केवल उत्सव मनाती नजर आईं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देती रहीं। घाटमपुर तहसील क्षेत्र के गांव गांव की गलियों में युवाओं और बुजुर्गों की अलग-अलग टोलियां निकलीं। सभी एक-दूसरे के घर पहुंचकर पारंपरिक फाग गाते रहे। कहीं चौपाल पर महफिल सजी तो कहीं मंदिर प्रांगण में स्वर लहरियां बिखरीं। लोकधुनों पर थिरकते कदम और अबीर-गुलाल से सजे चेहरे उत्सव की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रहे थे। महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं; उन्होंने घर-आंगन में फाग गाकर परंपरा को आगे बढ़ाया। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। रंग-बिरंगे गुलाल के साथ वे बड़ों के साथ फाग मंडलियों में शामिल हुए और पारंपरिक गीतों को सीखते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है, कि आधुनिकता के इस दौर में भी क्षेत्र में लोक परंपराएं अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। फाग केवल गीत-संगीत नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी है। बुधवार सुबह से ही गांवों में उत्सव जैसा माहौल रहा। लोगों ने एक-दूसरे के घर पहुंचकर गुलाल लगाया और होली की शुभकामनाएं दीं। चौपालों, मंदिर स्थलों और खुले आंगनों में फाग की महफिलें सज गईं। बुजुर्गों ने पुरानी लोकधुनें छेड़ीं तो युवाओं ने ताल मिलाकर माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना दिया। ग्रामीणों का मानना है, कि फाग गायन सामाजिक एकता को मजबूत करता है और आपसी मतभेदों को भुलाकर लोगों को एक मंच पर लाता है। यही वजह है कि होली के दूसरे दिन की यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। होली के दूसरे दिन गूंजी फाग की स्वर लहरियां घाटमपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि, लोक परंपराओं के प्रति आस्था और सामाजिक सौहार्द का सजीव प्रतीक बनकर सामने आईं।
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