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    हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बुलंदशहर में थमे एनकाउंटर:हर दूसरे दिन हो रही थी मुठभेड़, गाइडलाइंस जारी होने के बाद ब्रेक; जांच और जवाबदेही का दबाव बढ़ा

    3 hours ago

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    प्रदेश में लगातार हो रहे पुलिस एनकाउंटर पर हाईकोर्ट की सख्ती का असर अब बुलंदशहर में साफ दिखाई देने लगा है। जहां पहले हर दूसरे दिन मुठभेड़ की खबर सामने आती थी, वहीं कोर्ट की टिप्पणियों के बाद जिले में एनकाउंटर की रफ्तार अचानक थम गई है। हालात यह हैं कि पुलिस अब इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से भी बच रही है। पिछले करीब 9 वर्षों में जिले में सैकड़ों एनकाउंटर हुए। लगभग हर घटना के बाद जारी पुलिस बयान का ढांचा एक जैसा होता था- स्थान, समय और आरोपी बदल जाते थे, लेकिन कहानी वही रहती थी। ज्यादातर मामलों में पुलिस की गोली बदमाश के घुटने के नीचे लगने की बात सामने आती थी। हर घटना में एसओजी की मौजूदगी पर भी उठते रहे सवाल एनकाउंटर के दौरान स्थानीय पुलिस के साथ एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीम की मौजूदगी लगभग हर बार दर्ज की जाती रही। करीब 10 सदस्यीय टीम जिले के अलग-अलग थानों में चेकिंग के दौरान उसी समय पहुंच जाती थी, जब मुठभेड़ होती थी इसे लेकर भी सवाल उठते रहे। सिकंदराबाद कोतवाली में सबसे ज्यादा मुठभेड़ जिले में सबसे अधिक एनकाउंटर सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र में दर्ज किए गए। स्थानीय स्तर पर चर्चा रही कि यहां अपराधियों की गिरफ्तारी अक्सर मुठभेड़ के बाद ही दिखाई जाती थी। जिस अधिकारी की तैनाती होती, वहां एनकाउंटर की संख्या अचानक बढ़ने की बात भी सामने आती रही। अब हाईकोर्ट की सख्त गाइडलाइंस लागू हाईकोर्ट ने एनकाउंटर मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं: अदालत ने स्पष्ट कहा कि तारीफ या पुरस्कार पाने के लिए पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि पीड़ित पक्ष को जांच पर संदेह हो, तो वह सेशंस जज के समक्ष शिकायत कर सकता है। जरूरत पड़ने पर मामला हाईकोर्ट तक ले जाया जा सकता है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी संभव है। जिले में बदला माहौल, पुलिस पर बढ़ी कानूनी निगरानी कोर्ट की सख्ती के बाद जिले में पुलिस की कार्यशैली पर कानूनी निगरानी बढ़ गई है। अब मुठभेड़ों की जगह प्रक्रिया, दस्तावेजी जांच और जवाबदेही पर जोर दिखाई दे रहा है, जिससे पुलिस महकमे में सतर्कता का माहौल है।
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