Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    हाईकोर्ट से राहत के बाद शंकराचार्य मठ में लौटी रौनक:चिंता में डूबे संत-बटुकों के चेहरे पर उल्लास, शंकराचार्य ने कोर्ट पर जताया भरोसा

    2 hours ago

    1

    0

    वाराणसी में शंकराचार्य के आश्रम विद्या मठ में आज रौनक लौट आई है। कई दिनों से चिंताओं और मायूसी के माहौल में डूबे संत और बटुओं के चेहरे पर हर्ष और उल्लास है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के बाद अगली रणनीति बनने लगी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, वहीं फैसला आने तक गिरफ्तारी नहीं होगी। कट ने कराचार्य जांच में सहयोग करेंगे। अदालत में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखीं। दरअसल, तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जज (रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूंसी थाने की पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बटुकों से कुकर्म की FIR दर्ज की थी। इससे पहले, शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी अजीत कुमार सरोज को पुलिस ने करीब 20 घंटे बाद पकड़ा। आरोपी लॉ का छात्र है। वाराणसी कचहरी में ही प्रैक्टिस करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया- पड़ोसी को फंसाने के लिए यह मैसेज भेजा था। बता दें कि श्रीनाथ त्रिपाठी को बुधवार देर रात जान से मारने की धमकी मिली थी। उनके मोबाइल पर आए मैसेज में लिखा था- वाराणसी की कचहरी को बम से उड़ा देंगे, तुम्हें भी। अब जानिए कोर्ट से राहत के बाद क्या बोले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद… हाईकोर्ट के फैसले पर शंकराचार्य ने कहा, शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई। आज जो हालात हैं कि अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सारा अमला भ्रष्ट नहीं हो सकता। कहीं तो कोई होगा, जिसके मन में न्याय होगा। इसलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए। पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था। उन्हें लगने लगा था कि हमारे गुरु ने क्या गड़बड़ी की है। मुकदमा झूठा बनाया गया था। बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे हैं। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज ने कहा, हमें पूर्ण विश्वास है की धर्म की विजय होगी ओर पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा। झूठी कहानी अदालत में ध्वस्त हो गयी शंकराचार्य ने बताया- वकील पीएन मिश्रा से बात हुई है। उन्होंने बताया कि न्यायालय में हम लोगों ने आपका पक्ष रखा। विस्तार से न्यायालय में चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दलील रखी। न्यायालय ने ये कहा, हम फैसला रिजर्व कर रहे हैं। साथ ही जो गिरफ्तारी की कार्रवाई को रोक दिया है। शंकराचार्य ने कहा- वहां पर जो दलील रखी, वह इस बात पर थी कि मुकदमा झूठा बनाया गया है। जज को हमारी रखी बात में बल दिखाई दिया। तभी तो उन्होंने एक निर्देश दिय़ा है। इसलिए हम शुरुआत से कह रहे थे। हम लोगों ने अपनी बात जो सही थी, वह रखी। और आप देखिए न्यायाधीश ने जो एक आदेश पारित किया है। उससे ये पता चलता है कि इस मामले को बना करके रखा गया है। जितना बड़ा प्रचार किया जा रहा है कि आश्रम में बटुकों का शोषण, गुरुकुल में बटुकों का शोषण इनके यहां होता है। ये जो बात चलाई जा रही थी। उसको तो जो AG है, उन्होंने ने ही समाप्त कर दिया। उन्होंने ही कह दिया कि आश्रमें ये बटुक रहे ही नहीं। हम लोग पहले से ही कह रहे थे। आज वह बात जनता के सामने प्रमाणित कर दी। जो कहानी बनाई गई थी, वह पूरी तरीके से ध्वस्त हो गई। हिंदू समुदाय बहुत आहत था कि ये क्या हो रहा है। लोगों में तरह- तरह की आशंकाएं थीं। उन लोगों को लगने लगा था कि हमारे गुरु जी ने कुछ गड़बड़ी की है। आज कम से कम प्रथम दृष्टया ही सही, लेकिन सबको पता तो चला। कहीं न कहीं सुनवाई होती है, कहीं न कहीं न्याय होता है। जानिए पूरा मामला प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आ गई। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया। 'आज तक' को दिए इंटरव्यू में दावा किया- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया। गाजियाबाद की लेखिका का दावा- शंकराचार्य के मठ में गुप्त कमरे, सिर्फ सखियों की एंट्री शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद लेखिका भूमिका द्विवेदी सामने आईं। उन्होंने शंकराचार्य और वाराणसी में उनके विद्यामठ को लेकर तमाम चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। भूमिका द्विवेदी ने बताया, मैं 2022 में काशी और प्रयागराज में रिसर्च कर रही थीं। रिसर्च के लिए अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रोत्साहित किया था। तब मैं करीब 2 महीने अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में रही थीं। लेकिन मठ के अंदर जो कुछ देखा, उसने मेरी राय बदल ली। उन्होंने कहा, मठ के अंदर लग्जरी माहौल, स्विमिंग पूल, गुप्त और रहस्यमयी कमरे हैं। इसका पूरा कंट्रोल 'स्वामी जी की सखी' के पास है और वहां किसी को जाने की इजाजत नहीं है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    देहरादून-दिल्ली NH पर भड़काऊ लिखने वालों पर FIR:26 फरवरी को गंगोह की महापंचायत में शामिल हुए, हिंदू युवती को मुस्लिम युवक ले गया भगाकर
    Next Article
    गोरखपुर में 24 लाख रुपये का तेल जब्त:एक साथ रखा था फ्रेश और एक्सपायर तेल; बिक्री पर रोक

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment