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    हजरत अली का यौमे शहादत मनाया:संभल में शिया समुदाय का तीन दिवसीय शोक समाप्त

    1 hour ago

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    संभल में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत अली का यौमे शहादत (शहादत दिवस) अकीदत के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मस्जिदों और अजाखानों में मजलिसों का आयोजन किया गया और शबीहे ताबूत निकाले गए। इसके साथ ही शिया समुदाय का तीन दिवसीय शोक समाप्त हो गया। संभल के थाना हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र की नगर पंचायत सिरसी में शिया समाज ने तीन दिवसीय यौमे गम के तीसरे दिन 21वीं रमजान पर हजरत अली का यौमे शहादत मनाया। यह आयोजन बुधवार-गुरुवार की मध्यरात्रि 2 बजे तक चला। इस दौरान अजाखानों से शबीहे ताबूत निकाले गए। तीन दिनों तक चली मजलिसों को शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हसीन अख्तर जैदी, मस्जिद सादात के इमाम मौलाना मीसम अब्बास, काजी हुसैन रजा, एहतेशाम अली, कमर अब्बास कम्बर, सफी असगर नजमी, मोहम्मद अब्बास, इकरार रजा, शादाब मेहंदी जाफरी, फैजान और शमीम सहित कई उलेमाओं ने खिताब किया। उलेमाओं ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे दुनिया के एकमात्र ऐसे शख्स थे जिनकी पैदाइश काबे में और शहादत मस्जिद में हुई। उन्होंने हजरत अली को ज्ञान का खजाना बताया और पैगंबर के कथन का उल्लेख किया कि 'मैं इल्म का शहर हूं और अली उसका दरवाजा हैं।' देखें 3 तस्वीरें… वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर को समझने के लिए पहले हजरत अली को समझना आवश्यक है। हजरत अली ने दुनिया को जीवन के सिद्धांत सिखाए। उनके विरोधी भी उनकी ईमानदारी, उदारता और बहादुरी को स्वीकार करते थे। उलेमाओं ने उनकी शिक्षाओं पर अमल करने से दीन और दुनिया में कामयाबी मिलने की बात कही। संभल कोतवाली क्षेत्र के गांव नूरियो सराय स्थित इमाम बारगाह सगीर हसन में भी मजलिस का आयोजन हुआ। यहां वक्ताओं ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के चचा, भाई और दामाद हजरत अली की शहादत का जिक्र किया। इसके बाद शबीहे ताबूत निकाला गया, जिसकी जियारत के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नम आँखों से लोगों ने हजरत अली के शबीहे ताबूत की जियारत की और मातम व नोहाख्वानी की गई। मातमी जुलूस इमाम बारगाह सगीर हसन से शुरू होकर हुसैनी चौक में समाप्त हुआ, जहाँ अजादारों ने देर रात तक मातम किया। इस दौरान अरशद हसन और मोहम्मद मुरतजिस इमाम ने नोहे ख्वानी की।
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