Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    हिमाचल में 'कैबिनेट रैंक' खत्म:नेताओं की सैलरी में 20% कट, सुविधाएं रोकी, CM का VIP कल्चर पर वार, कर्ज के दबाव में सख्ती

    7 hours ago

    1

    0

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘कैबिनेट रैंक’ के दर्जे को वापस ले लिया है। अब बोर्ड, निगम और आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रधान सलाहकार और अन्य अधिकारियों के पास कैबिनेट रैंक नहीं रहा। इसे लेकर आज (मंगलवार को) आदेश जारी कर दिए है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के आदेशों के मुताबिक- इनके वेतन का 20 फीसदी हिस्सा भी 30 सितंबर 2026 तक कट जाएगा। सरल भाषा में समझें तो यदि किसी नेता को अभी 2.50 लाख रुपए मासिक सैलरी मिल रही है तो उन्हें अब 2 लाख रुपए मिलेंगे। राज्य में कैबिनेट रैंक वाले नेताओं की मासिक सैलरी 2 से 2.50 लाख रुपए के बीच है। कैबिनेट रैंक वापसी को लेकर सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों को कह दिया है कि वे इन निर्देश को अपने-अपने विभागों व संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं और आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाए। इन नेताओं को दे रखा था ‘कैबिनेट रैंक’ सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य वन निगम में केहर सिंह खाची, प्रधान मीडिया सलाहाकार नरेश चौहान, पॉलिटिकल एडवाइजर सुनील कुमार बिट्टू, राज्य योजना बोर्ड में भवानी सिंह पठानिया, राज्य पर्यटन निगम में आरएस बाली, 7वें वित्त आयोग में चेयरमैन नंदलाल और सीएम के आईटी सलाहाकार गोकुल बुटेल को कैबनेट रैंक दे रखा है। अब इनसे तत्काल प्रभाव से कैबिनेट रैंक ले लिया गया है। तत्काल प्रभाव से आदेश लागू सरकार द्वारा तर्क दिया गया प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सरल बनाने के लिए कैबिनेट रैंक की समीक्षा की गई है। इस निर्णय के साथ ही इन पदों पर दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ से संबंधित सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं। CM बोले- RDG कटने के बाद लिया फैसला सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस प्रकार केंद्र ने हिमाचल की RDG (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) काटी है, उसे देखते हुए प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कैबिनेट रैंक वापस लिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसे फैसले लिए जाएंगे। कैबिनेट रैंक के कारण सरकार पर उठते रहे सवाल राज्य में थोक में कैबिनेट रैंक के कारण हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर समय-समय पर सवाल उठते रहे है। विपक्ष ने इसे बार बार मुद्दा बनाया है, क्योंकि कैबिनेट रैंक के साथ ऐसी नियुक्तियां सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही थी और जिलों में इनके दौरों के दौरान पुलिस और प्रशासन को भी प्रोटोकॉल की अनुपालना करनी पड़ती है। इनके गाड़ी, बंगले के साथ साथ वेतन भत्ते भी कैबिनेट रैंक के हिसाब से दिए जा रहे है। ये फायदा होगा लिहाजा सरकार द्वारा कैबिनेट रैंक वापस लेने के बाद सरकारी खर्च पर नियंत्रण होगा। इनके वेतन, भत्ते, गाड़ी इत्यादि सुविधाएं कैबिनेट रैंक के हिसाब से नहीं रहेंगे, बल्कि जिस बोर्ड निगम में तैनात है, उस हिसाब से मिलेंगे। इससे सरकार पर वित्तीय दबाव भी कुछ कम, VIP कल्चर में कमी, प्रोटोकॉल साफ और व्यवस्थित होगा। प्रदेश का बंटाधार कर चुके, अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा: जयराम नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह तमाशा है। अभी तक पायलट लगाकर घूमते रहे, सीपीएस बनाए, एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल की संख्या 100 के करीब पहुंच गई। अब कैबिनेट रैंक वापस लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रदेश का जो बंटाधार करना था, वह पहले कर दिया है। राज्य पर 1.10 लाख करोड़ का कर्ज बता दें कि हिमाचल सरकार पर पहले से ही एक लाख 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। राज्य के अपने आय के साधन सिमित है। इस बीच केंद्र ने लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी है। जून 2022 में राज्य का 3500 करोड़ का जीएसटी कंपनसेशन बंद हो चुका है। साल 2023 के शुरू में ही राज्य की लोन लेने की सीमा भी GDP के मुकाबले 5 फीसदी से घटाकर केंद्र ने 3 फीसदी कर दी है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने गंभीर आर्थिक संकट वाली स्थिति पैदा हो गई है। तीन दिन बाद सीएम सुक्खू को आगामी वित्त वर्ष का बजट पेश करना है। ऐसे में सरकार ने पहले ही खर्चों में कटौती शुरू कर दी है। ‌BJP बोली- वेतन में कटौती आंखों में धूल झोंकने वाला कदम प्रदेश भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि राज्य में जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट झेल रही है, लेकिन सीएम सुक्खू अपने समर्थकों को बोर्ड, निगम व आयोगों में नियुक्त करने में व्यस्त है। ऐसी नियुक्तियां सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट रैंक के अलावा पहले राजनीतिक नियुक्तियों वाले बोर्ड और निगमों के चेयरमैन व वाइस-चेयरमैन का ₹30 हजार प्रतिमाह मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर ₹80 हजार प्रतिमाह कर दिया गया। इसके अलावा आवास, आतिथ्य और अन्य भत्तों को जोड़कर इन पदों पर बैठे लोगों का कुल मासिक पैकेज लगभग ₹1.11 लाख से ₹1.30 लाख तक पहुंच गया। प्रदेश में मार्च 2026 तक करीब 40 चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन विभिन्न बोर्डों और कॉरपोरेशनों में नियुक्त किए जा चुके हैं। अब जब जनता के बीच इस मुद्दे पर सवाल उठे तो सरकार ने दिखावे के लिए 20 प्रतिशत वेतन कटौती की घोषणा कर दी, जो केवल “आंखों में धूल झोंकने वाला कदम” है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    पेटरनिटी लीव को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट बनाने कानून लाएं:इसकी अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरत के अनुसार तय करें, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश
    Next Article
    3 Idiots के सीक्वल पर मोना सिंह ने तोड़ी चुप्पी, कहा- कॉल अभी तक नहीं आया

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment