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    ‘हार नहीं मानी, तीसरी छलांग में क्वालिफाई किया’:लखनऊ में अग्निवीर रैली, बेटी बोली- सिलेक्ट हुई तो परिवार की पहली फौजी बनूंगी

    1 hour ago

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    लखनऊ में दो दिन (18 और 19 फरवरी को) चली अग्निवीर भर्ती रैली में कई प्रदेशों की बेटियां भी शामिल हुईं। दौड़ते समय 3 लड़कियां बेहोश भी हो गईं। 10 फीट लॉन्ग जंप में 3 मौके दिए गए। किसी ने पहली तो कोई तीसरी छलांग में 10 फीट कूद पाने में सफल हो गई। करीब 1000 किलोमीटर की दूरी से भी ये बेटियां लखनऊ आई थीं। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने इनसे बात कर जाना कि आखिर कैसे उन्होंने खुद को तैयार किया? आगे का सपना क्या है? क्यों इस मुकाम को पाना चाहती हैं। पढ़िए सिलसिलेवार जवाब... पढ़िए बेटियों ने जो कहा… बड़े पापा के मोटिवेशन से सपने के करीब पहुंची वाराणसी की साक्षी यादव के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। पिछले साल फॉर्म भरा, लिखित परीक्षा दी और जुलाई में रिजल्ट आया। रनिंग तक सब कुछ ठीक चला, लेकिन लॉन्ग जंप में दो बार फेल हो गईं। वह बताती हैं, “दो बार जब फेल हुई तो लगा शायद आज नहीं हो पाएगा, लेकिन बड़े पापा ने हिम्मत दी। कहा था कि डरना मत, पूरा दम लगा देना।” तीसरे अटेंप्ट में मैंने खुद को संभाला और छलांग लगाकर क्वालिफाई कर लिया। उस पल सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं जीती, बल्कि खुद पर भरोसा भी बढ़ गया। मेरे बड़े पापा फौज में हैं। बचपन से ही पिता और बड़े पापा कहते रहे कि तुम्हें फौज में जाना है। वही शब्द आज मेरे संकल्प की ताकत बने। मेरे खून में फौज, बचपन से वर्दी का सम्मान देखा मथुरा की पूनम चौधरी के लिए सेना एक सपना नहीं, बल्कि विरासत है। उनके पिता और बड़े भाई दोनों सेना में हैं। बचपन से वर्दी का सम्मान देखा और उसी माहौल में पली-बढ़ीं। पूनम सिर्फ जज्बे से नहीं, उपलब्धियों से भी मैदान में उतरी हैं। पूनम ने बताया- 13 राज्यों में मेडल जीत चुकी हूं। 400 मीटर दौड़ में नेशनल सिल्वर अचीवर हूं और रेसलिंग में भी कुछ मेडल हैं। RDCP में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। हॉर्स राइडिंग में नेशनल गोल्ड मेडल जीता और ओपन टॉप स्कोर में सम्मानित हुईं। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से भी पुरस्कार मिल चुका है। मेरे लिए वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, परिवार की परंपरा और देश के प्रति जिम्मेदारी भी है। पिताजी के बाद भैया भी फौज में हैं। इस तरह से फौज तो मेरे खून में दौड़ रहा है। परिवार का अब तक फौज से कोई नाता नहीं रहा उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रिया रावत अपने परिवार की पहली पीढ़ी होंगी जो सेना में कदम रखेंगी। रिया ने बताया- इस समय मैं परिवार के साथ देहरादून में रह रही हूं। मेरा एक छोटा भाई है। परिवार का अब तक फौज से कोई नाता नहीं रहा है। अगर मेरा चयन इस भर्ती में हो गया तो मैं अपने परिवार की पहली फौजी बनूंगी। इसकी वैकेंसी आने पर पता चला कि इसमें लड़कियों के लिए भी मौका है। रिया की आंखों में गर्व और जिम्मेदारी दोनों की झलक साफ दिखी। सुबह आलस्य आता तो पापा मोटिवेट करते हैं आगरा फतेहाबाद की निधि चौहान बिजनेसमैन परिवार से आती हैं, लेकिन उनका सपना हमेशा डिफेंस में जाने का रहा। उन्होंने NDA और अन्य परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन अवसर सीमित रहे। तब उन्होंने अग्निवीर के जरिये शुरुआत करने का फैसला किया। निधि कहती हैं, “जब सुबह उठने में आलस्य आता है तो पापा कहते हैं कि जब सपना देखा है तो उसे पूरा भी करो। तुम्हें उसे पाने के लिए खुद के साथ कठोरता दिखानी पड़ेगी।” पिताजी का वही भरोसा मुझे हर दिन मैदान तक खींचकर लाता है। पिता के सपने को सच करके ही घर जाऊंगी अल्मोड़ा की ममता बिष्ट ने 2020 में हाईस्कूल और 2022 में इंटरमीडिएट पास किया। अभी ग्रैजुएशन कर रही हैं। एक फ्रेंड से उन्हें अग्निवीर में लड़कियों की भर्ती की जानकारी मिली। ममता बताती हैं, “बचपन से सोचा था कि डिफेंस में जाना है। पापा आर्मी से रिटायर्ड हैं। उनकी वर्दी और अनुशासन देखकर प्रेरणा मिलती है। पापा कहा करते हैं कि तुम्हें फौज में जाकर देशसेवा करनी चाहिए। मेरे पांच बच्चों में तुम चारों बहनों से बहुत आशा है। मेरा सपना है कि तुम बेटों की तरह फौज में जाओ। उनके इस सपने को मुझे सच करना है। मैं पिताजी के सपनो को सच करके ही घर जाऊंगी।” टीचर के मोटिवेशन से फौज की तरफ बढ़े कदम फर्रुखाबाद की साधना राजपूत ने 12वीं तक पढ़ाई की है। उन्हें अग्निवीर भर्ती की जानकारी अपने टीचर से मिली। एनसीसी में ‘सी’ सर्टिफिकेट हासिल कर चुकी साधना कहती हैं, “मुझे लगा यही सही मौका है खुद को साबित करने का। टीचर ने मोटिवेट भी किया जिससे अब मैं फौज की तरफ जाना चाहती हूं।” ------------------------------- संबंधित खबर भी पढ़िए… लखनऊ में अग्निवीर भर्ती में दौड़ते-दौड़ते 3 लड़कियां बेहोश : लॉन्ग जंप में एक लड़की के पैर में मोच, यूपी-उत्तराखंड से 1000 बेटियां पहुंचीं महिला अग्निवीर भर्ती रैली में दौड़ते-दौड़ते 3 अभ्यर्थी गिरकर बेहोश हो गईं। लॉन्ग जंप के दौरान एक अन्य अभ्यर्थी के पैर में मोच आ गई। सभी को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। अभ्यर्थियों को 8 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करनी थी। 8 मिनट से कम समय में दौड़ पूरी करने पर ग्रेड-वन और 8 मिनट में पूरी करने पर ग्रेड-टू दिया गया। दौड़ में सफल अभ्यर्थी 3 फीट हाई जंप और 10 फीट लॉन्ग जंप के लिए क्वालिफाई किया। हाई जंप और लॉन्ग जंप में अभ्यर्थियों को 3-3 चांस दिए गए। (पूरी खबर पढ़िए)
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