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    ईरान के कुम शहर में रह रही फर्रुखाबाद की छात्रा:शरीयत की पढ़ाई कर रही, परिजनों से फोन पर बोली- हालात सही नहीं है

    3 hours ago

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    फर्रुखाबाद की एक छात्रा ईरान के कुम शहर में शरीयत की पढ़ाई कर रही है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले की खबर के बाद उसके परिजन चिंतित थे। रविवार सुबह छात्रा से बात होने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। छात्रा के पिता ने बताया कि हमले की जानकारी मिलने के बाद से बेटी से संपर्क नहीं हो पा रहा था। रविवार सुबह बेटी से व्हाट्सएप कॉल पर बात हुई। बेटी ने बताया कि अचानक हुए हमले के कारण ईरान का दूरसंचार नेटवर्क बाधित हो गया था। शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला घेरशामू खां निवासी मेराज हुसैन आब्दी की असगर रोड पर कपड़े सिलाई की दुकान है। उनकी पुत्री फिजा आब्दी पिछले छह महीने से ईरान के कुम शहर में रहकर शरीयत की पढ़ाई कर रही है। फिजा ईरान में तीन साल का कोर्स कर रही है, जिसमें वह कुरान पर शोध कर रही है। इससे पहले, उन्होंने आजमगढ़ के जामिया इमाम-ए-मेहदी मदरसा से शरीयत का पांच साल का कोर्स (उर्दू, फारसी, अरबी) पूरा किया था। मदरसे ने ही उन्हें आगे की तालीम के लिए ईरान भेजा था। मेराज हुसैन आब्दी ने बताया कि भारत और ईरान के संबंध अच्छे हैं, लेकिन बेटी से संपर्क न हो पाने के कारण चिंता थी। उन्होंने कहा कि आज सुबह बेटी से करीब 5-6 मिनट बात हुई है और अब सब ठीक है। फिजा ने बताया कि वहां के हालात सही नहीं हैं। अमेरिका और इज़राइल तेहरान पर हमले कर रहे हैं। वह क़ुम शहर में हैं, जो तेहरान से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर है और वहां अभी हालात सामान्य हैं। उन्होंने बताया कि खामनेई साहब पर पहले हमले के दौरान, जब वह मीटिंग कर रहे थे, उसी में सभी लोग मारे गए और शहीद हो गए। हमारे यहां अल्लाह की राह में जो कुर्बान हो जाता है, उसे शहादत का दर्जा मिलता है। आज जब बेटी से बात हुई तो उसने भी यही बताया कि खामनेई साहब शहीद हो गए हैं और वहां का माहौल बहुत गमगीन है। उन्होंने बताया कि ईरान के साथ-साथ हिंदुस्तान में भी माहौल गमगीन है। जहां शिया कौम अच्छी तादाद में रहती है, वहां खामनेई की याद में गम और गुस्से का इजहार किया जा रहा है। शिया कौम न लड़ने वाली है और न ही झुकने वाली है। उन्होंने कहा कि खामनेई साहब आतंकवाद के खिलाफ कभी नहीं झुके। बताया कि पिछले साल इज़राइल के साथ हालात खराब होने पर ईरान सरकार ने बच्चों को वापस भेज दिया था। इसी प्रकार, यदि इस बार हालात ज्यादा खराब होते हैं तो ईरान सरकार बच्चों को वापस भेज देगी। उन्होंने बताया कि बेटी अभी वापस नहीं आएगी। उसने कहा है कि यहां अभी हालात खराब नहीं हैं और यहां के मदरसों का जो फैसला होगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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