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    ईरानी रहबर की शहादत की खबर से हल्लौर में कोहराम:रो-रोकर छाती पीटते रहे लोग, जामा मस्जिद पर उमड़ा जनसैलाब, काले झंडे लगे

    3 hours ago

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    ईरान के सर्वोच्च रूहानी नेता आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत की खबर फैलते ही सिद्धार्थनगर जिले के शिया बहुल कस्बा हल्लौर में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को यह खबर डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के इस कस्बे में पहुंचते ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया, जो जल्द ही चीख-पुकार और मातम में बदल गया। खबर मिलने के बाद कस्बे की जामा मस्जिद पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी की आंखों में आंसू थे। वे छाती पीट-पीटकर मातम मना रहे थे। मस्जिद परिसर में 'इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन' की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे माहौल और भी गमगीन हो गया। मौलाना जैदी ने लोगों को संभाला जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामनेई सिर्फ ईरान के नेता नहीं, बल्कि दुनिया भर के मजलूमों की आवाज थे। मौलाना ने कहा, "अपनी शहादत से ईरान के लोगों ने एक मिसाल पेश की है। ऐ ईरान के लोगों, तुमको हमारा सलाम है। तुमने दीन की आबरू रखी और इस्लाम की इज्जत को कायम रखा है। अल्लाह हमें भी ताकत दे कि हम उनके बताए हुए मकसद पर आगे बढ़ते रहें।" उन्होंने आगे कहा कि रहबर की शहादत दुनिया के लिए एक मिसाल है और जालिम ताकतें उनके मिशन को खत्म नहीं कर सकतीं। मौलाना के अनुसार, रहबर भले ही इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनके उद्देश्य और विचार हमेशा जीवित रहेंगे और न्याय का मार्ग दिखाते रहेंगे। कस्बे में व्यापक शोक खबर की पुष्टि के बाद दरगाह चौक और अन्य प्रमुख स्थानों पर भी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। पूरे कस्बे में शोक का माहौल था। लोगों ने घरों और इमामबाड़ों पर काले झंडे लगाए और स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर शोक व्यक्त किया। कस्बे में तीन दिवसीय शोक की स्थिति बनी हुई है। लोग मानते हैं रूहानी मार्गदर्शक स्थानीय लोगों का कहना है कि आयतुल्लाह खामनेई की शख्सियत उनके लिए एक रूहानी मार्गदर्शक की तरह थी। उनकी शहादत ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया। लोग मानते हैं कि यह घटना दुनिया भर के मजलूमों के लिए बड़ा नुकसान है, लेकिन उनकी कुर्बानी हमेशा इंसाफ और हक की लड़ाई के लिए प्रेरणा देती रहेगी। प्रशासन की सतर्कता इस दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों द्वारा लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, कस्बे में शांति बनी हुई है और लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपने गम का इजहार कर रहे हैं। हल्लौर का गमगीन रविवार हल्लौर, जो उत्तर प्रदेश का प्रमुख शिया बहुल कस्बा माना जाता है, वहां इस खबर का गहरा असर देखने को मिला। कस्बे की गलियों में सन्नाटा और हर तरफ शोक का माहौल छाया हुआ है। रविवार का दिन हल्लौर के इतिहास में एक गमगीन दिन के रूप में दर्ज हो गया, जब हजारों लोगों ने अपने रूहानी रहबर को नम आंखों और भारी दिल से याद किया और उनकी शहादत पर मातम मनाया।
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