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    इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- 'सर तन से जुदा' उकसाने वाला नारा:'जय श्रीराम' जैसे धार्मिक नारों से तुलना नहीं; तौकीर रजा की जमानत खारिज की थी

    14 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसा नारा देश के कानून और उसकी एकता को खुली चुनौती देता है। यह नारा लोगों को हिंसा और देश के खिलाफ उकसाने वाला है। हाईकोर्ट के जज जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि इस नारे की तुलना ‘जय श्रीराम’, ‘हर हर महादेव’, ‘सत श्री अकाल’ या ‘अल्लाहु-अकबर’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा खान और उनके करीबी डॉ. नफीस खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। तौकीर रजा बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगों के मामले में आरोपी है। 27 सितंबर 2025 से जेल में बंद हैं। पुलिस ने तौकीर को दंगे का मास्टरमाइंड बताया है, जबकि तौकीर का कहना है कि उसे सियासी षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है। अधिवक्ता बोले- तौकीर को फंसाया गया याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वह निर्दोष हैं। उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के मामले में फंसाया गया है। उन्होंने हिंसा के लिए कोई आह्वान नहीं किया और न ही वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे। 26 सितंबर को घर में नजरबंद कर दिया गया था। तौकीर रजा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि वह हिंसा में शामिल नहीं थे। उनका तर्क था कि 26 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे उन्हें नजरबंद कर दिया गया था। इसलिए वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि उन्होंने न तो कोई भाषण दिया और न ही ऐसी कोई अपील की, जिसे हिंसा, अव्यवस्था या सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उकसाने वाला माना जा सके। तौकीर रजा की ओर से कहा गया कि प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने और धारा 163 लागू होने के बाद भीड़ जुटाने की अपील वापस ले ली गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद समुदाय के लोग इस्लामिया मैदान की ओर बढ़े। पुलिस द्वारा रोके जाने पर कथित तौर पर हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार के वकील ने कहा- तौकीर ने भीड़ को उकसाया राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी के मुताबिक, 19 सितंबर 2025 को बैठक कर आरोपियों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में जुटने और कथित अत्याचारों व झूठे मुकदमों के विरोध में प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार का आरोप है कि रोक के बावजूद करीब 200-250 लोग इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान की ओर बढ़े। पुलिस ने जब भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो कथित तौर पर नारेबाजी, पथराव और पेट्रोल बम से हमला किया गया। पुलिस पार्टी पर गोलीबारी किए जाने का भी आरोप है। इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। घटना के बाद आरोपी ने सह-आरोपियों के माध्यम से वीडिओ के माध्यम से बड़ी संख्या में पहुंचने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और उनके कृत्यों की सराहना की। कोर्ट ने कहा- कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों को मंजूरी नहीं हाईकोर्ट ने माना कि तौकीर रजा ने शुक्रवार की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र होने का आह्वान किया था। इसके लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों को मंजूरी नहीं दी जा सकती। सभी परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद कोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह था पूरा मामला बरेली में 26 सितंबर को आई लव मोहम्मद पोस्टर विवाद को लेकर तौकीर रजा ने प्रोटेस्ट बुलाया था। तौकीर ने लोगों से अपील की थी कि इस्लामिया ग्राउंड में बड़ी संख्या में सभी लोग पहुंचे। वही प्रशासन ने उन्हें प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं दी थी। अनुमति नहीं मिलने के बाद भी तौकीर ने पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती दी थी। तौकीर ने वीडियो जारी कर लोगो को उकसाने का काम किया था। रजा के आह्वान पर करीब 200 से 250 लोग कॉलेज पहुंच गए थे। पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो "सर तन से जुदा" के नारे लगाते हुए पथराव कर दिया था। पेट्रोल बम और हवाई फायरिंग भी हुई थी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया था। मामले में तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बनाया गया। कोतवाली में उसके खिलाफ 10 मुकदमे लिखे गए। पुलिस ने तौकीर को अरेस्ट कर जेल भेज दिया। इस पर तौकीर ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की थी। ………………………. ये खबर भी पढ़ें- विधायकों को रिश्वत दो, फिर अफसर-बाबू खा रहे कमीशन:यूपी में IAS अफसर घूस लिए बिना फंड जारी नहीं करते, कैमरे में रेट लिस्ट इस खबर के पहले पार्ट में आपने देखा और पढ़ा कि यूपी के विधायक कैसे विकास कार्यों की राशि में कमीशन खा रहे हैं। विधायकों के 35% हिस्से के बाद जो राशि बचती है, उसमें अफसरों का भी कमीशन होता है। इसका खुलासा करने के लिए हम विधायकों के अनुशंसा पत्र लेकर CDO ऑफिस पहुंचे। यहां तो रिश्वतखोरी का पूरा सिस्टम बना हुआ है। छोटे से कर्मचारी से लेकर बड़े अफसर तक सभी का रेट फिक्स है। पढ़ें पूरी खबर
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