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    इमरान की बेटी को ससुराल से निकाला, दामाद हुए सपाई:सहारनपुर के मसूद परिवार की कलह सुर्खियों में, तीसरी पीढ़ी में वर्चस्व की जंग

    1 day ago

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    सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के परिवार की अंदरूनी कलह एक बार फिर सुर्खियों में है। बेटी से मारपीट कर ससुराल से निकालने के आरोपों के बीच दामाद शायान मसूद ने सपा जॉइन कर ली और कांग्रेस सांसद के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद के रवैये से भाजपा को फायदा होता है। इस बीच इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान मसूद 22 अगस्त को फेसबुक पर लाइव आए। उन्होंने अपने बहनोई पर आरोप लगाते हुए कहा कि परिवार करीब 5 साल से कई बातें चुपचाप सहन कर रहा था, लेकिन बहन से ज्यादती के बाद अब चुप रहना संभव नहीं है। हालांकि, शायान ने कहा कि वह इसका जवाब दे सकते हैं, लेकिन निजी बातों को ऐसा उछालना ठीक नहीं है। इसके बाद पश्चिमी यूपी में काजी परिवार एक बार फिर चर्चा में है। करीब 50 साल से सहारनपुर की सियासत में प्रभाव रखने वाले इस परिवार की पहचान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. काजी रशीद मसूद ने बनाई थी। उनके बाद उसी राजनीतिक विरासत पर परिवार के अलग-अलग चेहरे दावेदारी जता रहे हैं। अब तीसरी पीढ़ी की एंट्री ने सियासी समीकरण ही बदल दिए हैं। यह लड़ाई वर्चस्व, विरासत और अगली पीढ़ी की राजनीतिक लॉन्चिंग की कहानी बनती दिखाई दे रही है। इसमें एक तरफ रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद का परिवार है और दूसरी तरफ है अपने दम पर मजबूत राजनीतिक पहचान बना चुके उनके भतीजे इमरान मसूद का परिवार। आइए समझते हैं… रशीद मसूद ने भतीजे इमरान को दी सियासी पहचान, फिर रास्ते अलग हुए काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद का राजनीतिक रिश्ता कभी बेहद मजबूत था। इमरान ने अपनी शुरुआती राजनीति चाचा रशीद मसूद की छाया में ही आगे बढ़ाई। 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर सपा के तत्कालीन मंत्री जगदीश राणा को हराया। इसके बाद इमरान का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर नकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और करीब 85 हजार वोट हासिल किए। लेकिन, चुनाव हार गए। यहीं से काजी परिवार के भीतर अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई की जमीन तैयार होने लगी। इमरान और काजी रशीद मसूद की राजनीतिक राहें अलग हो गईं। इमरान कांग्रेस में ही रहे, जबकि रशीद मसूद दोबारा सपा के साथ हो गए। 2014 बना सियासी दूरी का साल 2014 का लोकसभा चुनाव काजी परिवार की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जाता है। सपा ने सहारनपुर लोकसभा सीट पर इमरान मसूद को टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन इससे पहले वह पार्टी छोड़ चुके थे। इसके बाद सपा ने काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को टिकट दे दिया। इमरान ने यह चुनाव कांग्रेस से लड़ा। एक ही परिवार के दो चेहरे अलग-अलग पार्टी से आमने-सामने हो गए। नतीजा भी इस पारिवारिक सियासी मुकाबले की तस्वीर बताने वाला रहा। इमरान दूसरे नंबर पर रहे, जबकि शाजान चौथे नंबर पर। इस चुनाव के बाद परिवार की राजनीतिक दूरी और गहरी हो गई। यहीं से सवाल उठा कि काजी रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी कौन होगा? उनका बेटा शाजान या वो भतीजा, जिसे उन्होंने खुद लंबे समय तक सियासी जमीन तैयार करके दी थी? रशीद मसूद के निधन के बाद बेटे शाजान के सामने नई चुनाती आई 5 अक्टूबर, 2020 को काजी रशीद मसूद के निधन के बाद परिवार की सियासी तस्वीर और बदल गई। रशीद मसूद के बेटे शाजान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने की रही। यहीं से परिवार के भीतर एक नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई देने लगी। दूसरी तरफ, इमरान मसूद अपनी राजनीति को लगातार विस्तार देते रहे। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने सहारनपुर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। जिले की राजनीति में उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली मानी जाती रही कि कई विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरणों में भी उनका प्रभाव चर्चा में रहा। इस तरह एक ही परिवार के 2 राजनीतिक केंद्र बन गए। एक तरफ रशीद मसूद के वारिस के तौर पर शाजान मसूद और दूसरी तरफ अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना चुके इमरान मसूद। इमरान के जुड़वां भाई नोमान को हर बार हार मिली काजी परिवार की इस राजनीतिक कहानी में इमरान मसूद के जुड़वां भाई नोमान मसूद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नोमान ने भी चुनावी राजनीति में कई बार अपनी किस्मत आजमाई। 2017 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर गंगोह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर पर रहे। 2019 का उपचुनाव भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। बाद में 2022 में उन्होंने बसपा के टिकट पर भी इसी सीट से चुनाव लड़ा और हार गए। यानी परिवार की राजनीति में नोमान भी लगातार अपनी सियासी जमीन तलाशते रहे हैं। सियासत में काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की एंट्री काजी परिवार की सियासत में अब तीसरी पीढ़ी की एंट्री ने कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। शाजान मसूद के बेटे शायान मसूद ने 20 अगस्त को कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। उन्हें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल कराया। शायान के सपा में जाने के बाद उन्होंने अपने ससुर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की राजनीति से असहमति जताई। शायान का कहना था कि अगर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़नी है, तो भाजपा के खिलाफ बोलना होगा। उनका आरोप था कि इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव के खिलाफ बोल रहे हैं। इससे भाजपा को फायदा पहुंचता है। इसी राजनीतिक मतभेद को उन्होंने इमरान से अलग होने की वजह बताई। राजनीतिक तौर पर देखें, तो शायान का सपा में जाना महज पार्टी बदलना नहीं है। यह काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश है। भतीजा बोला- शायान ने बहन से ज्यादती की, मारपीट कर घर से निकाला रशीद मसूद की विरासत का उत्तराधिकारी कौन? काजी परिवार के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि काजी रशीद मसूद की विरासत को आगे कौन ले जाएगा? क्या वह इमरान मसूद होंगे, जिन्हें रशीद मसूद ने शुरुआती दौर में राजनीतिक जमीन दी थी? क्या बेटे शाजान मसूद अपने पिता की विरासत को फिर से मजबूत करने में सफल होंगे? क्या नोमान मसूद अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना पाएंगे? या फिर शायान मसूद नई पीढ़ी का चेहरा बनकर परिवार की राजनीति को नई दिशा देंगे? ------------------------- ये खबर भी पढ़िए- सांसद इमरान मसूद की बेटी से मारपीट, घर से निकाला, सहारनपुर में भतीजा बोला- शायान ने बहन से ज्यादती की सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी जॉइन करने के बाद पारिवारिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को इमरान के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने फेसबुक लाइव किया। इसमें उन्होंने अपने बहनोई शायान मसूद और उनके पिता शादान मसूद पर बहन से मारपीट कर घर से निकालने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर...
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