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    इंस्पेक्टर 75 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार, 5:15 घंटे चला ऑपरेशन:प्रयागराज में एंटी करप्शन टीम के सामने गिड़गिड़ाया, बोला- बहुत बदनामी होगी

    7 hours ago

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    प्रयागराज में एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को बारा थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) को 75 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। आज उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से रिमांड मंजूर होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। एंटी करप्शन टीम ने प्रभारी निरीक्षक को रंगे हाथ घूस लेते पकड़ने के लिए करीब 5 घंटे 15 मिनट तक ऑपरेशन चलाया। यह ट्रैप ऑपरेशन सुबह 9:23 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2:40 बजे निरीक्षक की गिरफ्तारी के साथ समाप्त हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि 75 हजार रुपये लेने के बाद भी निरीक्षक रकम की और मांग करता रहा। उसने शिकायतकर्ता से कहा कि रिश्वत की कुल राशि डेढ़ लाख रुपये तय हुई थी। वह आगे कुछ और कह पाता, उससे पहले ही ट्रैप टीम ने उसे दबोच लिया। अब जानिए एंटी करप्शन टीम ने कैसे जाल में फंसाया? डीएम से मांगे गए दो सरकारी चश्मदीद एंटी करप्शन टीम के एक सदस्य के अनुसार, सुबह 9:23 बजे पुलिस लाइन स्थित एंटी करप्शन थाने से टीम कलेक्ट्रेट पहुंची। वहां डीएम से मिलकर दो स्वतंत्र सरकारी गवाह (लोक सेवक) की मांग की गई। डीएम के आदेश पर चकबंदी कार्यालय में तैनात दो जूनियर असिस्टेंट गवाह के रूप में उपलब्ध कराए गए। इसके बाद टीम उन्हें लेकर पुनः पुलिस लाइन स्थित एंटी करप्शन कार्यालय पहुंची, जहां शिकायतकर्ता संतोष कुमार दुबे से प्राप्त नोटों पर फेनोल्फ्थलीन पाउडर लगाया गया। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोपहर 12:32 बजे ट्रैप टीम रवाना हुई। टीम में तीन इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल/हेड कांस्टेबल शामिल थे। जनसुनवाई के दौरान रिश्वत लेते इंस्पेक्टर गिरफ्तार योजना के अनुसार शिकायतकर्ता संतोष कुमार दुबे ने आरोपी इंस्पेक्टर को फोन किया। इंस्पेक्टर ने कहा कि वह थाने पर ही मौजूद है और वहीं आने को कहा। ट्रैप टीम शिकायतकर्ता के साथ थाने पहुंची। शिकायतकर्ता को एक लोकसेवक गवाह के साथ थाने के अंदर भेजा गया। उस समय आरोपी इंस्पेक्टर जनसुनवाई में बैठा था। शिकायतकर्ता को देखते ही उसने प्रभारी निरीक्षक ऑफिस की ओर जाने का इशारा किया। कुछ देर बाद जनसुनवाई समाप्त होने पर वह अपने ऑफिस में गया और शिकायतकर्ता को भी बुला लिया। दराज में रखे ही थे रुपये, तभी टीम ने दबोचा ट्रैप टीम के सदस्य थाने परिसर में अलग-अलग स्थानों पर अपनी पहचान छिपाकर खड़े रहे। कुछ सदस्य प्रभारी निरीक्षक कक्ष के दरवाजे के बाहर लगे शीशे से अंदर की गतिविधि पर नजर रख रहे थे। इंस्पेक्टर के इशारे पर शिकायतकर्ता ने झोले में रखा रुपये से भरा लिफाफा उसे सौंपा। आरोपी ने लिफाफा अपनी मेज की बाईं दराज में रख लिया। जैसे ही उसने रुपये दराज में रखे, बाहर खड़ी ट्रैप टीम भीतर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। नोटों से भरा लिफाफा भी टीम ने कब्जे में ले लिया। डेढ़ लाख की बात हुई थी, 75 हजार क्यों लाए हो ट्रैप कार्रवाई के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। शिकायतकर्ता के अनुसार, 75 हजार रुपये लेने के बाद भी इंस्पेक्टर ने कहा कि जब डेढ़ लाख रुपये में बात तय हुई थी, तो 75 हजार ही क्यों लाए। उसने कथित तौर पर कहा कि वह मुकदमे में चार्जशीट लगा देगा। यह जानकारी संतोष कुमार दुबे ने अपने बयान में एंटी करप्शन टीम के सामने दी। बड़ी बदनामी होगी, स्टाफ की दुहाई देता रहा एंटी करप्शन टीम ने अपना परिचय देकर इंस्पेक्टर को पकड़ा तो वह घबरा गया। पहले रौब झाड़ने की कोशिश की, फिर कहा कि बड़ी बदनामी होगी। जब टीम ने कोई रियायत नहीं दी, तो उसने स्टाफ का हवाला देते हुए लिहाज करने की बात कही। इस बीच थाने के कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग कक्ष की ओर आने लगे। हालात को देखते हुए ट्रैप टीम ने आरोपी को तुरंत अपने वाहन में बैठाकर घूरपुर थाने पहुंचाया। एंटी करप्शन कोर्ट में पेशी, नैनी जेल भेजा गया आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ घूरपुर थाने में एंटी करप्शन ट्रैप टीम के इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा की ओर से जीरो एफआईआर दर्ज की गई। देर रात मुकदमा एंटी करप्शन थाना प्रयागराज में ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपी को गुरुवार को एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया और रिमांड मंजूर होने पर उसे नैनी जेल भेज दिया गया।
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