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    इस्तीफा, गिरफ्तारी और दोबारा चुनाव की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लामबंद हुआ विपक्ष, पढ़ें 10 बड़े नेताओं के तीखे हमले

    20 hours ago

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    वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट के बाद देश का सियासी पारा गरमा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज पर पूरा विपक्ष एकजुट होकर हमलावर हो गया है। कांग्रेस, टीएमसी, सपा, आप और शिवसेना (यूबीटी) समेत विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला बताते हुए सीईसी के इस्तीफे, गिरफ्तारी और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। विपक्ष ने न केवल आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि कई राज्यों में बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की मांग भी छेड़ दी है।राहुल गांधीलोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) को लेकर भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर फिर से हमला बोला है। गांधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और चुनाव आयोग पर लोगों के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग जो कदम उठा रहा है, वे गलत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया "वोट की चोरी" के बराबर है और इसे देश के संवैधानिक ढांचे पर हमला बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत में वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। BJP, RSS और EC, जिन्होंने इसे अंजाम दिया है, उन्होंने देशद्रोह किया है। न्याय जरूर होगा। इसे भी पढ़ें: अगर वोट चोरी हुए, तो हम कैसे हारे? BJP ने बंगाल की किन सीटों का ज़िक्र कर दिया विपक्ष को जोरदार जवाबममता बनर्जीपश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की देखरेख में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की। बनर्जी ने कहा बीजेपी और ज्ञानेंद्र कुमार एक जॉइंट वेंचर कंपनी की तरह हैं। उन्होंने मिलकर बंगाल चुनाव में धांधली की। अगर आपमें थोड़ी भी नैतिकता है, तो हमारा चुनाव हमें वापस लौटा दें। उनके ये बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन को खत्म करने के कुछ महीनों बाद आए हैं। शुरुआती नतीजों में BJP ने 293 में से 207 सीटें जीतीं और बहुमत के लिए ज़रूरी 147 सीटों का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया, जबकि TMC को 80 सीटें मिलीं।अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रिपोर्ट को 'बेहद गंभीर' बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त अपनी सही ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभा पा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्य फ़ैसले लेने के लिए आज़ाद नहीं हैं या उनकी चिंताओं को नहीं सुना जाता है, तो इसके लोकतंत्र पर गंभीर असर पड़ेंगे। समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा, "इसका सीधा मतलब है कि सभी चुनाव आयुक्त अपनी सही ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभा पा रहे हैं। अगर किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को सही काम करने की आज़ादी नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। सत्ता में बैठे लोगों के हाथों की कठपुतली बनकर लोकतंत्र के साथ धोखा करना एक गंभीर संवैधानिक अपराध है। यह लोकतंत्र को खत्म करने की साज़िश से कम नहीं है। यादव ने सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। अरविंद केजरीवालआम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने  मांग की कि मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया रद्द की जाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। केजरीवाल ने अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि कुमार निर्वाचन आयोग को अपने स्तर पर चला रहे हैं, जिससे देशभर में की जा रही एसआईआर की पूरी प्रक्रिया अवैध हो गई है। इसलिए आज हम मांग करते हैं कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए, एसआईआर के तहत किए गए सभी बदलाव रद्द किए जाएं और तीन साल पहले की मतदाता सूची बहाल की जाए।’’ उन्होंने कहा कि कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। असदुद्दीन ओवैसी एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के ज़्यादातर सदस्यों को उन फैसलों के बारे में पता ही नहीं था जो उनके नाम पर लिए गए थे, तो उन फैसलों की वैधता क्या है? उन्होंने दावा किया कि एक समय भारत के ज़्यादातर लोगों का चुनाव आयोग (EC) पर भरोसा था, लेकिन इसमें लगातार गिरावट आई है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में पूछा अगर चुनाव आयोग के ज़्यादातर सदस्य खुद ही उन फ़ैसलों के बारे में नहीं जानते जो उनके नाम पर लिए गए हैं, तो उन फ़ैसलों की वैधता क्या है?उद्धव ठाकरे शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए और जेल भेजा जाए। यह मांग द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के बाद की गई, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयोग के बाकी दो आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग करते हुए ठाकरे ने आयोग द्वारा लिए गए सभी "गलत फैसलों" को रद्द करने और महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके नए सिरे से चुनाव कराने की भी मांग की। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा ज्ञानेश कुमार को तुरंत बर्खास्त कर जेल भेजा जाना चाहिए।" उन्होंने संधू और जोशी का भी धन्यवाद किया कि उन्होंने अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज कराईं, जिससे, उनके अनुसार, देश के सामने ज्ञानेश कुमार की असलियत सामने आ गई।अभिषेक बनर्जीटीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने CEC को तुरंत हटाने और कोर्ट की निगरानी में जाँच के आदेश देने की माँग की। उन्होंने कहा, "सिर्फ़ एक राजनीतिक पार्टी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए लाखों वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर प्रहार है। इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद, INDIA गठबंधन की सभी विपक्षी पार्टियों ने CJI और SC जजों को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएँ जताई थीं। हालाँकि, उन आरोपों की न तो जाँच हुई और न ही उन पर ज़रूरी गौर किया गया। जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले गंभीर सवाल बार-बार उठाए जाते हैं और फिर भी उन पर कोई सुनवाई नहीं होती, तो इससे संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है। सुप्रीम कोर्ट इससे मुँह नहीं मोड़ सकता। कपिल सिब्बलराज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने  दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच बहुमत का समर्थन हासिल नहीं है। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची की प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा, "ऐसा लगता है कि इस देश में कुछ लोगों के पास अभी भी ज़मीर है... देखिए चुनाव आयोग में किस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं।उमर अब्दुल्लाजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने  कहा कि इन घटनाओं से चुनाव आयोग के कामकाज पर कई सवाल उठते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया के तहत लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे। अब्दुल्ला ने कहा कि इससे कई सवाल उठते हैं। SIR का मुद्दा राष्ट्रीय चिंता का विषय बनने से पहले ही हमें चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें थीं। हमारे लिए परिसीमन एक बड़ा मुद्दा था; हमारा मानना ​​था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसमें कमियां थीं, इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक पार्टी और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था।" उन्होंने आगे कहा, "अगर यह संविधान पर हमला नहीं है, तो क्या है? राहुल बिल्कुल सही थे। अब हमें यह देखना होगा कि इसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।तेजस्वी यादवबिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेकर उनका इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी की। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में सामने आई रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 
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