Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जज बोले- मुस्कान और साहिल की सोच घिनौनी, हवस भरी:दोनों बेरहम, इन्हें पछतावा नहीं; नीले ड्रम कांड पर फैसले की 10 बड़ी बातें

    5 hours ago

    1

    0

    ‘मुस्कान और साहिल को सौरभ की हत्या का कोई पछतावा नहीं है। अपराध के बाद दोनों का व्यवहार उनकी घिनौनी सोच और हवस को दिखाता है।’ ये बातें मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने ‘नीला ड्रम कांड’ में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने से जुड़े अपने 163 पन्नों के आदेश में लिखी हैं। जिला जज ने कहा- अपने ही घर में पति की हत्या करना, शव के टुकड़े करना और सबूत छिपाने का तरीका समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है। मुस्कान और साहिल के सुधरने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की संभावना नहीं है। ऐसे में उन्हें सजा में राहत देने का कोई कारण नहीं बनता। मुस्कान ने परिवारों की मर्जी के खिलाफ बचपन के प्रेमी सौरभ राजपूत से लव मैरिज की थी। शादी के बाद उसका स्कूल के पुराने प्रेमी साहिल से फिर संबंध बन गया। इसी रिश्ते के चलते मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या कर दी। शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छुपा दिया था। अब पढ़िए, जजमेंट ऑर्डर की 10 बड़ी बातें… 1- कानून का काम समाज की रक्षा करना है जिला जज ने अपने फैसले की शुरुआत महाभारत के उद्योगपर्व (अध्याय 29) के श्लोक 48 से की- निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥ मतलब- बिना जंगल के बाघ का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। बाघ के बिना जंगल भी काट दिया जाता है। इसलिए बाघ को वन की रक्षा करनी चाहिए और वन को भी बाघ का संरक्षण करना चाहिए। जज ने कहा- कानून और सजा का मकसद समाज की रक्षा करना है। कानून और सजा के बिना समाज में व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल है। इसलिए समाज और कानून, दोनों को एक-दूसरे की रक्षा करनी चाहिए। 2- अपने ही घर में हत्या कर शव के टुकड़े करना बेहद क्रूर जज ने फैसले में लिखा- मुस्कान और साहिल ने बेहद क्रूर तरीके से सौरभ की हत्या की। सौरभ कई साल विदेश में रहने के बाद अपने परिवार के साथ रहने की उम्मीद लेकर घर लौटा था। उसी घर में उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर दिए। जज के मुताबिक, घटनास्थल की दीवारों और छत पर खून के निशान इस क्रूरता की गवाही देते हैं। फैसले के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ की छाती पर चढ़कर उसके सीने में चाकू से तीन वार किए। इसके बाद उसकी गर्दन और दोनों कलाइयों को काटकर अलग कर दिया। शव से निकले खून के निशान कमरे की दीवारों तक पर फैल गए थे। हत्या के बाद दोनों शव के टुकड़ों को साहिल के घर ले गए और रातभर वहीं रहे। 3- शव छिपाने का तरीका समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला जज ने लिखा- सौरभ की हत्या के बाद शव और सबूत छिपाने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। यह समाज की अंतरात्मा को झकझोर देता है। मुस्कान और साहिल ने शव के टुकड़े करने के बाद सिर और कलाइयों को अलग-अलग तकिए के कवर में रखा। अगले दिन शव के टुकड़ों को प्लास्टिक के नीले ड्रम में डालकर सीमेंट के घोल से बंद कर दिया। 4- मुस्कान-साहिल के व्यवहार में दिखी घिनौनी सोच और हवस फैसले में जज ने लिखा- मुस्कान और साहिल को अपने अपराध पर कोई पछतावा नहीं है। अपराध के बाद उनका व्यवहार उनकी घिनौनी सोच और हवस को दिखाता है। सौरभ की हत्या कर शव नीले ड्रम में छिपाने के बाद मुस्कान और साहिल 15 दिनों के लिए हनीमून ट्रिप पर मनाली, शिमला और कसोल घूमने गए। इस दौरान उन्होंने साहिल का जन्मदिन मनाया, नशे में डांस किया, होली पार्टी की और आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए। 5- ऐसा अपराध समाज में नफरत और गुस्सा पैदा करता है जज ने कहा- यह सोचना भी मुश्किल है कि कोई शादीशुदा महिला अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की इतनी बेरहमी से हत्या कर सकती है। यह सिर्फ पति के भरोसे को तोड़ना नहीं, बल्कि समाज के भरोसे को भी चोट पहुंचाना है। ऐसा अपराध समाज में गहरी नफरत और गुस्सा पैदा करता है। 6- अपराध का तरीका बेरहम और अमानवीय, समाज में गुस्सा जज ने पंजाब के मच्छी सिंह केस का जिक्र किया। 12 अगस्त, 1977 की रात पारिवारिक रंजिश और बदले के लिए मच्छी सिंह और उसके साथियों ने 17 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी और 3 लोगों को घायल कर दिया था। बाद में मच्छी सिंह को फांसी की सजा दी गई। जज ने कहा कि मुस्कान और मच्छी सिंह जैसे अपराध सामाजिक संतुलन के लिए नुकसानदेह है। यह उन अपराधों की श्रेणी में है, जो बेहद बेरहम, वीभत्स, शैतानी और कायरतापूर्ण तरीके से किए जाते हैं। ऐसे अपराध समाज में गहरा आक्रोश पैदा करते हैं। 7- सजा कम करने की वजहों पर अपराध की गंभीरता भारी जज ने कहा- इस मामले में अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाली परिस्थितियां, सजा कम करने वाली वजहों से कहीं ज्यादा भारी हैं। मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या के बाद शव छिपाने के लिए बेहद क्रूर तरीका अपनाया। इसके बाद दोनों 15 दिन के टूर पर हनीमून मनाने गए। जेल में भी उनके व्यवहार में अपराध को लेकर पछतावा नहीं दिखा। जज के मुताबिक, अपराध की गंभीरता सजा में राहत देने की वजहों पर भारी पड़ती है। 8- यह अपराध दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में आता है जिला जज ने अपने आदेश में लिखा कि यह मामला दुर्लभतम अपराधों की श्रेणी में आता है। अदालत इस निष्कर्ष पर बिना किसी हिचकिचाहट के पहुंची है। मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या के बाद शव के टुकड़े किए और उन्हें छिपाने की कोशिश की। शव के साथ की गई बेरहमी को देखते हुए अदालत ने अपराध को बेहद गंभीर माना। 9- सजा में नरमी बरतने की कोई वजह नहीं जज ने लिखा कि मुस्कान और साहिल के सुधरने और समाज में वापस लौटने की संभावना नहीं दिखती। ऐसे में उन्हें सजा में राहत देने का कोई कारण नहीं है। अदालत के मुताबिक, इस मामले में नरमी बरतने लायक कोई परिस्थिति नहीं है। जजमेंट में जेल से मिली रिपोर्ट का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, मुस्कान और साहिल मानसिक रूप से सामान्य थे। उनमें तनाव या घबराहट के लक्षण नहीं दिखे। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों के व्यवहार में अपने अपराध को लेकर पछतावा नजर नहीं आया। 10- समाज के भरोसे को पूरी तरह तोड़ने वाला अपराध जज ने आखिरी में लिखा- यह अपराध सिर्फ एक व्यक्ति का भरोसा तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाता है। फांसी की सजा का हूबहू आदेश पढ़िए 'सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सभी दिशा-निर्देशों पर गंभीरता से विचार करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को उम्रकैद की सजा देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में दोषियों को मृत्युदंड देने के अलावा कोई दूसरा दंड उचित नहीं लगता। मृत्युदंड के आदेश के तहत दोषियों को फांसी पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।' दो हिस्सों में जजमेंट ऑर्डर जजमेंट ऑर्डर कुल 163 पन्नों का है। इसके शुरुआती 126 पन्नों में पूरे केस का घटनाक्रम, 22 गवाहों के बयान, सबूतों की जानकारी और मुकदमे की सुनवाई के दौरान हुई बहस का सार दर्ज है। ये पन्ने 30 सितंबर 2026 की रात तक टाइप किए गए थे। इसी दिन जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी ठहराया था। उस दिन जिला जज ने कहा था- मुस्कान और साहिल, तुम दोनों सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी हो। सजा का ऐलान 14 दिन बाद किया जाएगा। जज ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 35 से ज्यादा पुराने फैसलों का भी जिक्र किया है। जजमेंट के दूसरे हिस्से में 37 पन्ने हैं। इनमें अदालत के निष्कर्ष और मृत्युदंड देने का आदेश दर्ज है। ये पन्ने 14 अक्टूबर, 2026 की शाम मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद टाइप किए गए। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें- सजा-ए-मौत मिलने के बाद मुस्कान मेरठ जेल में रो रही: खाना भी नहीं खाया, कैदी नंबर-396 मिला; प्रेमी साहिल ने खेत में काम किया मेरठ के सौरभ हत्याकांड में सजा-ए-मौत मिलने के बाद मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर जेल के नए नियम लागू हो गए हैं। गुरुवार को दोनों का सजायाफ्ता कैदी के तौर पर पहला दिन है। मुस्कान को कैदी नंबर-396 और साहिल को नंबर- 395 दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    मां बोली- मेरी बच्ची से टीचर ने गलत काम किया:गंदी बातें करता था, मिर्जापुर में 50 साल के सरकारी टीचर ने की रेप की कोशिश
    Next Article
    दिव्या मित्तल के ऐलान-ए-जंग से खौफ में BJP विधायक:बृजभूषण की पहुंच इलॉन मस्क तक, मॉडल श्रद्धा को कौन बचा रहा?

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment