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    जज को फोन करने के विवाद पर कमिश्नर की सफाई:गोंडा में बोलीं- सरकारी जमीन के 30 साल पुराने मामले में प्रशासनिक स्थिति जानने के लिए किया था फोन

    1 hour ago

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    गोंडा में देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सिविल जज सीनियर डिवीजन शबीना खान को फोन करने से जुड़े विवाद पर अपना पक्ष रखा है। कमिश्नर ने कहा कि उनका उद्देश्य करीब तीन दशक पुराने सरकारी नजूल भूमि से जुड़े मामले की प्रशासनिक स्थिति जानना और सरकार के हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था। कमिश्नर के अनुसार, यह मामला करीब 1997 से लंबित है और अत्यंत मूल्यवान सरकारी नजूल भूमि से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध अभिलेखों के मुताबिक, भूमि वर्ष 1985 में पट्टा निरस्त होने के बाद सरकार के नाम दर्ज की गई थी। इसके बावजूद वर्ष 2008 से बिना किसी वैध कानूनी दस्तावेज के एक साधारण कागज के आधार पर कथित पट्टा दर्शाए जाने की बात सामने आई है। इसी भूमि पर एक निजी विद्यालय संचालित होने की जानकारी भी दी गई है। कमिश्नर ने कहा कि पदभार संभालने के बाद जब उन्हें इस पुराने मामले की जानकारी मिली तो उनका उद्देश्य सरकारी भूमि का संरक्षण करना और लंबित वाद में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था। 'फोन पर केस को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई' दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें संबंधित पीठासीन अधिकारी के अवकाश से लौटने की तारीख या अवकाश बढ़ने की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसी वजह से उन्होंने फोन कर केवल यह जानने का प्रयास किया कि वह कब वापस लौट रही हैं। कमिश्नर ने कहा कि फोन पर न तो वाद के गुण-दोष पर कोई चर्चा हुई, न किसी आदेश या निर्णय को लेकर बात हुई और न ही वाद संख्या या वाद का नाम लेकर कोई चर्चा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पीठासीन अधिकारी की ओर से दिए गए पत्र में भी यह उल्लेख नहीं है कि मंडलायुक्त ने वाद का नाम या संख्या लेकर बातचीत की थी। '27 साल की सेवा' के उल्लेख को बताया गलत कमिश्नर ने पीठासीन अधिकारी के पत्र में उनकी '27 वर्ष की सेवा' के उल्लेख को भी तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सेवा अवधि करीब 16 वर्ष है। उन्होंने यह भी बताया कि उनसे बात करने के लिए संदेश दिए जाने के बाद पीठासीन अधिकारी ने स्वयं उन्हें वापस फोन किया था। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी गरिमा का पूर्ण सम्मान करती हैं। उनके अनुसार, पूरे घटनाक्रम को इसी तथ्यात्मक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कमिश्नर ने दोहराया कि उनका उद्देश्य करीब 30 वर्षों से लंबित सरकारी भूमि से जुड़े मामले में केवल प्रशासनिक स्थिति की जानकारी लेना और सरकारी हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था।
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