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    जालौन में इंस्पेक्टर अरुण राय की मौत मामला:सिपाही के वकील बोले- मीनाक्षी को बेवजह फंसाया गया, सरकारी वकील की दलील- मौत के समय मौजूद थी

    15 hours ago

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    कुठौंद थाने में तैनात इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की मौत के मामले में हत्या के आरोप में जेल में बंद सिपाही मीनाक्षी शर्मा की जमानत याचिका पर सोमवार को उरई स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। जिला न्यायाधीश विरजेंद्र कुमार सिंह की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रख लिया। देर शाम तक इस मामले में निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है। सुनवाई के दौरान सिपाही मीनाक्षी शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी ने पैरवी करते हुए अदालत में दलील दी कि मीनाक्षी 7 दिसंबर 2025 से जिला कारागार उरई में निरुद्ध हैं। उसे बेवजह हत्या के मामले में फंसाया गया है। उसने किसी प्रकार का अपराध नहीं किया। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर तथ्यों पर आधारित नहीं है। उसे न्यायालय से जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता लखनलाल निरंजन ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना के समय मीनाक्षी शर्मा कोंच कोतवाली क्षेत्र में डायल-112 में तैनात थी और घटना से पहले वह तीन दिन की छुट्टी पर गई थी, जिसके बाद उसके लापता होने की पुष्टि जीडी में दर्ज है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि घटना वाले दिन वह इंस्पेक्टर अरुण राय के कमरे में गई थी और उसी दौरान यह वारदात हुई। शासकीय अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि इंस्पेक्टर के सिर में गोली लगने के साथ एक अन्य चोट का निशान भी मिला, जो घटना को और पुख्ता बनाता है। अभियोजन के अनुसार मीनाक्षी के कमरे में मौजूद रहने और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसी पर वारदात को अंजाम देने का संदेह है, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। आधे घंटे चली सुनवाई करीब आधे घंटे चली सुनवाई के बाद जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर आदेश सुरक्षित रख लिया। अब सभी की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। संभावना जताई जा रही है कि देर शाम तक जमानत पर आदेश आ सकता है।
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