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    जलनिगम परिसर में पेयजल टंकी का निर्माण संतों ने रोका:हनुमानगढ़ी की हरिद्वारी पट्‌टी ने इसे अपना बताया, नगर निगम करा रहा था निर्माण

    2 hours ago

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    अयोध्या में भूमि विवाद को लेक हनुमानगढ़ी की हरिद्वारी पट्‌टी के संत और नगर निगम आमने-सामने हैं। हरिद्वार की भूमि पर जल निगम द्वारा पानी की टंकी तथा एक भवन के निर्माण को लेकर संतों ने कड़ा विरोध जताया है। संतों का आरोप है कि न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना के निर्माण कराया जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। सेवा के उद्देश्य से इसे नगर पालिका को किराए पर दिया हरिद्वार के महंत मुरली दास ने कहा कि संबंधित भूमि पट्टी की संपत्ति है। पूर्व में अयोध्या की सेवा के उद्देश्य से इसे नगर पालिका को किराए पर दिया गया था, किंतु किराया भी नियमित रूप से नहीं दिया जाता रहा। इस संबंध में न्यायालय में वाद दायर किया गया है, जिस पर वर्तमान में स्थगन आदेश प्रभावी है। इसके बावजूद नगर निगम एवं जल निगम द्वारा बिना किसी पूर्व अनुमति और सूचना के पानी की टंकी तथा एक छोटे भवन का निर्माण कराया जा रहा है। महंत मुरली दास ने बताया कि हनुमानगढ़ी में पंचायती व्यवस्था लागू है और पट्टी की संपत्ति से संबंधित निर्णय पट्टी के महंतों एवं संतों की बैठक में लिया जाता है। यदि पट्टी स्तर पर निर्णय नहीं हो पाता, तो अखाड़े की बैठक में संत-महंत सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, निर्माण कार्य विधि सम्मत नहीं उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब इस प्रकार का निर्माण कार्य विधि सम्मत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अयोध्या के मेयर से वार्ता की गई है। मेयर ने आश्वस्त किया है कि संबंधित अधिकारी शीघ्र ही मौके पर आकर संतों से वार्ता करेंगे। पहलवान राजेश दास ने कहा कि यह भूमि पट्टी की संपत्ति है और इसके संबंध में अंतिम निर्णय पट्टी के संतों द्वारा ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कराया जाना संत समाज को स्वीकार्य नहीं है। महंत मुरली दास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को रोका इसी कारण संतों ने महंत मुरली दास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को रुकवा दिया।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक संबंधित अधिकारियों के साथ वार्ता कर समाधान नहीं निकलता, तब तक किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। यदि इसके बावजूद निर्माण का प्रयास किया गया तो संत समाज वहीं बैठकर श्री सीताराम नाम संकीर्तन करते हुए आंदोलन करेगा।फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल है और संत समाज की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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