Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जेन-अल्फा प्रदर्शनों से निपटने के लिए लाठीचार्ज नहीं, बातचीत होगी:सिर्फ युवा अफसर मौके पर भेजे जाएंगे; यूपी सरकार SOP बना रही

    6 hours ago

    1

    0

    यूपी में जेन-अल्फा यानी 14 साल तक के बच्चे सड़कों पर उतर रहे हैं। इनके मुद्दे छोटे-छोटे हैं। स्कूल तक सड़क नहीं है। शिक्षकों की कमी है। मेस का खाना ठीक नहीं है। 19 अगस्त (बुधवार) को एक साथ उन्नाव, हमीरपुर और महोबा शहरों में जेन-अल्फा ने प्रदर्शन किए। इससे पहले लखनऊ में छात्रों ने सड़क जाम कर दी थी। कन्नौज में मेस के घटिया खाने से नाराज होकर खुद को कमरे में बंद कर लिया था। इन प्रदर्शनों का कोई चेहरा नहीं था। अधिकारियों के सामने सिर्फ बच्चे थे। उन्हें कैसे मनाए? क्या डांटे या उन्हें भगा दें? अधिकारियों के लिए ऐसी स्थिति पहली बार बनी। इसलिए यूपी सरकार एक विशेष SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) तैयार कर रही है। इसके 2 मकसद हैं- पहला- स्कूली छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में उनके मुद्दे ठीक से समझे जाएं। उनकी समस्याओं को मौके पर ही खत्म करके संतुष्ट किया जाए। दूसरा- ‘बच्चों के अधिकारों’ का खास ध्यान रखा जाए। किसी भी हाल में बच्चों पर बल प्रयोग न हो। उत्तर प्रदेश सरकार की SOP में क्या खास, पहले ये जानिए इस SOP में क्या खास है? इसके जवाब में भाजपा प्रदेश संगठन के एक पदाधिकारी कहते हैं- जंतर-मंतर की घटनाओं से भाजपा और सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने सबक लिया है। अब नरम रवैया अपनाने का फैसला किया है। सीधे तौर पर कहे तो 'लाठी-डंडे' नहीं, अब 'संवाद' ही रास्ता होगा। इस पर केंद्रीय और राज्य संगठन की सहमति बन चुकी है। अब जहां पर जेन-जी या जेन-अल्फा सड़क पर प्रदर्शन करेंगे, उस जिले के सिर्फ युवा अफसर उनसे बातचीत करेंगे। वो भी अफसर की तरह नहीं, दोस्त की तरह। वो बातें सुनेंगे, जहां तक संभव होगा, मौके पर ही समस्या खत्म की जाएगी, जिससे बच्चों में सरकार के लिए भरोसा बने। SOP में यह भी साफ किया जा रहा कि किसी भी स्थिति में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर मुकदमे नहीं होंगे। जेन-जी तक सरकार की मजबूत पैठ के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई 'यूथ पॉलिसी' लाने का ऐलान किया है। इसमें सरकार 4 बड़े कदम उठाने जा रही है- 1. युवा आयोग बनेगा- इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के बजाए युवाओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। वो अपनी समस्याओं, प्राथमिकताओं और नीतियों को सीधे सरकार के सामने रख सकेंगे। 2. रोजगार बढ़ाएंगे- सभी भर्ती आयोगों (UPPSC, UPSSSC, शिक्षा सेवा चयन आयोग) को रिक्त पदों पर नियुक्ति करने और भर्ती परीक्षाओं के रिजल्ट जल्दी जारी करने के लिए कहा गया है। 3. आउटसोर्स सेवा निगम भर्तियां करेगा- आयोग अगस्त महीने से काम शुरू करने लगेगा। दिसंबर से पहले 1 लाख नई भर्तियां होनी है, जिनमें जेन-जी को सबसे ज्यादा जॉब मिलेंगी। राज्य परिवर्तन आयोग में साइबर सुरक्षा निदेशक, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर और स्टेट डेटा अथॉरिटी से जुड़े पदों पर सीधी भर्तियों तेजी से होंगी। 4. हाईटेक सेक्टर्स में जॉब - एआई, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में 75 हजार सीधी जॉब दी जा रही है। अब यूपी पुलिस की SOP जानिए यूपी के DGP राजीव कृष्ण बताते हैं- युवा वर्ग बहुत आगे की सोच रहा है। उनकी सीखने की क्षमता ज्यादा है। वो देश का अच्छा-बुरा समझते हैं। युवा वर्ग से जुड़ने के लिए उनके बातचीत के तौर-तरीकों को समझना होगा। इसलिए राज्य की पुलिस के लिए नए सिरे से SOP तैयार की जा रही है- जेन-जी, जेन-अल्फा संवेदनशील क्यों माने जा रहे… सड़कों पर क्यों उतरने लगे बच्चे? लोकल प्रेशर खत्म हो गया क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. कृष्ण दत्त कहते हैं- पहले गांव और शहरों के सभी वर्ग के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे। चाहे गरीब हो या अमीर। ऐसे में प्रभावशाली लोग इन स्कूलों की जरूरतों पर नजर रखते थे। शिक्षा के निजीकरण के बाद जो सक्षम लोग थे, उनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में चले गए। अब सरकारी स्कूलों में सिर्फ निम्न आय वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं। जिससे लोकल दबाव खत्म हो गया और व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सरकारी स्कूलों में अगर सरकारी अफसरों के बच्चे पढ़ें, तो देखिए कैसे स्कूलों की दशा बदल जाएगी। अफसरों को अभिभावक जैसा व्यवहार करना चाहिए बेसिक शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह कहते हैं- लखनऊ और फतेहपुर में बच्चे जिस तरह से सामने आए, ये सब कुछ उन्होंने तो प्लान नहीं किया था। इन जिलों के जेन-जी भी इसके पीछे हो सकते हैं। बच्चे इस माइंडसेट में नहीं होते कि वह प्रदर्शन करें या धरना दें। यह भी देखने में आया है कि शिक्षा विभाग के अफसर जब इन स्कूलों में जाते हैं, तो वह बच्चों के साथ अभिभावकों जैसा व्यवहार नहीं करते। सिर्फ कागजों में दिखाने के लिए निरीक्षण होते हैं। लाल किले से संघ तक... युवाओं को साधने की कवायद ABVP छात्रों के साथ, जिम्मेदारी- राष्ट्रविरोधी ताकतें इस्तेमाल न कर सकें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की प्रदेश मंत्री अर्पण कुशवाहा कहती हैं- शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्थाएं हैं। अधिकार और अपने भविष्य के लिए जेन-जी, जेन-अल्फा सड़क पर उतर रहा है। छात्रों के पास सारा डेटा है। सभी सूचनाएं हैं। अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना ठीक भी है। बस तरीका न्यायपूर्ण होना चाहिए। एबीवीपी छात्रों के साथ खड़ा है। देखना होगा कि कोई राष्ट्रविरोधी ताकत उनका इस्तेमाल न कर सके। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें - लखनऊ में जेन-अल्फा छात्राएं सड़कों पर, हाईवे जाम किया, बोलीं- टीचर नहीं, पढ़ें कैसे? 8KM पैदल चलीं लखनऊ में शिक्षकों की कमी को लेकर जेन-अल्फा ने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। सोमवार सुबह 7 बजे बारिश के बीच करीब 250 जेन-अल्फा छात्राएं दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर इकट्ठा हुईं। सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। छात्राएं मोहान रोड स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय से ढाई किमी चलकर यहां तक पहुंचीं। 6वीं से 12वीं कक्षा तक के इस स्कूल को समाज कल्याण विभाग चलाता है। पढ़िए पूरी खबर...
    Click here to Read more
    Prev Article
    अभिनेता अमित सियाल ने खाई हींग कचौड़ी:विधायक नीलकंठ तिवारी के साथ काशी की गलियों में घूमे, बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए
    Next Article
    अखिलेश नेताओं के बयानों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं:सोच-समझकर बोलने की नसीहत दी; भाजपा विपक्ष के बयानों को हथियार कैसे बनाती है

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment