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    जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जयंती 12 को:गणिनी प्रमुख माता ज्ञानमती ने दिया खास संदेश,निकलेगी शोभा यात्रा

    12 hours ago

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    जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, जिन्हें भगवान आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है, की जयंती गुरुवार को अयोध्या में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर जैन समाज की ओर से हाथी-घोड़े, बैंड-बाजों और आकर्षक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा 12 को निकलेगी। जयंती महोत्सव को लेकर शहर के दिगंबर जैन मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जैन साहित्य के अनुसार भगवान ऋषभदेव को मानव सभ्यता का प्रथम मार्गदर्शक माना जाता है। उन्होंने ही मानव समाज को कृषि, व्यापार, लेखन, शिल्प, लिपि और सामाजिक व्यवस्था का ज्ञान दिया। जैन परंपरा में उन्हें प्रथम तीर्थंकर के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनका जन्म अयोध्या की पावन भूमि पर हुआ था, जिसके कारण यह नगरी जैन धर्म के प्रमुख शाश्वत तीर्थों में गिनी जाती है। जयंती के अवसर पर गुरुवार सुबह 8:30 बजे बड़ी मूर्ति जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ होगा।शोभायात्रा में भगवान की आकर्षक प्रतिमा को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा श्रृंगारहाट और तुलसी उद्यान होते हुए स्वर्ग द्वार स्थित भगवान ऋषभदेव के जन्मस्थल तक पहुंचेगी। वहां विधिविधान से पूजन और अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद शोभायात्रा पुनः नगर भ्रमण करते हुए वापस बड़ी मूर्ति जैन मंदिर पहुंचेगी। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए समाजसेवी डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि दोपहर 2 बजे से मंदिर परिसर में भगवान का महामस्तकाभिषेक तथा धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह संपूर्ण कार्यक्रम जैन साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के आशीर्वाद तथा तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष स्वामी रविंद्र कीर्ति के संयोजन में संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को भगवान ऋषभदेव का जन्म हुआ था। इसी उपलक्ष्य में अयोध्या स्थित शाश्वत जैन तीर्थ में प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण नवमी के दिन वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह मेला 12 मार्च 2026, गुरुवार को आयोजित किया जा रहा है।अयोध्या को जैन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि वर्तमान चौबीसी के पांच तीर्थंकरों का जन्म भी इसी पावन भूमि पर हुआ माना जाता है। इनमें भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनंदननाथ, भगवान सुमतिनाथ और भगवान अनंतनाथ का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। साथ ही भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती और बाहुबली की धार्मिक परंपराएं भी इस नगरी से जुड़ी हुई हैं।
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