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    जापान में इलाज के दौरान देवरिया के युवक की मौत:4 दिन से शव का इंतजार कर रहा परिवार, होटल में रसोइए का काम करते थे नंदलाल

    3 hours ago

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    देवरिया जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के खड़ेसर गांव निवासी 50 वर्षीय नंदलाल की जापान में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन पिछले चार दिनों से उनके पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक शव गांव नहीं पहुंच सका है। नंदलाल मई 2024 में रोजगार की तलाश में जापान गए थे। वहां वह एक होटल में रसोइए के रूप में कार्यरत थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के उद्देश्य से वह विदेश गए थे। करीब एक वर्ष तक वह परिवार के संपर्क में रहे और नियमित रूप से घर की जिम्मेदारियां निभाते रहे। तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया भर्ती परिजनों के अनुसार 7 मई को नंदलाल की अचानक तबीयत खराब हो गई। होटल प्रबंधन ने उन्हें जापान के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में परिवार को उनकी बीमारी के बारे में सीमित जानकारी मिलती रही। परिवार का आरोप है कि अस्पताल और होटल प्रबंधन की ओर से उन्हें सीधे नंदलाल से बात नहीं कराई जा रही थी। बाद में जानकारी मिली कि उनकी हालत गंभीर हो गई है और वह कोमा में चले गए हैं। करीब 20 दिनों तक इलाज चलने के बाद 27 मई को उनकी मौत की सूचना परिवार को दी गई। शव भेजने से पहले मांगा जा रहा भुगतान नंदलाल की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या उनके शव को भारत लाने की है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि बकाया भुगतान के बिना मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। परिवार के मुताबिक अस्पताल का खर्च करीब 8 लाख रुपये बताया गया है। इसके अलावा शव को भारत भेजने और अन्य औपचारिकताओं के लिए अलग से खर्च की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार इतनी बड़ी रकम जुटाने की स्थिति में नहीं है। परिजनों को यह भी जानकारी दी गई है कि कुछ आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए परिवार के किसी सदस्य को जापान जाना पड़ सकता है, जो आर्थिक रूप से उनके लिए संभव नहीं है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लगाई गुहार पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए परिजन लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद मांग रहे हैं। परिवार ने क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्रा, सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान तथा जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी से हस्तक्षेप की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत करा दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन और सरकार से मानवीय आधार पर मदद की अपील की है। चार बेटियां और एक बेटे के सिर से उठा पिता का साया नंदलाल अपने पीछे पत्नी निर्मला देवी, चार बेटियां ममता, खुशबू, कविता और भारती तथा एक बेटा राहुल छोड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं पर थी। पति की मौत की खबर के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार पिछले चार दिनों से घर में मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग लगातार परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नंदलाल का पार्थिव शरीर आखिर कब अपने गांव पहुंचेगा। गांव में शोक का माहौल नंदलाल की मौत से पूरे खड़ेसर गांव में शोक की लहर है। परिजन और ग्रामीण प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि पार्थिव शरीर को भारत लाकर गांव में अंतिम दर्शन के बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जा सके।
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