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    'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' की मांग:आरक्षण, जातीय जनगणना, पदोन्नति में आरक्षण और मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून की मांग; एडीएम को सौंपा ज्ञापन

    10 hours ago

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    भीम आर्मी जय भीम संगठन ने सोमवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्गों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार के लिए लोकतंत्र के सभी स्तंभों में आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। ज्ञापन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष कंचन राव ने किया। जिलाध्यक्ष कंचन राव ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शोषित, पीड़ित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी, लेकिन आजादी के 75 वर्ष बाद भी इन वर्गों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदाय अब भी मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग ज्ञापन में संगठन ने 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत पर सरकारी और निजी उद्योगों में आरक्षण लागू करने की मांग की। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने और बैकलॉग के सभी रिक्त पदों को भरने की भी मांग उठाई गई। NEET, JEE और UPSC में अनुपातिक आरक्षण की मांग शिक्षा के क्षेत्र में संगठन ने NEET, JEE और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग की। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संविधान के अनुच्छेद-15 के तहत 'जीरो बैलेंस' पर प्रवेश व्यवस्था जारी रखने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों को पूरी तरह लागू करने की मांग भी की गई। मॉब लिंचिंग रोकने के लिए कानून बनाने की मांग भीम आर्मी ने दलित, मुस्लिम, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों के खिलाफ होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताई। संगठन ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की। ज्ञापन में गोकशी के कथित झूठे मुकदमों और फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच कराने की मांग भी शामिल रही। संगठन ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की भी मांग उठाई। जातीय जनगणना और लैटरल एंट्री पर भी उठाए सवाल संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से जातीय जनगणना कराने की मांग की। उनका कहना है कि इससे विभिन्न वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा और उसी आधार पर हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही संगठन ने सरकारी सेवाओं में लैटरल एंट्री की व्यवस्था को पूरी तरह बंद करने की भी मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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