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    कोचिंग मंडी में छात्र खाली पेट काट रहे रातें:बोले- रोटी नहीं मिलेगी तो जीएंगे कैसे, कानपुर छोड़कर अब घर वापसी की तैयारी

    2 hours ago

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    पूरा-पूरा दिन निकल जाता है, कुछ नहीं खाते हैं। किसी दोस्त के रूम पर मिला तो खा लेते हैं। कल रात में खाने के लिए कुछ नहीं था। गैस मिल नहीं रही है। इंसान को जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। कपड़ा और मकान तो है, जब रोटी ही नहीं होगी तो इंसान जिएगा कैसे। अब भर पेट खाना तक नहीं मिल रहा है। ये कहना है बस्ती के रहने वाले CSJMU में पढ़ने वाले आदित्य चौरसिया का। ये कहना केवल एक स्टूडेंट आदित्य का नहीं है, कानपुर के काकादेव कोचिंग मंडी के हॉस्टलों में रह के तैयारी करने वाले लाखों छात्रों का है। अब यहां के ढाब-रेस्टोरेंट पर खाने की कीमत 25% तक बढ़ चुकी है और शहर के 60% होटल- रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। अब यहां के अधिकतर छात्र घर वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग मंडी में रहने वाले छात्रों की क्या हालत है? छात्र अब कैसे अपना गुजारा कर रहे हैं? गैस किल्लत की कीमत अब छात्रों को कैसे प्रभावित कर रही है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने कोचिंग मंडी में रहने वाले छात्रों से हॉस्टल में बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट….. सबसे पहले देखिए हॉस्टल की 3 तस्वीरें…. सबसे पहले बात कोचिंग मंडी में रहने वाले छात्रों की गैस की कीमत 350 रुपए किलो पहुंची, लेकिन मिलना मुश्किल बस्ती के रहने वाले आदित्य चौरसिया गीतानगर क्रॉसिंग के पास एक हॉस्टल में रहते हैं। उन्होंने बताया- इस समय गैस रिफलिंग के रेट 350 रुपए प्रति किलो हो गए है, वो भी रावतपुर, गीतानगर, गुरुदेव में मिल नहीं पा रही है। यहां से 6 किमी दूर कल्यानपुर में एक आदमी ने 350 रुपए किलो गैस दें रहा है। हम यहां 4 साल से रहकर जिंदगी बनाने आए है। लेकिन यहां अब खाने के लिए खाना ही नही है, तो जिएंगे कैसे। शुरुआती पहली साल में CAT की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अब CSJMU में 3 साल से पढ़ रहे है। घर जाएंगे तो हाजिरी कैसे पूरी होगी आदित्य ने बताया- पहले छोला-समोसा एक प्लेट 20 रुपए का मिलता था, लेकिन अब 35 से 40 रुपए में मिलता है। हालांकि पापा ने घर वापस आने के लिए बोला है, लेकिन हम इस समय CSJMU से BSc एग्रीकल्चर से कर रहे हैं। घर पर चले जाएंगे तो मेरी 75% अटेंडेंस पूरी कैसे होगी। इस लिए घर जाना भी मुश्किल है। पूरे दिन भूखे रहकर हो रहा गुजारा आदित्य आंख मलते हुए कहते हैं- अब हम पूरे दिन कुछ भी नहीं खा रहे हैं, किसी यार दोस्त के रूम पर कुछ है तो खा लेते है। कल रात की बात है- कुछ नहीं था खाने के लिए, पूरे हफ्ते खाना बनाने के बाद अब गैस भी नहीं बची है। शहर में कहीं गैस नहीं मिल रही है। अब तो कुछ भी बना लेते है। कल अच्छी बुरी तेहड़ी (पीले चावल) बना के खा कर सोये थे। अब खाने की दिक्कत हो रही है। इंसान को जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। कपड़ा और मकान तो है, जब रोटी ही नहीं होगी तो इंसान जिएगा कैसे। हमारे गांव की कहावत है- एक टाइम खाओ अच्छे से खाओ। जब एक टाइम खाने के लिए खाना नहीं मिलेगा तो इंसान जिएगा कैसे। अब भर पेट खाना तक नहीं मिल रहा है। विसडम लाइब्रेरी बिल्डिंग में छात्रों से बात इसके बाद हम हरी गर्ल्स हॉस्टल के सामने गली में विसडम लाइब्रेरी बिल्डिंग में पहुंचे। इस तीन मंजिला इमारत में करीब 40 कमरे हैं। यहां हर कमरे में 2 छात्र रहते हैं। पूरी बिल्डिंग में 50 से ज्यादा छात्र रह रहे हैं। अधिकतर छात्र खुद से खाना बनाते थे। हम इस हॉस्टल में छात्रों की लाइफ स्टाइल जानने के लिए पहुंचे। बिल्डिंग की सीढ़ियों से चढ़ते हुए तीसरी मंजिल पर पहुंचे, तंग गैलरी से होते हुए जा रहे थे, तभी मेरी मुलाकात प्रशांत से हुई। बाहर का खाना अफोर्ड करना मुश्किल, अब कीमत बढ़ गई प्रशांत मूल रूप से बहराइच जिले के महंसी कस्बे के रहने वाले है। पिता टीचर हैं और मां ग्रहणी हैं। प्रशांत कानपुर में 4 साल से SSC की तैयारी कर रहे है। घर की मालीय हालत सही न होने की वजह से प्रशांत दिन में 2 घंटे छोटे बच्चों को कोचिंग पढ़ाते हैं, जिससे होने वाली कमाई से अपना खर्च चलाते है। उन्होंने बताया पहले हम लोग खुद ही खाना बनाते थे। लेकिन गैस की किल्लत की वजह से अब नहीं बना पा रहे है। घर से फिक्स पैसे आने की वजह से हम लोग बाहर का खाना अफोर्ड नहीं कर पा रहे हैं। खाने की कीमत बढ़ गई, अब घर जाने की तैयारी प्रशांत ने कहा- जब बाहर मैस में खाने की जानकारी लेने गए तो 2200 रुपए मे मिलने वाले टिफिन की कीमत 3000 रुपए प्रति महीना हो गई है। लेकिन अब बाहर भी तंदूरी रोटी मिल रही है, जिसको खाने के बाद हजम करने में दिक्कत होती है। अब हम लोग इंडक्शन लेने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। अगर कुछ नहीं हो पाएगा, तो मजबूरी में घर वापस लौट जाएंगे। प्रशांत से मिलने के बाद हमारी मुलाकात शादाब अहमद से हुई। शाम के 7 बज रहे थे। सादाब रोजा इफ्तार के बाद आराम कर रहे थे। हमने शादाब का गेट खटखटाया और शादाब बाहर आए। जिसके बाद हम उनके कमरे में दाखिल हुए, पहले तो शादाब बात करने में असहज महसूस कर रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद वो बात करने के तैयार हुए। यूनिवर्सिटी के नाश्ते की कटौती, 2200 वाला टिफिन 2900 में शादाब ने बताया- हम आजमगढ़ के रहने वाले हैं। हम यहां CSJMU में पढ़ते हैं। इस समय हम लोग कैसे जिंदगी गुजार रहे है, हम ही जानते हैं। यूनिवर्सिटी कैंपस में अब लकड़ी के चूल्हे जलने लगे हैं। अब समोसा, पूड़ी, पकौड़ी इत्यादि चीजें बंद हो गई हैं। अब पोहा मिलता है। अगर यहां (कोचिंग) की बात करें तो यहां तो अब टिफिन वाले एक्स्ट्रा पैसे ले रहे हैं। शादाब ने बताया- खाना चाहिए तो गैस के लिए एडवांस पैसे जमा कर दीजिए, लेकिन अगर ये ही ज्यादा दिन ऐसा चला तो टिफिन बंद होने की उम्मीद है। मेस से जो टिफिन आता है। पहले इसकी कीमत 2200 रुपए थी, लेकिन अब 2900 रुपए में मिल रहा है। पहले हफ्ते में एक दिन स्पेशल डाइट मिलती थी, लेकिन अब वो भी बंद कर दी है। जब कुछ नहीं मिलेगा तो यहां से घर वापस लौट जाएंगे। घर से ही तैयारी करेंगे। समझिए गैस क्राइसिस से छात्रों के जीवन का बदलाव 3 पॉइंट में ------------------------- यह खबर भी पढ़ें कुलदीप यादव अपनी दुल्हन के साथ कानपुर पहुंचे:ट्रेडिशनल सूट में दिखीं वंशिका, रेड कार्पेट पर स्वागत; विदेशी फूलों से सजा घर क्रिकेटर कुलदीप यादव अपनी दुल्हन वंशिका सिंह चड्‌ढा के साथ रविवार को कानपुर पहुंचे। काला चश्मा पहने वंशिका ने ट्रेडिशनल सलवार-सूट पहन रखा था। एयरपोर्ट से दोनों BMW में सवार होकर घर पहुंचे। जहां बैंड बाजे से स्वागत किया गया। दुल्हन वंशिका के स्वागत में रेड कार्पेट बिछाया गया। आरती उतारकर वंशिका और कुलदीप की घर के अंदर एंट्री कराई गई। पढ़ें पूरी खबर…
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