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    किडनी ट्रांसप्लांट कांड से जुड़ा मेरठ का अल्फा हॉस्पिटल:दो महीने पहले बहाल हुआ था लाइसेंस, अस्पताल नहीं पहुंचे डॉयरेक्टर और डॉक्टर

    2 hours ago

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    मेरठ में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण में अल्फा हॉस्पिटल का नाम जुड़ने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल है। अस्पताल के डायरेक्टर और ओपीडी में आने वाले डॉक्टर फिलहाल अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं भर्ती मरीजों के तीमारदार ऑफ कैमरा बता रहे हैं कि अस्पताल में इलाज से ज्यादा पुलिस और मीडिया की मौजूदगी दिख रही है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इलाज कौन कर रहा है और आगे क्या होगा। सबसे पहले जानिए कहां और कैसा है अल्फा हॉस्पिटल मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र स्थित मंगल पांडे नगर में लगभग 350 गज में यह अस्पताल ऐसी जगह बना हैं। जहां आसपास में और भी कई बड़े अस्पताल बने हुए हैं। लगभग 2 साल पहले बने इस अस्पताल के डायरेक्टर अमित कुमार है। चार मंजिल बने इस अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर डायरेक्टर का ऑफिस, ओपीडी के लिए दो कमरे, मेडिकल स्टोर , रिसेप्शन और एक मंदिर के लिए स्थान है। पहली मंजिल पर एक हॉल में NICU और 7 बेड का एक ICU है। दूसरी मंजिल पर अस्पताल के 9 कमरे हैं जिनमें से कुछ में अभी भी मरीज भर्ती हैं। थर्ड फ्लोर पर एक हॉल है जिसमें मुस्लिम मरीज के तीमारदार और स्टाफ नमाज अदा करते है। चौथी मंजिल पर खाली छत है। अब जानिए प्रबंधन के मुताबिक स्टाफ और डॉक्टर्स अस्पताल में मैनेजर के पद पर मौजूद सचिन भड़ाना के अनुसार अस्पताल में लगभग 22 लोगों का स्टाफ रहता है। जिनकी ड्यूटी दिन और रात की शिफ्ट के हिसाब से लगाई जाती थी। इसी क्रम में अस्पताल के दो मैनेजर हैं जिसमें दिन में सचिन और रात में सोहिल की ड्यूटी रहती है। मैनेजर के अनुसार अस्पताल में सिर्फ डॉ वैभव मुग्दल की ही ओपीडी नियमित रूप से चलती है बाकी अन्य डॉ जो भी अस्पताल में इलाज करने के लिए आते थे वह सभी मरीज भर्ती होने के बाद ओन कॉल बुलाए जाते थे। जिनमें फिजिशियन और सर्जन अधिक रहते थे। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने ऑफ कैमरा बात करते हुए बताया कि बाहर से मरीज आकर अस्पताल में भर्ती होते थे। मरीज की हालत के अनुसार ही डॉक्टर बुलाकर मरीज का इलाज कराया जाता था । हालांकि किड़नी प्रकरण में शामिल डॉ अफजाल के संबंध में स्टाफ का कहना है कि इस नाम का न ही तो कोई डॉक्टर या स्टाफ हमारे हमारे अस्पताल से जुड़ा नहीं है। पहले भी चर्चा में आया था अल्फा हॉस्पिटल CMO डॉ अशोक कटारिया ने बताया कि 26/11/2025 को एक शिकायत मिली थी जिसमें मरीज का आरोप था कि दलाली लेकर मुझे यहां भर्ती कराया गया है। इसकी शिकायत आने पर हमने स्वास्थ्य विभाग की और से पुलिस कंप्लेंट करते हुए दो दिन बाद अस्पताल के लाइसेंस पर निलंबन कर दिया गया था। इसके बाद 2/01/2026 को पुलिस द्वारा की गई जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई। 19 जनवरी को अस्पताल ने फिर से लाइसेंस बहाली का आवेदन किया और दो दिन बाद 21 जनवरी को अल्फा हॉस्पिटल का लाइसेंस बहाल कर दिया गया।
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