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    कंगना के 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर टली सुनवाई:वादी ने आगरा कोर्ट से धाराएं बढ़ाने के लिए मांगा समय, एक्ट्रेस ने छात्र आंदोलन पर टिप्पणी की थी

    16 hours ago

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    भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट के कथित 'गटर जेनरेशन' बयान को लेकर आगरा की अदालत में मंगलवार को प्रस्तावित सुनवाई टल गई। परिवादी एवं अधिवक्ता रमा शंकर शर्मा ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर परिवाद में संशोधन और कुछ नई धाराएं जोड़ने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि कंगना के कथित नफरती बयान और सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) के कथित दुरुपयोग से जुड़े पहलुओं को भी परिवाद में शामिल किया जाना है। इस पर अदालत ने मौजूदा प्रार्थना पत्र को नोट प्रेस (वापस) कर संशोधित परिवाद दाखिल करने की अनुमति दी। अब संशोधित धाराओं के साथ नया परिवाद 7 अगस्त 2026 को अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। परिवादी रमा शंकर शर्मा का आरोप है कि छात्रों के समर्थन में देशभर में आंदोलन के दौरान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं के लिए 'गटर जेनरेशन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि इस टिप्पणी से छात्रों और देशभर के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। परिवादी के अनुसार उनके साथ राजवीर सिंह, अधिवक्ता रामदत्त दिवाकर, अधिवक्ता नवीन वर्मा, आईएस मौर्य सहित कई लोगों ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा- संशोधित परिवाद करें दाखिल मंगलवार को सुनवाई के दौरान परिवादी ने अदालत को बताया कि वह कंगना के बयान से जुड़े कुछ और तथ्यों तथा सोशल मीडिया के कथित दुरुपयोग के संबंध में अतिरिक्त धाराएं जोड़ना चाहते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि वर्तमान प्रार्थना पत्र को नोट प्रेस कर संशोधित परिवाद दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद परिवादी ने याचिका वापस ले ली। अब संशोधित धाराओं के साथ नया परिवाद 7 अगस्त को अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। पहले पुलिस से की थी शिकायत परिवादी का कहना है कि इस मामले में पहले थाना न्यू आगरा और पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अदालत में परिवाद दायर किया गया। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि कंगना की टिप्पणी संविधान के मूल कर्तव्यों की भावना के विपरीत है और इससे देश तथा संसद की गरिमा को ठेस पहुंची है। भाजपा सांसद कंगना रनौत का पूरा बयान कंगना रनोट ने 27 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन में लिखा था— "सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। अ सल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।" इसके बाद उन्होंने लिखा— "आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं। इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं।" उन्होंने आगे लिखा— "एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, 'गटर छाप'।" छात्र आंदोलन पर पहले भी की थी टिप्पणी छात्र आंदोलन को लेकर कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। उन्होंने कहा था कि Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों के वीडियो देखकर घिन आती है। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर इन युवाओं की परवरिश कैसे हो रही है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन को बताया था हुड़दंग आंदोलन के दौरान मीडिया से बातचीत में कंगना रनोट ने कहा था कि किसी मंत्री को हटाने या बनाए रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा और बहस के लिए संसद सही मंच है, न कि आंदोलन। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को हुड़दंग और उत्पात बताते हुए कहा था कि जिस तरीके से आंदोलन चलाया जा रहा है, वह ठीक नहीं है।
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