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    कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने उद्यमियों की बढ़ाई टेंशन:कई प्रमुख कलस्टर प्रभावित, उद्यमी बोले- जल्द समाधान ना निकला तो बंद करने पड़ेंगे प्रतिष्ठान

    2 hours ago

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    मेरठ में घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भले ही मारामारी कम हो गई हो लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर अभी हालात जस के तस बने हैं। कई तरह का कारोबार इस किल्लत से प्रभावित हो रहा है। अगर बात करें तो प्रमुख कलस्टर तक इसकी जद में आते जा रहे हैं। पहले एक नजर गैस की किल्लत पर शहर में पिछले एक सप्ताह से एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार मचा है। ऑनलाइन बुकिंग व डिलीवरी बंद होने के कारण उपभोक्ता सड़कों पर आ गए। एजेंसी से लेकर गोदामों तक हाहाकार मच गया। शासन की सख्ती के बाद प्रशासन हरकत में आया और जनहित को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव कर दिए। नतीजा यह हुआ कि घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर मची आ रही मारामारी कम हो गई। KYC का झंझट भी हुआ खत्म सिलेंडर को लेकर मच रहे हाहाकार की प्रमुख वजह बुकिंग ना हो पाना थी। ऑनलाइन सिस्टम फेल हुआ तो लोग मैन्युअल बुकिंग के लिए पहुंचने लगे। लेकिन कंपनियों ने KYC की अनिवार्यता कर मुश्किल और ज्यादा बढ़ा दी। नतीजा यह हुआ कि हालात बिगड़ते चले गए। कमर्शियल सिलेंडर से कारोबार ठप कमर्शियल सिलेंडर से अभी तक कुछ ही कारोबार प्रभावित हो रहे थे। इनमें प्लास्टिक कारोबार के साथ ही पेंट व कांच का कारोबार शामिल था। अब कलस्टर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। कैंची कलस्टर हो या आर्टिफिशियल जूलरी का कारोबार या फिर पेट्रोमेक्स कलस्टर, सभी कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत का खामियाजा भुगत रहे हैं। आइए जानते हैं क्या बोले कारोबारी... कैंची कलस्टर मेरठ के उपाध्यक्ष शरीफ अहमद बताते हैं कि कैंची निर्माण में वैल्डिंग व टेंपर के काम के लिए LPG की आवश्यकता होती है। कमर्शियल सिलेंडर ना मिल पाने के कारण यह काम रुक गया है और कारखाने बंद हो गए हैं। 17 तरह के काम गैस पर ही निर्भर हैं। यह पहला मौका है, जब रमजान के महीने में काम व प्रोडक्शन बढ़ने के बजाए घट रहा है। पेट्रोमेक्स गैस स्पेयर मैन्युफेक्चर एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद साजिद सैफी बताते हैं कि काम बुरी तरह प्रभावित है। LPG गैस हाईहीट के लिए प्रयोग में लायी जाती है। माल पिघलाने, सिलेंडर बनाने के लिए लोहे को तपाने में गैस का प्रयोग होता है। 350 से 400 यूनिट हैं। एक यूनिट पर 10-15 कर्मचारी हैं तो 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। इंडियन बुलियन ट्रेड कार्पोरेशन के निदेशक आशुतोष अग्रवाल बताते हैं कि सर्राफा बाजार में LPG सिलेंडर की बढ़ी खपत है। यहां एक प्रतिष्ठान पर प्रति दिन लगभग 1 किलोग्राम सोने से जूलरी तैयार होती है। हर सप्ताह दो कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। सिलेंडर ना मिलने के कारण काम बंदी की कगार पर है। कर्मचारियों तक की जीविका प्रभावित हो रही है। स्पोर्ट्स कारोबारी सुमनेश अग्रवाल गैस से जितनी भी प्लास्टिक, रबड़ व मैटल का कारोबार प्रभावित है। इंडस्ट्रीज में जेनरेटर सेट पाल्यूशन के कारण कन्वर्ट हो चुके हैं और एलपीजी व सीएनजी से वह चल रहे हैं। कमर्शियल सिलेंडर ना मिलने के कारण हाई हीट वाले काम रुक गए हैं। जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कामकाज ठप हो जाएगा।
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