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    कन्हैया ने खुद निकाली थी पेट से सरिया:काफी देर तक सहायता नहीं मिली; अंदर होता रहा खून का स्राव

    1 hour ago

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    गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) की ओर से निर्मित ट्रंच में गिरकर दम तोड़ने वाले 12 वर्षीय कन्हैया को समय से मदद मिलती तो उसकी जान बच सकती थी। उसे ट्रंच से किसी ने निकाला नहीं बल्कि पेट में धंसी सरिया से उसने अपने शरीर को बाहर निकाला था और सड़क पर आया। दर्द के मारे वहां लेट गया। वहां से कई लोग गुजरे लेकिन मदद नहीं मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंस भी देर से आयी, जिससे उसकी जान नहीं बच सकी। राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना में बनी 24 मीटर चौड़ी सड़क के दोनों ओर ट्रंच बनाए गए हैं। उसे स्लैब से ढकना चाहिए था लेकिन जहां कन्हैया गिरा, वह हिस्सा पूरी तरह खुला था। केबल को फंसाने के लिए लगे एंगल भी साफ नजर आ रहे थे और निर्माण के बाद सरिया को भी काटा नहीं गया था। ऐसे में जग कन्हैया उसमें गिरा तो एक ओर सरिया पूरे पेट में घुस गया। पहले जानिए क्या हुआ था गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन नाले में गिरने से 12 साल के कन्हैया चौरसिया की मौत हो गई। वह 5वीं क्लास में पढ़ता था। 4 दिन पहले पिता ने उसे साइकिल गिफ्ट किया था। साइकिल चलाकर दोस्तों के साथ अपने घर वापस आ रहा था। तभी अचानक साइकिल अनियंत्रित हो गई। वह साइकिल समेत नाले में गिरा। तब नाले में निकला सरिया सीधे उसके पेट में धंस गया। हिम्मत दिखाते हुए उसने सरिया निकाली और पेट पकड़कर सड़क पर आ गया। उसे बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंचाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब जानिए मौके पर क्या नजर आया स्लैब रखा, काट दिया सरिया कन्हैया की मौत कैसे हुई, यह जानन के लिए दैनिक भास्कर की टीम शुक्रवार को मौके पर पहुंची। वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हुए लेकिन उन्होंने कहा कि यहां अब जाकर स्लैब रखा गया है। जो सरिया कन्हैया के पेट में घुसा था, उसे भी आनन-फानन में काट दिया गया है। यानी अगर जांच की जरूरत हुई तो मौके पर कुछ नहीं मिलने वाला। समझिए उस जगह के बारे में जहां हादसा हुआ राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के लिए बने 24 मीटर रोड पर अंबेडकर पार्क की ओर बढ़ते हुए यह जगह है। अंबेडकर पार्क की ओर जाते समय बायीं ओर ट्रंच बना है, जहां कन्हैया गिरा था। वहीं से एक सड़क स्थानीय मोहल्ले को जोड़ती है। सड़क खाली होने के कारण वहां लोगों की गति अधिक होती है। कर्व होने के कारण अक्सर साइकिल या बाइक सवार युवाओं के गिरने की घटनाएं होती हैं। स्थानीय लोगों ने क्या बताया मुनव्वर अली मानबेला के रहने वाले हैं। घटना स्थल से कुछ दूर उनका काम चल रहा था। उन्होंने बताया कि 5 से 6 बच्चे थे। साइकिल से आ रहे थे। एक लड़का एक बार गिरा, फिर उठ गया। उसके बाद फिर साइकिल चलाने लगा, वह दोबारा गिर गया। इस बार उसके पेट में सरिया घुस गया था। मुनव्वर ने बताया कि उन्होंने दूर से देखा, दो बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे थे। जे बच्चा ट्रंच में गिरा था,वह काफी हिम्मती थी और उसने खुद ही सरिया निकाली। उसके बाद पेट पर हाथ रखकर सड़क पर आया। बच्चों ने राहगीरों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई उसे अस्पताल नहीं ले गया। मुनव्वर ने बताया कि वह भागकर वहां पहुंचे और दो बच्चों को कन्हैया के घर भेजा। एंबुलेंस को फोन किया। मुनव्वर ने बताया कि उस स्थान पर अक्सर हादसे होते हैं। स्लैब वहां नहीं था। घटना के बाद रखा गया है। नहीं दर्ज हो सका है मुकदमा कन्हैया के पिता श्याम सुंदर व उनकी माता साधना दिव्यांग हैं। श्याम सुंदर के पास कोई भागकर आया था। उसने बताया कि कन्हैया के पेट में सरिया घुस गया है। कन्हैया ने ही अपने घर का पता व पिता का नाम उन्हें बताया था। वो जब मौके पर पहुंचे तो एंबुलेंस पर कन्हैया को लिटाया जा रहा था। सभी लोग बीआरडी लेकर आए और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। श्याम सुंदर ने चिलुआताल थाने में ठेकेदार के खिलाफ तहरीर दी है लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी केस दर्ज नहीं किया गया है। काफी होनहार था कन्हैया श्याम सुंदर बताते हैं कि कन्हैया तीन बेटों में सबसे बड़ा था। किशन व शिव उसके छोटे भाई हैं। कन्हैया पढ़ने में काफी होशियार था। उसे सीखने की ललक रहती थी। हम उसे पढ़ा-लिखाकर सफल बनाना चाहते थे लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी ने उसे छीन लिया। जांच हुई तो सबूत कहां से आएगा जीडीए की ओर से कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसका नेतृत्व ओएसडी प्रखर उत्तम करेंगे। वित्त विभाग के प्रमुख व प्राधिकरण के संयुक्त सचिव इसमें सदस्य होंगे। लेकिन मौके पर पहले ही लीपापोती हो चुकी है। सुरक्षा की दृष्टि से स्लैब रखे गए हैं और उस सरिया को काट दिया गया है, जो पेट में धंसा था। ऐसे में यदि पुलिस को जांच करनी हो तो यह भी साबित करने में पसीना छूट जाएगा कि घटना स्थल कहां था। नियमानुसार किसी भी घटना स्थल से छेड़छाड़ की अनुमति नहीं होती। सुरक्षा की दृष्टि से स्लैब डालने तक तो ठीक था लेकिन सरिया काटने का तर्क लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस जगह को घेरा जा सकता था, उससे भी सुरक्षा हो जाती। ठेकेदार की जिम्मेदारी तय नहीं कन्हैया के पिता की ओर से ठेकेदार क खिलाफ तहरीर दी गई है। जीडीए की ओर से गठित टीम भी ठेकेदार की लापरवाही की जांच करेगी। फिलहाल दो छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कन्हैया के पिता का कहना है कि ठेकेदार की गलती यही है कि उसने अतिरिक्त सरिया को वहां से नहीं निकाला और ट्रंच को ढकने की जरूरत नहीं समझी। इसलिए वही बेटे की मौत का जिम्मेदार है। अब यदि टीम जांच करने जाती भी है तो वहां सरिया निकला हुआ नहीं मिलेगा। घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल कन्हैया के घर रिश्तेदारों की भीड़ लगी है। झुंगिया बाजार में ही उनके पिता ने घर बनवाया है। घर अभी अधूरा है। उनके पिता बाहर भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन मां रोते-रोते बेसुध हो जा रही हैं। घर आयीं रिश्तेदार महिलाएं उन्हें संभालने में जुटी हैं। घर पर स्थानीय नेताओं के आने का क्रम जारी है। लोग इस मामले में केस दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
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