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    कानपुर में बोगस कंपनी बनाकर 250 करोड़ का ट्रांजैक्शन:12वीं पास 2 युवक चला रहे थे गैंग, ई-रिक्शा चालक के खाते में 1.5 करोड़ फ्रीज

    9 hours ago

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    कानपुर पुलिस ने बोगस कंपनी बनाकर 250 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया। ठगी गिरोह को इंटर पास दो युवक चला रहे थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया है। जबकि 7 फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। कमिश्नर रघुवीर लाल ने मंगलवार को खुलासा करते हुए बताया कि ई-रिक्शा चालक के बेटे के खाते से 117 करोड़ का ट्रांजैक्शन मिला है। गैंग के सदस्य लोन दिलाने के नाम पर ई-रिक्शा चालक, स्टूडेंट और जरूरतमंद लोगों के कागज लेते थे। इसके बाद उनके नाम से फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करके हड़पते थे। एक कमरे में चल रही थीं बड़ी कंपनियां पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि आरके नगर के रहने वाले अनुराग वर्मा ने नजीराबाद थाने में तहरीर देते हुए शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया- मैंने बहन की शादी के लिए लोन लेने के लिए एक एजेंट को दस्तावेज दिए थे, लोन तो नहीं हुआ लेकिन उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। नजीराबाद थाने की पुलिस और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि दंग रह गई। जांच में पता चला कि गिरोह ने उनके दस्तावेज पर यशोदा नगर में पार्वती ट्रेडर्स के नाम से बोगस कंपनी बनाई और एचडीएफसी बैंक में फर्म के नाम पर अकाउंट खुलवा दिया था। सभी जगह जीएसटी से लेकर बैंक में ठगों ने अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया था। फर्म के नाम पर करोड़ों का आईटीसी क्लेम करके जीएसटी चोरी की जा रही थी। पुलिस की जांच आगे बढ़ी। सामने आया कि उन्नाव के इंदिरा नगर के रहने वाले ई-रिक्शा चालक मनोज गुप्ता के बेटे उज्जवल गुप्ता ने भी मां की बीमारी के इलाज के नाम पर लोन के लिए दस्तावेज दिए थे। उज्जवल के नाम पर भी बोगस कंपनी बनाकर उसके नाम पर एचडीएफसी बैंक में खोले गए अकाउंट में 117 करोड़ का ट्राजैक्शन किया गया। पुलिस ने जब ई-रिक्शा चालक मनोज और उनके बेटे उज्जवल को हिरासत में लिया तो दंग रहे गए। अपने अकाउंट में अरबों का ट्रांजैक्शन और करोड़ों की रकम होने पर उन्हें भी विश्वास नहीं हो रहा था। पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि लोन के नाम पर दिए गए दस्तावेज से ठगों ने बोगस कंपनी बनाकर उनके नाम पर जीएसटी चोरी की जा रही है। पुलिस की अब तक की जांच में 38 बोगस कंपनियों में करीब 250 करोड़ का ट्राजैक्शन मिला है। इंटर पास युवक कर रहे थे करोड़ों की ठगी पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ठगी में शामिल इंटर व आईटीआई पास कपिल पास और इंटरपास दूसरे शातिर ठग राज उर्फ अमरदीप को अरेस्ट किया है। जबकि गैंग में शामिल अन्य सात आरोपियों की भी पहचान की है। इन सभी अन्य आरोपियों की अरेस्टिंग के लिए पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। पुलिस कमिश्नर ने गैंग का खुलासा करने वाले पुलिस टीम को 50 हजार का इनाम दिया है। 4 पाइंट में समझिए ठग कैसे करते थे खेल 38 बोगस कंपनियां शातिरों ने कराई रजिस्टर्ड गौरवी ट्रेडर्स, पूर्ति ट्रेडिंग, ओमकार कम्युनिकेशन, शिव शक्ति ट्रेडिंग, कामायनी कम्युनिकेशन, वैष्णवी ट्रेडिंग कम्पनी, मां कंसारी ट्रेडर्स, श्रीराम ट्रेडर्स, मां इंटरप्राइजेज, लाइटिंग इंटरप्राइजेज, बिहारी ट्रेडर्स, दाल ट्रेडर्स, S.K. इंटरप्राइजेज, के-एन ट्रेडिंग, N.S. ट्रेडिंग, शिवाय कम्युनिकेशन, श्री श्याम ट्रेडर्स, मां वैष्णो ट्रेडर्स, पार्वती ट्रेडर्स, शंकर इंटरप्राइजेज, श्री दुर्गा स्टोर, मोहन इंटरप्राइजेज, यश बाबा इंटरप्राइजेज, दिव्य ट्रेडिंग कम्पनी, अन्नपूर्णा ट्रेडर्स, गौरी इंटरप्राइजेज, गुप्ता इंटरप्राइजेज, आर्यन ट्रेडर्स, श्री श्याम इंटरप्राइजेज, गणेश ट्रेडर्स, श्याम ट्रेडर्स, मन ट्रेडर्स, अनिल का इंटरप्राइजेज, देव इंटरप्राइजेज, नीलम ट्रेडर्स, मां काली इंटरप्राइजेज, वंदना ट्रेडर्स, दुर्गा ट्रेडर्स। ई-रिक्शा चालक के खाते में 1.50 करोड़ फ्रीज पुलिस कमिश्नर ने बताया- जांच में अब तक 38 बोगस कंपनियों का पता चला है। इनसे लगभग ₹250 करोड़ का लेन-देन किया गया है। इसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा पांच आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। जांच के दौरान “पार्वती एंटरप्राइज” नामक फर्म एक गरीब रिक्शा चालक के नाम पर फर्जी रूप से रजिस्टर्ड मिली। जबकि संबंधित व्यक्ति को इस फर्म और उसके बैंक खाते की जानकारी तक नहीं थी। अकाउंट में लगभग ₹1.50 करोड़ की राशि फ्रीज कराई गई है। इसी प्रकार पार्वती एंटरप्राइज से जुड़ी कुल 12 अन्य फर्मों का संचालन किया जा रहा था तथा दो अन्य फर्मों के साथ भी लेन-देन किया जा रहा था। बहन की शादी के लिए लोन लेने के चक्कर में फंसा पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शिकायत करने वाले अनुराग वर्मा से कपिल मिश्रा ने उसकी बहन की शादी के लिए लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए गए थे । उसे लगातार डेढ़ माह तक यह कहकर टालते रहे कि लोन प्रक्रिया में है, जबकि उसके नाम से फर्म खोलकर जीएसटी पंजीकरण कराया जा चुका था। एचडीएफसी बैंक में खाता संचालित किया जा रहा था । खाते में धनराशि का आवागमन एवं निकासी की जा रही थी तथा जीएसटी चोरी से संबंधित लेन-देन किया जा रहा था । 30 मोबाइल और 52 चाबियां बरामद आरोपियों ने बोगस कंपनियां के पंजीकरण के दौरान ओटीपी प्राप्त करने के लिए मोबाइल फोन अपने पास रखे जाते थे। अब तक लगभग 30 मोबाइल फोन एवं 52 चाबियां बरामद की गई हैं, जिससे अनेक फर्जी फर्मों के संचालन की पुष्टि हुई है। शिकायतकर्ता को जब संदेह हुआ कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग हो रहा है, तब उसने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक स्तर पर साइबर धोखाधड़ी की आशंका के आधार पर जांच प्रारंभ की गई, लेकिन डिटेल जांच में यह एक बड़े स्तर की जीएसटी चोरी और पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग का संगठित मामला सामने आया । प्रकरण के संबंध में जीएसटी विभाग एवं संबंधित बैंकों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी में मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है। --------------------------- ये खबर भी पढ़िए… 12वीं की छात्रा से रेप, FIR कराई तो हत्या की:बस्ती में आधी रात घर में घुसा आरोपी, सोते वक्त 2 गोली मारी यूपी के बस्ती में सिरफिरे ने 12वीं की छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी। सिरफिरे ने कुछ महीने पहले बहला-फुसलाकर छात्रा से संबंध बनाए थे। अश्लील फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए थे। परिजनों ने उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत रेप की FIR कराई थी। तब से वो फरार चल रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
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