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    कानपुर में पांडू नदी से 40000 लोग प्रभावित:सड़क किनारे पन्नी के तंबू में रहने को मजबूर, बोले- बच्चों को लेकर कहां जाएं, नीचे पानी है, इधर नहर

    6 hours ago

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    कानपुर में पांडू नदी का जलस्तर पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है। नदी का पानी शहर के 11 इलाकों में घुस गया है। करीब एक हजार से ज्यादा घर इसकी चपेट में हैं। कहीं गलियों में 6 से 8 फीट तक पानी भर गया है, तो कहीं घरों में 6 फीट तक पानी पहुंच गया। ऐसे में लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। नदी के बाढ़ के पानी से करीब 40 हजार की आबादी प्रभावित है। दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर बाढ़ से प्रभावित इलाकों के हालात देखे। टीम बर्रा-8, वरुण बिहार, रविदासपुरम, मायापुरम, पिपौरी और बिहारीपुरवा पहुंची। कहीं लोग घरों में फंसे मिले, तो कहीं पानी बढ़ने के बाद घर छोड़कर पन्नी के तंबू में रहने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी आबादी अभी भी पांडू नदी के बढ़े जलस्तर से परेशान है। इन इलाकों में ग्राउंड पर क्या हालात हैं, लोगों की क्या परेशानी है और प्रशासन की राहत कितनी पहुंच रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट... पहले तस्वीरें देखिए… वरुण बिहार में घर डूबे, पन्नी के तंबू में रहने को मजबूर लोग वरुण बिहार बस्ती के जो लोग निचले इलाके में रहते थे, उनके मकान डूब गए। किसी की झोपड़ी तबाह हो गई तो किसी के पक्के मकान की दीवार पर रखी लोहे की टीन शेड से बनी मड़ैया में 5 फीट तक पानी भर गया। घर का जरूरी सामान भी वहीं रह गया। केवल खाना बनाने का सामान लेकर गुजैनी नहर किनारे पॉलीथिन को बांस के सहारे तानकर रह रहे हैं। जब यहां की तस्वीर देखी तो कहीं बच्चे जो कुछ खाना बन सका, उसे मासूमियत से खाते हुए नजर आए तो कहीं सड़क पर पानी के टैंकर के पास बर्तन धोती हुई महिलाएं दिखीं। पालतू मवेशी उन्हीं टेंट में दिखे, तो वहीं गृहस्थी का रखा सामान भी नजर आया। बुजुर्गों की आंखों में बेबसी और परेशानी साफ झलकती दिखाई दी। हालांकि जिला प्रशासन ने बर्रा-8 के मायापुरम, रविदासपुरम और वरुण बिहार नदी के पानी से प्रभावित बस्ती के लोगों के लिए एक कैंप लगाया। इन सभी को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और स्थानीय विधायक सुरेंद्र मैथानी ने राहत सामग्री दी। फौरी तौर पर कुछ राहत तो लोगों को जरूर मिली है, लेकिन उनके घरों में डूबे सामान के नुकसान और गृहस्थी तबाह होने का दर्द भी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। अब पढ़िए बिहारीपुरवा और पिपौरी गांव के हालात पांडू नदी का पानी बिधनू ब्लॉक के बिहारीपुरवा इलाके में भर गया। यहां इलाके में बना स्कूल डूब गया, जहां 6 फीट पानी भर गया। गलियों में 8 से 10 फीट पानी भर गया। जो लोग निकल गए, वे तो ठीक हैं, लेकिन जो फंस गए, वे छतों पर बैठे नजर आए। एक छत पर लोगों ने पन्नी लगा ली, ताकि बरसात होने पर वे कम से कम छत पर रह सकें। पिपौरी गांव में 200 से ज्यादा मकान पांडू नदी के जलभराव की चपेट में आ गए। यहां जब गुरुवार देर रात नदी का पानी तेजी से बढ़ने लगा तो एनडीआरएफ ने तत्काल ही राहत-बचाव का कार्य शुरू कर दिया। रात में ही इलाके से सैकड़ों लोगों को निकाल लिया गया। इसके बाद शुक्रवार को जिलाधिकारी और एसडीएम सदर ने निरीक्षण किया। एसडीएम ने स्वयं मोटर बोट पर बैठकर एक घंटे तक पिपौरी गांव का निरीक्षण किया। यहां घरों के भीतर 6 फीट तक पानी भर गया। लगातार यहां से रेस्क्यू कर लोगों को निकालने का काम एनडीआरएफ की टीम कर रही है। अब पढ़िए उन इलाकों के लोगों ने जो बताया, जहां नदी का पानी भर गया है मायापुरम कच्ची बस्ती में रहने वाले सुरेश ने बताया कि जहां रहते थे, वहां पानी भर गया तो अब कहां रहें? इसलिए सड़क किनारे ही पॉलीथिन तानकर रह रहे हैं। परिवार में छोटे बच्चे हैं। हम सब 9 लोग एक ही पॉलीथिन से बने इसी टेंट में रह रहे हैं। बस्ती में रहने वाली बच्ची ने बताया कि 3 से 4 दिन हो गए, यहीं पर रह रहे हैं। अभी कोई आया तो नहीं, लेकिन पता चला है कि राशन मिलेगा। बस यही है कि मदद यहीं मिल जाए तो अच्छा है। घर का सारा सामान तो डूब ही गया है पानी में, अब आगे देखा जाएगा। पीने के पानी के लिए टैंकर आ जाते हैं, उसी से काम चल जाता है। बस्ती में रहने वाले एक बुजुर्ग ने बताया कि हमीरपुर का रहने वाला हूं, यहां बस्ती में किराए पर रहता हूं। अभी कोई मदद नहीं मिली है। जब आधार कार्ड दिखाया तो कहा गया कि तुम तो यहां के रहने वाले नहीं हो। घर का सारा सामान तो डूब गया है, बस अब तो सड़क पर रह रहे हैं। 14 साल के बच्चे अनुज ने बताया कि एकदम से पानी घरों में घुस गया, सारा सामान भी वहीं रह गया। अब तो यहां रह रहे हैं। महिला बोली- घर में गले तक पानी भर गया महिला राजरानी ने कहा कि बस्ती में मेरा घर है, लेकिन घर में गले तक पानी भर गया है। बस अब तो बच्चों को लेकर रोड पर हैं। एक तरफ पानी है तो दूसरी तरफ नहर है। अब कहां जाएं? यहीं हैं, चाहें डूबें या कुछ हो, यहीं पड़े हैं। बिहारीपुरवा के सुरेश शर्मा ने बताया कि हर साल का हो गया है कि यहां नदी का पानी बढ़ने पर पानी इलाके में भर जाता है। घर में लोग फंसे हुए हैं। जो निकल आए, वो ठीक है। कुछ लोग तो छतों पर रह रहे हैं। बिहारीपुरवा के ही रितिक कुमार ने बताया कि ऐसा लगता है कि नहरों की सफाई ठीक ढंग से हो तो इस तरह की स्थिति शायद न हो। कानपुर में कई नदियों और नहरों की सफाई पोकलैंड से होती है। उसी तरह से अगर नदी की सफाई कराई जाए तो शायद ऐसी स्थिति न हो। घर के अंदर करीब 6 फीट तक पानी भरा पिपौरी गांव में किशोर रेस्क्यू टीम के साथ जब बाहर आए तो उन्होंने बताया कि रात से लगातार पानी बढ़ रहा था। मकान के पहले तल पर फंसे थे, घर के अंदर करीब 6 फीट तक पानी भरा हुआ है। पिपौरी गांव के ही श्री राम सविता ने बताया कि सारा सामान तो घर में पानी भरने से बर्बाद हो गया है। लेकिन अब हम निकलकर आ गए हैं। जो कुछ सब पानी में रह गया। जिलाधिकारी बोले- एनडीआरफ रात में भी रेस्क्यू आपरेशन चला रही है जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिहं ने बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से पर्याप्त राहत कैंप गेस्टहाउस में बनाए गए हैं। लेकिन कुछ लोग अपने ही घर के पास रहना चाहते हैं, संम्पति का मोह रहता है, तो वहीं खुद का कैंप बनाकर रहने लगते हैं। उन्होंने कहा कि मायापुरम, रविदासपुरम और वरूण बिहार में करीब 1000 परिवार पांडू नदी में आई बाढ़ से प्रभावित हैं। अभी तक आंकलन की बात की जाए तो हम 1000 से 1200 परिवारों के संपर्क में हैं। प्रशासन ने कैंप की पूरी व्यवस्था कर रखी है, कुछ लोग बस्ती के उंचे हिस्से में रुक गए हैं, वहीं रह रहें हैं। लेकिन प्रशासन तैयार है कि वहां भी पानी बढ़ता है तो हम उन्हे सुरक्षित स्थान पर ले जाएंगे। लगातार हम लोगो के संम्पर्क में हैं। एनडीआरफ का रेस्क्यू आपरेशन रात में भी चलाया जा रहा है, जिससे कोई कहीं न फंसे।
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