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    कानपुर देहात में खाद की किल्लत, ओवररेटिंग का आरोप:267 रुपए वाली यूरिया 450 में बिक रही; किसान बोले- मजबूरी में ज्यादा दाम देने पड़ रहे

    6 hours ago

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    कानपुर देहात में खरीफ की फसल के बीच किसान खाद की किल्लत और ओवररेटिंग से परेशान हैं। सरकारी समितियों पर यूरिया के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। खाद नहीं मिलने पर किसानों को निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि निजी दुकानदार निर्धारित कीमत से कहीं ज्यादा दाम पर यूरिया बेच रहे हैं। रसूलाबाद के चौबेनिवादा गांव के किसान अवनीश और बलबीर ने बताया कि समितियों पर घंटों लाइन में लगने के बाद भी खतौनी और दूसरे दस्तावेजों के नाम पर परेशान किया जाता है। कई बार खाद खत्म होने की बात कहकर भी किसानों को लौटा दिया जाता है। किसानों के मुताबिक, मजबूरी में निजी दुकानों से 267 रुपए कीमत वाली यूरिया की बोरी करीब 400 रुपए में खरीदनी पड़ रही है। किसान बोले- 450 रुपए में खरीदी यूरिया डेरापुर के किसान शरद ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक निजी दुकान से यूरिया की बोरी 450 रुपए में खरीदी। किसान का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिली तो फसल खराब होने का डर है। ऐसे में ज्यादा कीमत देकर भी खाद खरीदना मजबूरी है। उन्होंने कहा कि ‘फसल बचाने के लिए 500 रुपए भी देने पड़ें तो खाद लेनी पड़ेगी।’ समितियों पर लंबी लाइन, फिर भी खाद नहीं किसानों का आरोप है कि सरकारी समितियों पर खाद लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। इसके बावजूद प्रभावशाली लोगों को पहले खाद दिए जाने की शिकायतें हैं। आम किसानों को कभी दस्तावेज पूरे नहीं होने तो कभी स्टॉक खत्म होने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। कृषि अधिकारी बोलीं- बिल दिखाएं, होगी कार्रवाई जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडे ने ओवररेटिंग की जानकारी होने की बात कही है। उनका कहना है कि निर्धारित कीमत से ज्यादा पर खाद बेचने वाले दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए किसान से बिल लेना जरूरी है। हालांकि, किसानों के सामने सवाल यह है कि यदि कोई दुकानदार बिना बिल के अधिक कीमत पर खाद बेच रहा है तो किसान उससे बिल मांगकर कार्रवाई का आधार कैसे तैयार करे। किसानों का कहना है कि खाद की जरूरत के समय दुकानदार के खिलाफ शिकायत करने की स्थिति में उन्हें खाद मिलने में भी परेशानी का डर रहता है। खेती की लागत बढ़ने से किसान परेशान किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही बढ़ चुकी है। ऐसे में निर्धारित कीमत से अधिक पर यूरिया खरीदने से आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से सरकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराने और निजी दुकानों पर ओवररेटिंग की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
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