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    करपात्री महराज की कृतियां पढ़ाएगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय:वाराणसी में कुलपति ने कहा- हमारे छात्र करपात्री महराज की कृतियों से होंगे रूबरू

    2 hours ago

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    संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्वामी करपात्री महराज की कृतियों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस संबंध में आज शनिवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। संत स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी व युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह के प्रस्ताव पर कुलपति ने मुहर लगाई। इसके बाद कुलपति ने पत्रकारों से भी वार्ता की। उन्होंने कहा, स्वामी करपात्री महराज का साहित्य भारतीय धर्म-दर्शन, सनातन वैदिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना तथा आध्यात्मिक चिंतन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है। उनके द्वारा रचित ग्रंथों में वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराण और भारतीय दार्शनिक परंपरा की गहन व्याख्या मिलती है, जो विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान-परंपरा के मूल स्वरूप को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती है। अतः उनके साहित्य को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की दिशा में गंभीरतापूर्वक पहल किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कुलपति ने कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है। स्वामी करपात्री जी जैसे महान संत और विद्वान का साहित्य भारतीय संस्कृति, दर्शन और सनातन वैचारिक परंपरा का अमूल्य धरोहर है। उनके ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को शास्त्रीय परंपरा, धर्मदर्शन और भारतीय चिंतन की गहराई को समझने का अवसर प्राप्त होगा तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी यह पहल महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इसके लिए नियमों के आलोक में विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत इसे पाठ्यक्रम में समाहित करने का प्रयास किया जाएगा। स्वामी करपात्री जी के उत्कृष्ट कार्यों को स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी द्वारा आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहल है। ‘धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है करपात्री महराज का साहित्य’ स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा, कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी का साहित्य केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, समाज व्यवस्था और वैदिक जीवन मूल्यों की गहन व्याख्या प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा की वास्तविक समझ देनी है तो ऐसे महान संतों के साहित्य का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। वहीं युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का वैचारिक अवदान भारतीय समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके ग्रंथों में सनातन धर्म की वैचारिक शक्ति, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय चेतना का स्पष्ट स्वर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में ऐसे महान चिंतकों के साहित्य को स्थान मिलने से युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपरा से अधिक गहराई से जुड़ सकेगी।
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