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    सांसद खरवार ने दिशा बैठक की समीक्षा की:सोनभद्र में योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियां मिलने पर रिपोर्ट मांगी

    1 hour ago

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    सोनभद्र सांसद छोटेलाल खरवार की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। सांसद छोटेलाल खरवार ने बताया कि ‘दिशा’ बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्य सरकार से जनपद में आने वाला धन जनता और किसानों तक सही तरीके से पहुंच रहा है या नहीं। समीक्षा के दौरान जहां भी कमियां पाई गईं, उन्हें नोट किया गया। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह से दस दिन के भीतर अपने विभागों के कार्यों और प्राप्त धनराशि का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करें। सांसद ने कहा कि यह भी देखा जाएगा कि वर्ष भर में किस मद से कितना धन आया और उसका उपयोग कहां किया गया। बैठक में यह भी सामने आया कि कई विभागों में एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) न मिलने के कारण कुछ कार्य लंबित हैं। इनमें 61 किलोमीटर लंबी पतवध–बसुआरी सड़क का निर्माण कार्य भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के कुछ दिशानिर्देशों के आधार पर कार्य कराए जा रहे हैं और एक महीने के भीतर इन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में विधायकों की अनुपस्थिति के सवाल पर सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि ‘दिशा’ बैठक किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कार्यों का लेखा-जोखा लेने की जिम्मेदारी सांसद और विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों की होती है। सांसद ने जोर देकर कहा कि यह सरकार की बैठक है। यदि कोई इसे सांसद या अध्यक्ष की व्यक्तिगत बैठक समझता है तो यह उनकी गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की बैठक है, जिसमें राज्य सरकार की योजनाओं की भी समीक्षा होती है। यदि राज्य सरकार के विधायक, खासकर उनकी ही पार्टी से निर्वाचित प्रतिनिधि, इसमें शामिल नहीं होते हैं तो यह विचार करने का विषय है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि विधायकों को बैठक में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और जनता व किसानों से यह भी पूछना चाहिए कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला या नहीं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं समय से पहले बैठक में पहुंचकर योजनाओं की समीक्षा करते हैं, क्योंकि उन्हें जनता और किसानों की चिंता है। सांसद ने कहा कि विधायकों का बैठक में शामिल न होना सरकार की योजनाओं के प्रति उनकी अनिच्छा को दर्शाता है।
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