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    'कृष्ण टेढ़े हैं' बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी:कहा- मेरे नाम में उनका नाम, बात को तोड़ा-मरोड़ा गया

    1 day ago

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    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी करके विवादों में आ गए हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम की तुलना श्रीकृष्ण से करते हुए कहा- 'तुम अपने वाले ठाकुरजी की एक भी फोटो देख लो। खड़े भी होते हैं, तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कहीं कमर लचकाएं और टेढ़ी गर्दन करके बंसी बजाते हैं। हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं, एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे हैं। तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं। पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं। हमारे भगवान के चेले ने पूरा पर्वत उड़ा दिया था। हमारे वालों का धाम भी सीधा- अयोध्या, तुम्हारे वाले का- वृंदावन!' हालांकि, इस पर विवाद बढ़ते ही धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी करके सफाई दी। कहा- कई लोगों ने मेरी बात का गलत मतलब निकाल लिया। हम खुद ठाकुरजी और ब्रज के भक्त हैं। जब भी ठाकुरजी से प्रार्थना करते हैं, तो कहते हैं कि हमें ब्रज में वास मिले। हम श्रीमद्भागवत कथा भी कहते हैं और ठाकुरजी का गुणगान करते हैं। हमारा भगवान राम और कृष्ण में भेद करने का कोई इरादा नहीं था। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान श्रीकृष्ण पर टिपिपणी की थी। 10 अक्टूबर (रविवार) को इसका वीडियो सामने आने के बाद मथुरा के साधु-संतों ने नाराजगी जताई। धीरेंद्र शास्त्री से माफी मांगने को कहा था। पढ़िए, धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी सफाई में क्या कहा पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान की सफाई में आगे कहा- जैसे सखियां श्रीराम को उलाहना देती हैं। गोपियां ठाकुर श्रीकृष्ण को उलाहना देती हैं। कवि बिंदुजी महाराज ठाकुरजी को और ब्रज के संत कोकिल सांई जी रघुनाथ जी को उलाहना देते हैं। वैसे ही हमने भी भाव में एक पद कहा था। यह एक संत का बहुत प्रचलित पद है- 'बंसी बजाना तो खेल ही है, पर धनुष उठाना खेल नहीं।' हम उसी पद की व्याख्या कर रहे थे। लेकिन, कई लोगों ने पूरी वीडियो देखने की जगह आधा वीडियो देखकर हमें कृष्ण विरोधी बता दिया। हम कृष्ण विरोधी नहीं हैं। श्रीकृष्ण हमारे ठाकुरजी हैं। हम खुद कृष्ण जन्मभूमि के लिए बार-बार आवाज उठाते हैं। हमारे नाम में भी उनका नाम जुड़ा है। उन्हीं की वजह से हमारा जीवन है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- अगर हमारी इस बात, व्याख्या या भाव से किसी के मन को ठेस पहुंची, तो हम माफी मांगते हैं। हमारी बात का गलत मतलब निकालकर उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें। हमने समाज या भगवान को बांटने की कोशिश नहीं की है। हम भगवान को क्यों बांटेंगे? राम और कृष्ण दोनों एक ही हैं। उनमें कोई अंतर नहीं। हमने यह बात भावुक होकर कही थी। फिर भी हम आप सभी से कहेंगे कि हमारी भावना को समझें। खबर में पोल है, आगे बढ़ने से पहले हिस्सा लें अब पढ़िए धीरेंद्र शास्त्री क्या कहकर विवादों में आए थे 'बंसी बजाना खेल, धनुष चलाना खेल नहीं' धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- बंसी बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं। जितने ठाकुरजी वाले बैठे हैं, आज तो तुम्हारे ठाकुरजी की भी जय-जयकार हो रही है। फिर उन्होंने बंसी बजा रहे कलाकार की ओर इशारा करते हुए कहा- सुनो, तुम्हारे ठाकुरजी क्या करते हैं? बंसी बजाते हैं? तो बंसी बजाना कोई बड़ी बात थोड़ी है। देखो, हमारे यहां तो ये भी बजा रहा है। बजा-बजा, बजा। लो, लो। इसके बाद बांसुरी वादक ने कुछ देर तक बंसी की धुन सुनाई। धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में बैठे लोगों से पूछा- रामजी को मानने वाले कितने लोग बैठे हैं, हाथ उठाओ। हां! आज तुम लोग फूले नहीं समाओगे। ‘गाय चराना खेल, बंदरों को नचाना खेल नहीं’ धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के गाय चराने और पर्वत उठाने का भी जिक्र किया था। कहा था- लोग कहेंगे कि हमारे वाले भगवान तो गाय चराते हैं। गाय तो कोई भी चरा सकता है। गाय चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का जिक्र किया था। कहा था- तुम कहोगे कि हमारे वाले तो पर्वत उठा लेते हैं। यह कोई बड़ी बात है क्या? हमारे वाले भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। उनका इशारा भगवान राम के भक्त हनुमान की ओर था। अखिलेश बोले- ये सनातन के खिलाफ गहरी चाल सपा प्रमुख अखिलेश ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर कहा कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार सनातन के खिलाफ इतनी गहरी साजिश कैसे और कौन रच रहा है? मथुरा के संतों में गुस्सा, पढ़िए किसने क्या कहा- दिनेश फलाहारी बोले- रावण का भी अहंकार नहीं रहा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण में याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राम ब्रह्म हैं और श्रीकृष्ण योगेश्वर हैं। हमारे कृष्ण कन्हैया ब्रजवासियों के लाडले हैं। उनके बारे में टिप्पणी करना अनुचित है। चाहे धीरेंद्र शास्त्री हों या कोई और, ब्रजवासी उन्हें माफ नहीं करेंगे। रावण का भी अहंकार नहीं रहा, फिर आप क्या चीज हैं? साध्वी बोलीं- कृष्ण हर ब्रजवासी के लाडले साध्वी इंदुलेखा ने कहा कि श्रीकृष्ण हमारे आराध्य हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने जिस तरह की टिप्पणी की है, उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृष्ण हर ब्रजवासी के लाडले हैं। इसलिए धीरेंद्र शास्त्री को अपनी टिप्पणी पर माफी मांगनी चाहिए। ‘बागेश्वर सरकार माफी मांगें, वरना हम चुप नहीं बैठेंगे’ पंडित राजेश पाठक ने कहा कि श्रीकृष्ण के बारे में मजाक में भी कोई गलत टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी साधु-संत या कथावाचक ने श्रीकृष्ण के बारे में अनुचित टिप्पणी की, ब्रजवासियों ने उसका विरोध किया है। बागेश्वर सरकार की टिप्पणी का भी कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर उन्होंने माफी नहीं मांगी, तो ब्रजवासी चुप नहीं बैठेंगे। 2 साल पहले पंडित प्रदीप मिश्रा ने की थी टिप्प्णी, फिर नाक रगड़ी थी इससे पहले कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने 9 जून, 2024 को ओंकारेश्वर में राधा रानी को लेकर विवादित बयान दिया था। कहा था- राधा रानी का नाम भगवान श्रीकृष्ण की 108 पटरानियों और 1600 रानियों में नहीं है। राधा के पति का नाम अनय घोष, सास का नाम जटिला और ननद का नाम कुटिला था। राधाजी का विवाह छाता में हुआ था। उन्होंने यह भी कहा था कि राधाजी बरसाना की नहीं, रावल की रहने वाली थीं। बरसाना में उनके पिता की कचहरी थी, जहां वह साल में एक बार आती थीं। प्रदीप मिश्रा का प्रवचन वायरल होने के बाद संतों और ब्रज के लोगों ने विरोध किया था। सबसे तीखी प्रतिक्रिया प्रेमानंद महाराज की ओर से आई थी। उन्होंने कहा था- लाडलीजी के बारे में तुम्हें पता ही क्या है? तुम जानते ही क्या हो? अगर तुम किसी संत के चरण रज का पान करके बात करते, तो तुम्हारे मुख से कभी ऐसी वाणी नहीं निकलती। विवाद बढ़ने के बाद 29 जून, 2024 को प्रदीप मिश्रा बरसाना मंदिर पहुंचे थे। राधा रानी के जन्म और विवाह को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी और दंडवत प्रणाम किया था। --------------------------- यह खबर भी पढ़िए- बरसाना मंदिर में पं. प्रदीप मिश्रा से बदसलूकी, धक्का-मुक्की, नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से शनिवार, 29 जून को बरसाना मंदिर में बदसलूकी की गई। धक्का-मुक्की करते हुए उनके अंगवस्त्र खींचे गए। नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया गया। लोग चिल्ला रहे थे कि नाक रगड़वाओ, कान पकड़वाओ...। पढ़ें पूरी खबर
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