Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    कंधों पर मां और चाची, साथ में गंगाजल:मुजफ्फरनगर पहुंची 'श्रवण कांवड़' ने भावुक किया, शिवभक्त की सेवा भावना बनी मिसाल

    13 hours ago

    1

    0

    कांवड़ यात्रा में जहां आकर्षक और अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं, वहीं मुजफ्फरनगर के छपार में शनिवार सुबह एक ऐसी 'श्रवण कांवड़' पहुंची, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। शाहपुर थाना क्षेत्र के दुल्हेरा गांव निवासी शिवभक्त यशवीर अपनी मां और चाची को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौटे। उनकी सेवा भावना और बुजुर्गों के प्रति समर्पण को देखकर रास्ते भर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। यशवीर की कांवड़ सबसे अलग इसलिए नजर आई क्योंकि उसके एक पलड़े में उनकी मां और दूसरे में उनकी चाची बैठी थीं, जबकि दोनों सिरों पर गंगाजल की कैन संतुलित तरीके से बांधी गई थी। 60 वर्ष से अधिक आयु की दोनों महिलाओं के लिए पैदल यात्रा संभव नहीं थी, इसलिए बेटे ने उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी करने का संकल्प लिया। 'मां की इच्छा थी, इसलिए यह यात्रा की' यशवीर ने बताया कि उनकी कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं थी। उनकी मां और चाची लंबे समय से हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करने और कांवड़ यात्रा में शामिल होने की इच्छा जता रही थीं। उम्र अधिक होने के कारण उन्होंने तय किया कि वे दोनों को कांवड़ में बैठाकर पूरी यात्रा कराएंगे। आठ साल पहले भी निभाई थी यही सेवा यशवीर ने बताया कि यह पहली बार नहीं है। करीब आठ वर्ष पहले भी उन्होंने अपनी मां और चाची को इसी तरह कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार की यात्रा कराई थी। इस बार भी परिवार के पांच अन्य सदस्यों ने पूरी यात्रा के दौरान उनका सहयोग किया, जिससे यह सेवा, समर्पण और पारिवारिक एकजुटता की अनूठी मिसाल बन गई। लोगों ने बताया आधुनिक दौर का 'श्रवण कुमार' मुजफ्फरनगर पहुंचने पर 'श्रवण कांवड़' को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने यशवीर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनकी सेवा भावना की जमकर सराहना की। कई लोगों ने उन्हें आधुनिक दौर का श्रवण कुमार बताते हुए कहा कि उन्होंने बुजुर्गों के सम्मान और सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। युवाओं से की बुजुर्गों की सेवा की अपील यशवीर ने कहा कि माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना हर संतान का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि अवसर मिले तो अपने बुजुर्गों की इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास जरूर करें, क्योंकि उनकी सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता।
    Click here to Read more
    Prev Article
    सभी संस्थानों को 15 दिन में ICC गठन के निर्देश:बलरामपुर में लापरवाही पर ₹1 लाख तक जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
    Next Article
    अमरोहा में कांवड़ियों के लिए हाईवे की एक लेन आरक्षित:दिल्ली-लखनऊ मार्ग पर बदला ट्रैफिक प्लान, भारी वाहन पहले से डायवर्ट

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment