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    खुर्जा में PNG से चलने वाली पॉटरी यूनिट्स बंद:PNG के दाम 49 से 119.90 रुपये हुए, 30 से 40 हजार मजदूरों की नौकरी पर संकट

    1 hour ago

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    बुलंदशहर के खुर्जा में एशिया के सबसे बड़े पॉटरी उद्योग पर अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का असर दिखना शुरू हो गया है। PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण खुर्जा की 300-325 पॉटरी यूनिट्स में से 95% बंद हो गई हैं। इससे न केवल उद्यमियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि 30-40 हजार कुशल श्रमिकों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। खुर्जा पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा के अनुसार, अडानी जैसी गैस सप्लायर कंपनियों ने PNG के दामों में ढाई गुना तक का इजाफा किया है। 4 मार्च से पहले PNG का दाम 49 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 119.90 रुपये प्रति किलो हो गया है। यह बढ़ोतरी एग्रीमेंट से अधिक PNG खपत करने पर लागू की गई है। एग्रीमेंट के तहत तय मात्रा में गैस इस्तेमाल करने पर उद्यमियों को 49 रुपये प्रति किलो का भुगतान करना होगा, लेकिन अधिक खपत पर 119.90 रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। LPG के दाम भी 61 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 93 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। गैस सप्लायर कंपनियों ने खरीदारों को ईमेल के जरिए दामों में बढ़ोतरी की आधिकारिक सूचना दी है। जापान और इंग्लैंड के बाद खुर्जा एशिया का सबसे बड़ा पॉटरी व्यवसाय केंद्र है। यहां से हर महीने 60-70 करोड़ रुपये का कारोबार देश और विदेश में होता है, जिससे सरकार को भी बड़ा राजस्व मिलता है। हालांकि, गैस की कीमतों में अचानक वृद्धि और किल्लत के कारण पॉटरी उद्यमियों ने उत्पादन बंद कर दिया है। उद्यमियों ने गैस सप्लायर कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कंपनियां अपने हिसाब से गणना कर मनमाने ढंग से दरें तय कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है की पॉटरी उद्योगों को चलाने के लिए केवल PNG या कमर्शियल LPG का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी का तेल, डीजल या कोयले के इस्तेमाल पर NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की ओर से पूरी तरह मनाही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि 93 रुपये किलो की LPG और 119.90 रुपये किलो वाली PNG का इस्तेमाल कर मिट्टी के बर्तन बनाने का धंधा क्या मुनाफा दे पाएगा। यही वजह है नई परिस्थितियों में पॉटरी उत्पादन को घाटे का सौदा मानकर पॉटरी यूनिट्स को बंद करना ही समझदारी मान रहे हैं।
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