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    लकड़ी पर खाना बनेगा या बंद होंगे ढाबे-रेस्टोरेंट:कई संचालक PNG का कनेक्शन लेने की तैयारी में

    7 hours ago

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    एलपीजी गैस की किल्लत की खबरों के बीच सबसे बुरा असर होटल, रेस्टोरेंट व ढाबों पर पड़ने वाला है। गोरखपुर में अभी तो किसी रेस्टोरेंट ने अपना मेनू कम नहीं किया है लेकिन अगले कुछ दिनों में प्रभाव साफ नजर आएगा। फिलहाल अधिकतर रेस्टोरेंट के पास 5 से 7 दिनों का सिलेंडर उपलब्ध है लेकिन भविष्य में दिक्कत हो सकती है। कोई जिम्मेदार कमर्शियल सिलेंडर पर रोक की बात खुलकर तो नहीं कह रहा लेकिन अंदरखाने यह चर्चा है कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिए जाएंगे। ऐसे में ढाबे व रेस्टोरेंट में या तो लकड़ी का उपयोग होगा या कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ेगा। कुछ संचालक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लेने की तैयारी में हैं। छात्रावासों के मेस, हास्पिटल आदि जरूरी जगहों पर ऑयल कंपनियों के अधिकारियों की अनुमति से कुछ सिलेंडर दिए जा सकते हैं। फिलहाल इन स्थानों पर भी संकट पैदा हो रहा है। यहां के संस्था प्रमुखों ने डीएम के सामने अपनी बात रखी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कैंटीन व मेस में भी संकट पैदा होने लगा है। मेस संचालक की ओर से AIIMS की कार्यकारी निदेशक को जानकारी दी गई है। संभवत: कार्यकारी निदेशक ने इस मामले में डीएम से बात की है। इसके साथ ही मेडिकल कालेज व अन्य संस्थाओं में भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गैस एजेंसी संचालकों को ऑयल कंपनियों की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के छात्रावास एवं अस्पताल की सूची दें। उसके अनुसार कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी। फिलहाल रेस्टोरेंट व ढाबे प्राथमिकता में नहीं फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति यदि शुरू भी हुई तो रेस्टोरेंट, ढाबे या होटल उसकी प्राथमिकता में नहीं हैं। वहां के लिए आधिकारिक रूप से प्रतिबंध नहीं है लेकिन न्यूनतम उपलब्धता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि इन जगहों पर सिलेंडर मिल पाना आसान नहीं। कमर्शियल सिलेंडर मिलेंगे तो अस्पताल व छात्रावासों में आपूर्ति की जाएगी। इनकी संख्या भी पहले से कम रहेगी। शहर में 5000 से अधिक प्रतिष्ठानों में प्रयोग होता है कमर्शियल सिलेंडर जिले में ऐसे करीब 5000 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे व ठेले-खोमचे हैं, जहां कमर्शियल सिलेंडरों का उपयोग होता है। इनमें से तारामंडल व राप्तीनगर क्षेत्र के लगभग 60 से 70 कमर्शियल भवन ऐसे हैं, जहां PNG का उपयोग होता है। फिलहल उनके सामने अभी कोई संकट नहीं है। लेकिन शेष स्थानों पर कमर्शियल सिलेंडरों के जरिए ही काम चल पाता है। अभी तक तो सभी के पास स्टॉक है लेकिन यदि सिलेंडर नहीं मिला तो संकट गहराएगा। जानिए क्या कहते हैं होटल संचालक पार्क रोड स्थित रेस्टोरेंट के संचालक बताते हैं कि उनके यहां कुछ सिलेंडर अभी हैं। पहले से बुकिंग को देखते हुए इंतजाम करके रखा गया था। लेकिन यदि नए सिलेंडर नहीं मिले तो फिर लकड़ी का ही सहारा रहेगा। इस संबंध में सभी संचालक मिलकर कोई रास्ता निकालने पर विचार करेंगे। तारामंडल क्षेत्र में एक रेस्टारेंट संचालित करने वाले ने बताया कि उनके यहां सिलेंडर की कमी होने लगी है। एजेंसी पर बात करने पर वहां से मना किया जा चुका है। हमारे यहां PNG की सुविधा है, हम इसके कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं। 5 स्टार होटलों में PNG की सुविधा PNG की आपूर्ति करने वाली कंपनी टोरेंट के प्रतिनिधि की मानें तो शहर में 17000 से अधिक लोग ऐसे हैं, जिनके यहां PNG से रसोई चल रही है। तारामंडल क्षेत्र के रेस्टोरेंट व होटल भी इसी पर निर्भर हैं। 5 स्टार होटलों की तरह लगभग 60 से 70 रेस्टोरेंट में PNG की सुविधा है। जिनके पास PNG का कनेक्शन नहीं है, वे लेने की फिराक में हैं। तारामंडल क्षेत्र में रेस्टोरेंट संचालित करने वाले एक संचालक ने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर मिलने में समस्या आ रही है। गैस के लिए मारपीट का आरोप ट्रांसपोर्टनगर स्थित एक एजेंसी पर ग्राहक से मारपीट की चर्चा रही। एक ग्राहक ने आरोप लगाया था कि सुबह 3 बजे से लाइन में लगने के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं दिया गया। सुबह जब वितरण शुरू हुआ तो हॉकरों को सिलेंडर दिया जाने लगा। इसका विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि एजेंसी संचालकों ने अपने यहां किसी घटना से इनकार किया है। शादियों में लकड़ी का प्रयोग शुरू जिनके यहां शादी या कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम है, वहां भी एलपीजी सिलेंडर की कमी देखी जा रही है। कुछ कार्यक्रमों में तो खाना बनाने के लिए सिलेंडर के साथ लकड़ी का उपयोग करते देखा गया। जिन्होंने पहले से सिलेंडर लेकर रखे हैं, उनका तो ठीक है लेकिन जो एजेंसी संचालकों के आश्वासन के भरोसे हैं, उन्हें सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में लकड़ी पर खाना बनाने का विकल्प तलाशा जा रहा है। इधर लकड़ी व कोयले के दाम में इजाफा होने की चर्चा भी रही। कई स्थानों पर 1500 रुपये में सिलेंडर खरीदने की बात भी आयी। 20 प्रतिशत तक कम हो चुका है एजेंसियों का कोटा फिलहाल एजेंसियों को मिलने वाले कोटे में कटौती की गई है। पिछले साल जनवरी व फरवरी के कोटे के अनुसार 80 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है। यानी यदि जनवरी 2025 में किसी एजेंसी को महीने में 11 हजार और फरवरी में 9 हजार सिलेंडर दिया गया होगा तो उसका दो महीने का कोटा 20 हजार का माना जाएगा। इस आधार पर प्रति महीने का कोटा 10 हजार सिलेंडर का होगा। अब इसमें 20 प्रतिशत कम करके यानी 8000 सिलेंडर इस समय उपलब्ध कराए जाएंगे। इस बीच लगभग सभी एजेंसियों पर ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। इधर पहले जहां डीएसी पर 40 प्रतिशत सिलेंडर देने की अनिवार्यता थी, उसे अब बढ़ाकर 80 से 85 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी बिना डीएसी नंबर के अब बहुत कम सिलेंडर मिल सकेंगे। इसका अर्थ हुआ कि बुकिंग की पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही सिलेंडर मिल सकेगा।
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