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    आम के बौर बचाने को करें छिड़काव:मऊ में उद्यान अधिकारी ने दी खर्रा रोग और कीटों से बचाव की सलाह

    1 hour ago

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    आम का मौसम शुरू हो गया है और पेड़ों पर बौर आने लगे हैं। हालांकि, कई स्थानों पर बौर के झड़ने की समस्या देखी जा रही है। उद्यान अधिकारियों ने इस समस्या से निपटने और आम की फसल को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल छिड़काव शुरू करने की सलाह दी है। उद्यान अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष आम के पेड़ों पर अच्छी बौर दिखाई दे रही है, जो अब परिपक्व होने की अवस्था में है। उन्होंने बताया कि अगले 15 से 20 दिनों तक सर्वप्रथम सुरक्षात्मक उपचार करना आवश्यक है, ताकि बौर से अधिक से अधिक फल बन सकें। इस अवस्था में खर्रा रोग के लिए फफूंदनाशक और थ्रिप्स कीट के लिए कीटनाशक का छिड़काव अनिवार्य है। कीटनाशक दवाओं में घुलनशील गंधक (2 ग्राम प्रति लीटर या 1 ग्राम प्रति लीटर), इमिडाक्लोप्रिड (2 ग्राम प्रति लीटर) और विभिन्न कंपनियों का कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति लीटर) का उपयोग किया जा सकता है। एक छिड़काव तुरंत करें और दूसरा छिड़काव 10 दिनों के बाद करें। यह आम की मंजरियों को खर्रा रोग जैसी फफूंद जनित बीमारियों से बचाएगा। इसके अतिरिक्त, भूमिगत कीटों और थ्रिप्स की रोकथाम के लिए पेड़ के तने से लेकर ऊपर तक अच्छी तरह से धुलाई करनी चाहिए। कीटों को पेड़ पर चढ़ने से रोकने के लिए तने के चारों ओर पॉलीथिन की एक पट्टी बांध सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, तने पर लगभग दो फीट चौड़ा ग्रीस या मोबिल ऑयल का लेप लगाना अधिक प्रभावी होता है। यह उपाय गुजिया कीट (वीविल) को चढ़ने से रोकता है, जो फलों को काटकर और चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। जिन पेड़ों पर अभी तक बौर नहीं आई है तो उसमें आने का संभावना नहीं है, उसमें आम का अल्टरनेट बेरिंग होता है 1 साल का अंतर रहता है। अगर दो-तीन साल से बौर नहीं आ रहा है तो उसमें पोषण की कमी है। पोषण समय से देना चाहिए। पोषण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है अक्टूबर और उसके बाद फिर फरवरी मार्च या बरसात के पहले तो सितंबर अक्टूबर में और एक बार जाड़े में जनवरी फरवरी आता है। अगले साल के लिए किसान और उसको पोषण के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कॉपर, मैग्नीशियम, जिंक, प्लैटिनम का मिक्सर और उसके साथ-साथ गोबर की खाद पर्याप्त मात्रा में थोड़ी नीम की खली, थोड़ा सा फॉरेस्ट मिलकर दो बार पौधों में डाल दें जिससे दीमक ना लगे। यदि पौधों में पानी डाल रहे हैं तो जब तक नॉर्मल बोर है पानी डालें यदि बोर में दाने लगे शुरू हो जाए तो पानी ना डालें अन्यथा बौर से दाने गिरने लगेंगे से आपका फल का नुकसान हो सकता है।
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