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    लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उठाया डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा:राज्यसभा में की डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून की मांग

    3 hours ago

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    राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेई ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच बढ़ती कटुता एवं हिंसा का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और एक स्थायी नियामक संस्थान के गठन की मांग की। राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेई ने कहा कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी समाज के ऐसे योद्धा हैं, जो दिन-रात लोगों की जान बचाने में लगे रहते हैं। बावजूद इसके, पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में डॉक्टरों पर हमले, अस्पतालों में तोड़फोड़ और उपकरणों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। यह समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी तेजी से फैल रही है। मेरठ जैसे शहरों में भी नर्सिंग होम और छोटे अस्पतालों में मरीजों के परिजनों और डॉक्टरों के बीच विवाद के चलते सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं, जिससे इलाज की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। आंकडे देते हुए बताई समस्या वाजपेई ने एक राष्ट्रीय अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि देश में करीब 60.9% डॉक्टरों ने पिछले एक वर्ष में किसी न किसी रूप में हिंसा या दुर्व्यवहार का सामना किया है। इनमें अधिकांश मामले मौखिक दुर्व्यवहार के हैं, जबकि लगभग 3.9% मामलों में शारीरिक हमले भी हुए। चिंताजनक बात यह है कि लगभग 48% घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं होतीं, जिससे व्यवस्था पर अविश्वास झलकता है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच 149 हिंसक घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से सीमित मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई, जो कानून व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास को कमजोर करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के माहौल को असुरक्षित बनाती हैं। सरकार से मांग करते हुए प्रस्ताव रखा गया कि डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों दोनों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में तथा जिला स्तर पर जिला जज की अध्यक्षता में डॉक्टर-मरीज सुरक्षा एवं समन्वय समिति का गठन किया जाए।
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