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    लखनऊ अग्निकांड के प्रभावित बोले- यहीं रहेंगे कहीं नहीं जाएंगे:स्थानीय लोग बने सहारा, सरकार से नहीं मिला ठिकाना

    3 hours ago

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    'सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिला है। बस आम जनता ही मदद कर रही है। खाना पकाने तक के बर्तन नहीं बचे। हम बस किसी तरह जी रहे हैं। रहना तो यहीं है, चाहे जिंदगी चले या खत्म हो जाए। यह दर्द बयां किया है सुनहरा ने। दरअसल लखनऊ के विकासनगर में 15 अप्रैल को लगी भीषण आग के बाद की तस्वीरें किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देती हैं। जिन लोगों के घर जलकर राख हो गए, वे अब उसी जमीन पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। जले हुए मलबे के बीच प्लास्टिक की चादरों से बने अस्थायी ठिकाने ही अब उनका सहारा हैं। न दीवारें बची हैं, न दरवाजे। बस एक तिरपाल के नीचे पूरी जिंदगी सिमटी है। देखिए 3 तस्वीरें… 'यहीं रहेंगे चाहे कुछ भी हो' विकासनगर के इस्लामी इलाके में रहने वाली सुनहरा बताती हैं हम यहीं रहते थे। सब कुछ जलकर खाक हो गया। अब कोई मदद नहीं मिल रही। जो भी मदद हो रही है, वो आसपास के लोग ही कर रहे हैं। शासन-प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। खाना पकाने तक को बर्तन नहीं है। बस खा रहे जी रहे हैं। हम यहीं रहेंगे। चाहे फिर से आग क्यों न लग जाए। हमारे पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं है। आश्रीन बोली- चार दिन से खुले आसमान के नीचे वहीं, आश्रीन कहती हैं कि, 4 दिनों से हम इसी हालत में हैं। सब कुछ जल गया है। प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। वह अपने तिरपाल के नीचे बैठे बच्चों की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं। अब हम यहीं रहेंगे, कहीं जाने का कोई ठिकाना नहीं है। तिरपाल में रहने को मजबूर लोग आग बुझने के बाद विकासनगर में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जहां राहत और शिफ्टिंग की बातें हो रही थी। वहीं अब भी कई परिवार तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर है। ना लोगों को पास पक्की छत है और ना ही कोई सुविधा। यहां रहने वाले लोगों की हर रात डर के साए में गुजर रही है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई, तो उन्हें इसी तरह रहना पड़ेगा।
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