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    लखनऊ के हेरिटेज जोन में सड़क पर बहता है सीवर:बारिश के बाद सड़कें बनीं नदी, कूड़ाघर से फैलती बदबू, खुला नाला मौत को दे रहा दावत

    3 hours ago

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    लखनऊ का हुसैनाबाद वार्ड, शहर का सबसे पुराना और ऐतिहासिक वार्ड है। इसी वार्ड में छोटा इमामबाड़ा, रूमी गेट, घंटाघर और पिक्चर गैलरी जैसे तमाम ऐतिहासिक धरोहरें आती हैं। इस वार्ड के लोगों को गंदगी, जलभराव और सीवर ओवरफ्लो जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में नाला मौत को दावत दे रहा है। बाउंड्री वॉल इतनी छोटी है कि अक्सर उसमें हादसे हुआ करते हैं। हुसैनाबाद इलाके में मोहर्रम के दौरान 2 महीना 8 दिन तक सबसे अधिक जुलूस और मजलिस होते हैं। वॉर्ड के लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान कई बार तो ऐसा हुआ है कि पूरी सड़क पर पानी भर गया, सड़कें तालाब बन गईं और इसी के बीच से अंजुमन और जुलूस को गुजारना पड़ा। इमामबाड़ा के पास इतना ज्यादा पानी भर जाता है कि यहां मजलिस में शामिल होने जो लोग आते हैं, उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। कई बार तो स्थानीय लोगों को खुद ही पानी निकालना पड़ता है। नाली और नाला साफ करना पड़ता है। छोटा इमामबाड़ा से होते हुए ठाकुरगंज की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क पर यूनिटी कॉलेज के पास कूड़ाघर बना है जिससे पूरे क्षेत्र के लोग परेशान हैं। अक्सर कूड़ा सड़क पर फैल जाता है। सबसे ज्यादा परेशान छात्र होते हैं और इसका प्रभाव स्थानीय दुकानदारों के व्यापार पर पड़ रहा है। इसी के आगे जामा मस्जिद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। पर्यटकों को भी कूड़ाघर के सामने से गुजरना पड़ता है। दैनिक भास्कर एप 'वार्ड परिक्रमा' मुहिम चला रहा है। इसके तहत नगर निकाय के वार्डों की वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में हमारी टीम ने वार्ड नंबर-93 हुसैनाबाद में पहुंची। यहां के प्रमुख कॉलोनियों, मोहल्लों, इलाकों का हाल जाना। निवासियों से बात कर उनकी समस्या समझने की कोशिश की। सबसे पहले ग्राउंड रियलिटी की तस्वीरें- वार्ड की बड़ी समस्याएं- सीवर सड़क पर आने से से परेशानी हो रही- घंटाघर के ठीक सामने सड़क पार करके रईस मंजिल कॉलोनी है। इस के मुख्य गेट पर नाली की गंदगी और कूड़ा जमा था। अंदर जाते ही सीवर की गंदगी सड़क और गलियों में नजर आ रही थी। जिसकी वजह से क्षेत्र में काफी दुर्गंध। इस कॉलोनी में जो सबमर्सिबल पानी की टंकी लगाई गई थी वह भी खराब पड़ी थी। जिसकी वजह से अक्सर लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। नाला बीमारी और हादसे का केंद्र- इसी वार्ड में जूते बाज़ार से हो कर गुजरने वाला नाला भी लोगों की नींद हराम किये हुए है। थोड़ी सी बारिश के बाद स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि नाले की सफाई मानसून शुरू होने के बाद भी नहीं हुई। जिसके कारण गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पूरा इलाका इसकी बदबू से परेशान है। नाले की दूसरी बड़ी समस्या यह है की बाउंड्री वॉल बेहद छोटी है। जिस वजह से अक्सर छोटे बच्चे और जानवर हादसे का शिकार हो जाते हैं। भीषण बारिश में जब नाला का पानी ऊपर तक आ जाता है तो अंदाजा ही नहीं लगता है कि सड़क कहां है और नाला कहां। कूड़ाघर से क्षेत्र वालों के लिए बीमारी का घर- छोटा इमामबाड़ा से जो रास्ता यूनिटी कॉलेज और शाही जमा मस्जिद की तरफ जाता है बीच मुख्य सड़क पर कूड़ाघर बना हुआ है। यूनिटी कॉलेज से 20 कदम की दूरी पर यह कूड़ाघर स्थानीय व्यापारियों, निवासियों और छात्रों के लिए मुसीबत है। लोगों का आरोप है कि कूड़ाघर जब पूरी तरह से भर जाता है तब उसका कूड़ा सड़क पर आ जाता है जिसकी वजह से गंदगी के साथ हादसे भी होते हैं। बारिश के दिनों में तो दुर्गंध इतनी ज्यादा फैल जाती है कि आसपास के घरों में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसी सड़क से होकर इमाम बाड़ा से आने वाले पर्यटक जामा मस्जिद को देखने जाते हैं उसका भी नकारात्मक असर पड़ता है। पानी और सड़क के लिए संघर्ष- क्षेत्र के कई वार्ड में पीने वाले पानी की समस्या भी बनी हुई है। स्थानी लोगों का आरोप है कि सप्लाई वाला पानी समय पर नहीं आता है। इलाके में जो सबमर्सिबल लगाए गए हैं वह भी खराब पड़े हैं जिस कारण दूसरे मोहल्ले से यह दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है कई बार तो खरीद कर पीना पड़ता है। इसके साथ ही टूटी हुई सड़के भी बड़ी समस्या है 15 से 20 सालों से सड़कों का निर्माण नहीं हुआ इस दौरान जो सीवर लाइन और पाइप लाइन डाली गई उसके बाद सड़क की स्थिति और जर्जर हो गई। अब पढ़िए स्थानीय लोगों ने जो कहा- थोड़ी देर की बारिश में मोहल्ला जलमग्न होता रईस मंजिल निवासी अमन अली ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी जलभराव की है। थोड़ी देर बारिश होती है तो पूरा मोहल्ला जलमग्न हो जाता है। बारिश के अलावा भी आम दिनों में मोहल्ले में पानी भरा रहता है। इस समय मोहर्रम चल रहा है। सभी घरों और इमाम बाड़ा में मजलिस होती है। सीवर और नालियों का गंदा पानी अगर कपड़ों में लग जाए तो कपड़े अपवित्र हो जाते हैं, इसलिए इस पानी से बचना बेहद जरूरी है। जब भी रात में बारिश हो गई तो सुबह बच्चे स्कूल नहीं जा सकते। जलभराव बीमारियों का घर है। नाली से निकलने वाला कूड़ा और गंदगी बच्चों को संक्रमित करता है। इसके अलावा उस मोहल्ले में बुजुर्ग भी काफी बीमार रहते हैं। जलभराव और बारिश के बाद हम लोग घरों में कैद हो जाते हैं। पानी की टंकियां खराब स्थानीय निवासी हैदर रिजवी ने बताया कि पूरे मोहल्ले की पानी की टंकियां खराब पड़ी है। उनके क्षेत्र में चार पानी की टंकी लगवाई गई जो सबमर्सिबल के जरिए पानी देती थी मगर चारों बेकार हो गई हैं । सबमर्सिबल एक बार खराब हो जाए तो दोबारा बनना असंभव समझिए। सप्लाई का पानी कभी आता है कभी नहीं आता है ऐसे में जो टंकी हम लोगों का सहारा थी वो भी खराब है। अब यह होता है कि जब सप्लाई वाला पानी नहीं आता है तो हम लोगों को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। 20 साल से जल निकासी की परेशानी स्थानीय निवासी सादिक ने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम खराब है। पिछले 20 सालों से हम लोग देख रहे हैं कि व्यवस्थित तरीके से पानी की निकासी है ही नहीं। एक बार बारिश हो जाए तो 24 घंटे लग जाते हैं पानी निकलने में। जब तक स्थानीय लोग खुद अपनी ना निकालें निकल नहीं सकता। इस जलभराव में गंदगी के साथ करंट कभी खतरा रहता है। जलभराव की जगह पर ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं ऐसे में यह हादसों को खुली दावत है। इसके अलावा डोर तो डोर कूड़ा लेने वाले हफ्ते में मुश्किल से एक बार आते हैं। इस वजह से घरों में कूड़ा जमा हो जाता है और फिर लोग कूड़ा सड़क पर डाल देते हैं। ‘पैसे देकर लगवाते हैं झाड़ू ’ छोटा इमामबाड़ा के बगल में रहने वाली निशा ने बताया कि यहां मोहल्ले में सफाई की सबसे बड़ी दिक्कत है। रेगुलर सफाईकर्मी नहीं आता है परेशान होकर हम लोग पैसा देकर प्राइवेट सफाई कर्मियों को बुलाते हैं और उनसे झाड़ू लगवाते हैं सफाई करवाते हैं। अगर ऐसा ना करें तो नालियां चोक हो जाती हैं बच्चे बीमार होते हैं। समस्याओं को लेकर स्थानीय पार्षद और अधिकारियों से शिकायत किया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। मानसून शुरू होते हैं परेशानी और बढ़ जाती है नाली का पानी घर में होता है और घर का सब सामान खराब हो जाता है। ‘महीने में 10 दिन ही आता है सफाईकर्मी ’ गल्ला बाजार के रहने वाले आबिद हुसैन ने बताया कि मोहल्ले में सफाई की स्थिति बहुत खराब है। महीने में बहुत मुश्किल से 10 दिन सफाईकर्मी आता है। जो कर्मचारी आते हैं मनमाने तरीके से काम करते हैं सड़क पर झाड़ू लगाकर कूड़ा नाली में भर देते हैं। सफाई के सर्वे में अधूरी और गलत रिपोर्ट लगाकर सब सही दिखाया जाता है। कहने को शहर स्मार्ट सिटी है मगर सिर्फ कागजों पर। जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सुबह-शाम वार्ड में आए तो उनको पता चले कि कितना स्मार्ट है। हमने चुनाव में पार्षद के लिए वोट मांगा भाजपा का समर्थन किया। और अब स्थानीय पार्षद हमसे कहते हैं कि इस इलाके से हमें वोट नहीं मिला इसलिए यहां काम नहीं होगा। अगर वोट नहीं मिला तो जीत कैसे हासिल कर रहे हैं। क्षेत्र की जनता के सवालों के जवाब क्यों नहीं देते। गल्ला बाजार, जूता बाजार जैसे कई मोहल्ले हैं जिनकी नालियां सड़ रही हैं। ‘शहर का एपिक सेंटर बदहाल ’ स्थानीय निवासी जहीर मेहंदी ने बताया कि हुसैनाबाद वार्ड शहर का एपिक सेंटर है । छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा के बीच का हिस्सा है। यहां क्लॉक टावर है। सतखंडा और पिक्चर गैलरी जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हैं। यह पूरा हेरिटेज जोन है। इलाके में सफाई और ड्रेनेज सिस्टम बेहद खराब है। जूता बाजार से होकर गुजरने वाला नाला बेहद खराब स्थिति में है। बाउंड्री वॉल बहुत छोटी है, जिस कारण हादसे होते रहते हैं। कभी बच्चे गिरते हैं कभी जानवर नाले में समा जाते हैं। दर्जनों शिकायतें करने के बाद भी जिम्मेदार संज्ञान नहीं लेते। क्षेत्र में जब भी कोई मजलिस या जुलूस होता है तो स्थानीय लोग चंदा जमा करके प्राइवेट आदमी को पैसे देकर सफाई करवाते हैं। कूड़ाघर से पूरे इलाके को परेशानी हो रही बबलू ने बताया कि यूनिटी कॉलेज के पास का कूड़ाघर मुसीबत बना हुआ है। कूड़ाघर के आगे जामा मस्जिद हैस जिसकी गिनी ऐतिहासिक इमारतों में होती है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक इस रोड से गुजरते हैं। सामने यूनिटी कॉलेज है बच्चों को यहीं से होकर सुबह-शाम आना-जाना होता है। बच्चे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। अक्सर जानवर कूड़े को पूरा सड़क पर फैला देते हैं जिसके बाद ट्रैफिक जाम लगता है। व्यापार पर असर पड़ना सामान्य बात है। इसलिए हम सभी वार्ड के लोग यह चाहते हैं कि इस कूड़े घर को आबादी से दूर कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए। 10 साल से नहीं बनी गली छोटा इमामबाड़ा के पीछे रहने वाले तुषार वाल्मीकि ने सड़क की समस्या बताई। उनका कहना था कि गली का निर्माण लगभग 10 साल पहले हुआ था। इसके बाद सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन के लिए खुदाई हुई। अब इस गली की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है बारिश के दिनों में गड्ढे पता नहीं चलते हैं और बच्चे बुजुर्ग हादसे का शिकार होते हैं।कई बार बारिश में बच्चे चोट खा चुके हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल दो पहिया वाहन वालों को होती है। ‘क्षेत्र में बहुत विकास हुआ, लो लैंड पर भरता है पानी’ पार्षद लुबना अली खान के प्रतिनिधि फैसल नवाब ने कहा कि क्षेत्र में हर संभव विकास का काम करवाया गया है। रईस मंजिल या अन्य जहां जलभराव की समस्या आ रही है यह जगह लो लैंड पर है इसलिए पानी की परेशानी होती है। बाकी शहर का यह सबसे पुराना अवार्ड है जहां की सीवर लाइन वगैरा भी काफी पुरानी है उस पर लगातार काम किया जा रहा है। जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नई पाइप लाइन डलवाई जा रही है। शिवपुरी, शीश महल और मोनीपुरवा समेत विभिन्न इलाकों में सड़क निर्माण का काम किया गया। रईस मंजिल में सड़क निर्माण का काम प्रस्तावित है बारिश के बाद शुरू होगा। 3 वर्षों में लगभग 100 समर सेबल लगे , 500 स्ट्रीट लाइट लगी। ----------------------------- इस वार्ड को भी जानिए- भवानीगंज वार्ड में घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर : कैमरे पर रो पड़े वार्डवासी, गंदगी और जलभराव ने पलायन के लिए मजबूर किया लखनऊ के भवानीगंज वार्ड में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और बदहाल सफाई व्यवस्था से लोग परेशान हैं। सबसे खराब हालात साबिक भादेवा इलाके के हैं, जहां पिछले 6-7 महीनों से घरों के सामने गंदा पानी जमा है। नालों की समय पर सफाई नहीं होने से बारिश का पानी कई दिनों तक नहीं निकलता। हालात ऐसे हैं कि बारिश होते ही घरों में पानी घुस जाता है। इससे बचने के लिए कई लोगों ने घरों के सामने दीवार खड़ी की है। जलभराव की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई परिवार मजबूर होकर घर बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं। (पूरी रिपोर्ट पढ़िए)
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