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    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस बनाने वाली PNC को LDA ने दिया प्रोजेक्ट:NHAI ने 3 साल के लिए किया था बैन, सबसे कम 194 करोड़ की बोली लगाई

    7 hours ago

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    कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद उसमें जगह-जगह गड्ढे और दरारें आ गईं। जिसके चलते हाईवे पर NHAI को टोल तक बंद करना पड़ा। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC इंफ्राटेक ने किया था। NHAI की जांच में काम में गंभीर लापरवाही मिली, जिसके बाद कंपनी पर तीन साल तक नई परियोजनाओं की बोली में शामिल होने पर रोक लगा दी गई। लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को इस प्रतिबंध से कोई मतलब नहीं है। यही वजह है कि PNC इंफ्राटेक ने शहर में एक बड़ी परियोजना में LDA के टेंडर में बोली लगाकर L1 (सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी) हासिल किया है। यानी उसे नया काम मिल गया है। यह टेंडर गोमती नदी के पास शहीद पथ को ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ने वाले फ्लाईओवर का है। इसके लिए LDA ने 215.65 करोड़ का टेंडर जारी किया था। दरअसल, LDA को शहीद पथ इंटरसेक्शन पर गोमती नदी के दाहिने किनारे चार लेन फ्लाईओवर बनवाना है। इसमें फ्लाईओवर के साथ लूप और रैंप भी बनाए जाने हैं। इसे पूरा करने के लिए दो साल की डेडलाइन भी दी गई है। PNC ने सबसे कम बोली लगाई, फिर भी पाया टेंडर एलडीए के टेंडर में PNC इंफ्राटेक ने 194.40 करोड़ रुपए की बोली लगाई और सबसे कम बोलीदाता यानी L-1 रही। वहीं, जीआर इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स ने 214.07 करोड़, एचजी इन्फ्रा इंजीनियरिंग ने 215.11 करोड़ और एनसीसी लिमिटेड ने 216.73 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। इस परियोजना के टेंडर में गावर कंस्ट्रक्शन, एम. वेंकट राव इंफ्रा प्रोजेक्ट्स, आरकेसीपीएल और रॉयल इंफ्राकंस्ट्रू ने भी हिस्सा लिया था। लेकिन, ये कंपनियां टेक्निकल में ही रिजेक्ट हो गईं। फिर जिस कंपनी की सड़क निर्माण गुणवत्ता को लेकर राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी ने कार्रवाई की है, उसी कंपनी को लखनऊ का बड़ा प्रोजेक्ट बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई। टेंडर प्रक्रिया में PNC ने सबसे कम बोली लगाई थी। सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में एल-1 कहा जाता है। हालांकि, एल-1 होना अपने आप अंतिम रूप से ठेका मिलने की गारंटी नहीं है, बल्कि तकनीकी पात्रता और अन्य शर्तें पूरी होने के बाद अनुबंध आगे बढ़ता है। शहीद पथ फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को 2 साल में पूरा करना है अब LDA से बड़ा सवाल- PNC की पात्रता कैसे तय हुई? LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा- गोमती नदी के पास शहीद पथ को ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ने वाले फ्लाईओवर का टेंडर PNC को पहले ही जारी किया जा चुका है। परियोजना पर काम चल रहा है। यह विकास कार्य लखनऊ में बन रहे ग्रीन कॉरिडोर का हिस्सा है। एक्सप्रेसवे धंसने के बाद NHAI ने कार्रवाई की थी कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने, सतह खिसकने और दरारें आने की शिकायतों के बाद NHAI ने PNC इंफ्राटेक के खिलाफ कार्रवाई की। शुरुआती जांच में सड़क की आधार संरचना में पानी के प्रवेश और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवाल उठे। इसके बाद कंपनी को नॉन-परफॉर्मर भी घोषित करके तीन साल के लिए NHAI की नई परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए टोल वसूली भी रोक दी गई है। सड़क की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कमियां दूर होने तक टोल नहीं लेने का फैसला किया गया है। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 26 जुलाई को करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क खिसकने की घटना सामने आई थी। इसके बाद NHAI ने PNC को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद सितंबर में NHAI ने PNC पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया दिया। अब एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और उनकी संबंधित एजेंसियां PNC को काम नहीं दे सकती हैं। एक्सप्रेसवे पर मरम्मत चल रही, इधर फ्लाईओवर बनाने की तैयारी एक तरफ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क की खामियों को लेकर मरम्मत और तकनीकी जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ में PNC की कम बोली ने नई बहस छेड़ दी है। 215 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली परियोजना शहर के यातायात से सीधे जुड़ी है और इसके निर्माण की गुणवत्ता का असर हजारों वाहन चालकों पर पड़ेगा। ऐसे में LDA के सामने सिर्फ सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी का चयन ही मुद्दा नहीं है, बल्कि निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता, पिछले काम के प्रदर्शन और सुरक्षा मानकों की पूरी पड़ताल भी अहम होगी। ------------------------ यह खबर भी पढ़िए- UP- सबसे महंगा एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा : गडकरी ने अमेरिका के जैसा बताया था; BJP सांसद के भाई की कंपनी को ठेका मिला उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका के जैसे होंगे। ये वचन, मैं आपको देना चाहता हूं।’ - नितिन गडकरी, 13 जुलाई, 2026 ये दावा महज 18 दिन में ही गलत साबित हो गया। 63 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे 18 दिन में 84 जगहों पर धंस चुका है। आखिरकार, NHAI को एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना पड़ा। कंपनी के 3 अफसरों को हटा दिया। अब IIT खड़गपुर की टीम एक्सप्रेस-वे की जांच करेगी। हकीकत जानने दैनिक भास्कर ग्राउंड पर पहुंचा। पढ़िए रिपोर्ट…
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