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    लखनऊ में 228 किलो नशीली दवाएं पकड़ीं:9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट और 1.20 लाख ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद, 6 गिरफ्तार

    1 hour ago

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    लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी है। कार्रवाई में करीब 228 किलो दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें 9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट, 1.20 लाख ट्रामाडोल एचसीएल कैप्सूल और कोडीन वाली कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान एक फार्मा फर्म के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी सामने आई है। इसके बाद टीम ने कन्हैया फार्मा को सील कर दिया। इलाज की दवा जब नशे का जरिया बन जाए एल्प्राजोलाम, ट्रामाडोल और कोडीन वाली दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सा में अलग-अलग स्थितियों के इलाज के लिए होता है। समस्या तब शुरू होती है, जब ऐसी दवाएं डॉक्टर की निगरानी और वैध मेडिकल सप्लाई चेन से बाहर निकलकर गैरकानूनी बाजार तक पहुंचती हैं। सिर्फ छह गिरफ्तारी नहीं, असली सवाल है माल आया कहां से? एएनटीएफ के मुताबिक ट्रांसपोर्ट नगर में खेप की डिलीवरी की सूचना पर निगरानी शुरू हुई थी। कार्रवाई के दौरान तीन लोगों से दवाएं मिलीं। पूछताछ आगे बढ़ी तो जांच टीम कन्हैया फार्मा तक पहुंची। जांच में कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों समेत सात तरह की दवाओं का भंडारण मिला। अधिकारियों के मुताबिक दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े पूरे रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद फर्म को सील कर दिया गया। बिलिंग से लेकर कमीशन तक जांच की कड़ी जांच एजेंसियों के अनुसार पूछताछ में सप्लाई और बिलिंग से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि दवाओं की खरीद के लिए अलग-अलग लोगों और फर्मों का इस्तेमाल किया गया और इस प्रक्रिया में कमीशन भी दिया जाता था। एएनटीएफ की जांच में छह आरोपियों किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने अधिक मुनाफे के लिए नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री और अलग-अलग लोगों तक खेप पहुंचाने की बात बताई है। एक आरोपी का पुराना रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में पूछताछ में शाद इरशाद से मिली जानकारी के आधार पर विशाल चौरसिया को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी के मुताबिक विशाल ने शाद को दवाएं उपलब्ध कराने की बात बताई। जांच में यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक पुराने मामले के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। एजेंसी के अनुसार इसके बाद भी वह दूसरी फर्मों के जरिए कारोबार करता रहा। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में भी उसने एक अन्य व्यक्ति से खरीद की बात बताई है। अब जांच एजेंसियां इस कड़ी को आगे बढ़ाकर सप्लाई के मूल स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। युवाओं तक नशा कैसे पहुंचता है, यही सबसे बड़ा खतरा इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू सिर्फ बरामद दवाओं की संख्या नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी दवाएं वैध मेडिकल चैनल से बाहर निकलने के बाद किस बाजार तक पहुंचती हैं। नशीली दवाओं के अवैध कारोबार में सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि मेडिकल उपयोग वाली दवाएं भी नशे के लिए इस्तेमाल होने लगती हैं। शुरुआत कई बार इसे सामान्य दवा समझकर हो सकती है, लेकिन नियमित गलत इस्तेमाल निर्भरता का रूप ले सकता है। इसके बाद नींद, व्यवहार, पढ़ाई या काम, पैसे की जरूरत और सामाजिक संबंधों में बदलाव जैसे संकेत सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि दवाओं की अवैध बिक्री को सिर्फ ड्रग तस्करी का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा भी माना जाना चाहिए। 7 मोबाइल और 11,140 रुपए भी बरामद कार्रवाई के दौरान टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपए नकद भी बरामद किए। सभी छह आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/21/22/29 के तहत कार्रवाई की गई है। बरामद दवाओं के नमूने नियमानुसार जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी ई-साक्ष्य एप के जरिए की गई है। अब जांच का फोकस सप्लायर और खरीदार पर 228 किलो दवाओं की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों के सामने अगली चुनौती इससे भी बड़ी है। एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं मूल रूप से कहां से निकलीं, किन चैनलों से लखनऊ पहुंचीं और किन लोगों या स्थानों तक पहुंचाई जानी थीं।
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