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    लखनऊ में 27 ब्लैक स्पॉट:826 सड़क हादसों में 171 मौत; 350 घायल; इन रास्तों पर संभलकर चलें

    3 hours ago

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    लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लखनऊ में 27 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं। इन 27 लोकेशन पर 3 साल में 826 हादसे हुए हैं। उनमें 171 लोगों की जान गई। 350 लोग घायल हुए। एक-एक स्थान पर कम से कम 5-5 लोगों की मौत हुई और 10 से ज्यादा लोग घायल हुए। सबसे अधिक मौत गोसाईंगंज कट, सीएम सिटी मोड़ और बंथरा-सबरिया मोड़ पर हुईं। इसकी वजह से लखनऊ ब्लैक स्पॉट वाले शहरों की सूची में शामिल हो गया है। ये 27 स्थान क्यों ब्लैक स्पॉट बने? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से बातचीत की। पता चला कि इन जगहों पर सड़क की डिजाइन, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा इंतजाम की खामियां हैं। इसकी वजह से ये स्थान ब्लैक स्पॉट बने हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट... पहले देखिए 3 ब्लैक स्पॉट की तस्वीरें... आइए अब जानते हैं लखनऊ के ब्लैक स्पॉट और सालभर में हुए हादसे... इन वजहों से होते हैं हादसे इन जगहों पर हादसों का मुख्य कारण असुरक्षित कट, बिना सिग्नल वाले चौराहे और वाहन चालकों द्वारा अचानक लेन बदलना है। खासतौर पर रात के समय इन स्थानों पर हादसे की संभावना कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि वहां स्ट्रीट लाइट या रिफ्लेक्टिव मार्किंग नहीं है। एंट्री पॉइंट्स पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट शहर में 9 बड़े एंट्री पॉइंट्स हैं। यहां से हर दिन हजारों से अधिक की संख्या में गाड़ियां निकलती हैं। इसमें सीतापुर रोड, हरदोई रोड, कानपुर रोड, रायबरेली रोड, सुल्तानपुर रोड और फैजाबाद रोड सबसे व्यस्ततम रोड है। इसके बाद भी इन जगहों पर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा के इंतजाम लचर है। यहां रात के समय रोड पर लाइटिंग नहीं रहती। खतरनाक कट्स और हाई स्पीड गाड़ियों पर लगाम नहीं लगना भी इलाके ब्लैक स्पॉट्स में बदलते जा रहे हैं। तेज रफ्तार और डिजाइन की खामियां सबसे बड़े कारण हैं... पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट और ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इन ब्लैक स्पॉट्स पर हादसों की दो मुख्य वजहें हैं... सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों को जानिए... लोक निर्माण विभाग का दावा है कि ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड और डिवाइडर बनाए गए हैं। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि इन सुधारात्मक उपायों का असर सीमित है। कई स्पीड ब्रेकर बिना मार्किंग के बने हैं, जिससे रात में उनका पता नहीं चलता है। स्पीड ब्रेकर खुद हादसों का कारण बन जाते हैं। कई चेतावनी बोर्ड छोटे या गलत जगह लगे हैं, जिन्हें चालक अनदेखा कर देते हैं। डिवाइडर कई जगह टूटे हुए हैं, जिससे लोग गलत दिशा से घुस आते हैं। अब जानते हैं कि एक्सपर्ट का क्या कहना है... प्रशासन का दावा फेल आधे ब्लैक स्पॉट्स पर कोई सुधार नहीं ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने के लिए प्रशासन ने कई दावे किए, लेकिन अभी तक 50% से ज्यादा जगहों पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। कुछ जगहों पर स्पीड ब्रेकर बनाए गए, लेकिन कहीं साइनेज और लाइटिंग नहीं लगी। इस पर डीएम ने कहा- सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम को बढ़ाया जाएगा। लेकिन यह कब तक होगा, इसका कोई जवाब नहीं है। सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम जता चुके चिंता लखनऊ में बढ़ते एक्सीडेंट को लेकर जिला प्रशासन गंभीर है। डीएम ने परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई और पीडब्लूडी को एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार करने के लिए भी कहा है। प्रदेशभर के सड़क हादसों को जानिए... परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक, साल 2023 में प्रदेश में कुल 44534 हादसे हुए। साल 2024 में ये संख्या 1518 तक बढ़कर 46052 पहुंच गई। यह आंकड़े 3.4 प्रतिशत है। वहीं, मृतकों की संख्या 23652 से बढ़कर 24118 पहुंच गई। इसमें 466 की बढ़त हुई है। घायलों की संख्या 31098 से बढ़कर 34665 पहुंच गई। इसमें 3567 की बढ़त हुई है। ये 11.5 प्रतिशत है।
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