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    लखनऊ में अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम पर संकट:आयोजन के 12 घंटे पहले तक नहीं मिली एनओसी, एलडीए स्मारक समिति लेगा फैसला

    10 hours ago

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    लखनऊ में 11 मार्च को प्रस्तावित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गौ-रक्षा जनजागरण अभियान के मुख्य कार्यक्रम पर रोक लग सकती है। आयोजन स्थल के लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी समय पर जमा न होने के कारण कार्यक्रम को 12 घंटे पहले तक भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। सूत्रों की मानें तो आयोजन टल सकता है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों के मुताबिक आयोजन कराने वाली संस्था को स्मारक समिति के माध्यम से कई विभागों से एनओसी लेकर जमा करनी थी, लेकिन निर्धारित समय के भीतर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी वजह से आयोजन स्थल पर कार्यक्रम की अनुमति अभी तक नहीं दी गई। तीन दिन के लिए जमा किए थे ₹4.50 लाख सूत्रों के मुताबिक आयोजकों की ओर से स्मारक स्थल पर तीन दिन के कार्यक्रम के लिए आवेदन किया गया था। इसके लिए करीब 4.50 लाख रुपए शुल्क भी जमा किया गया था। हालांकि, आवेदन के साथ जरूरी विभागीय एनओसी पूरी नहीं होने के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई। आवेदन में कहा था- अहिंसक होगा कार्यक्रम आशियाना में प्रस्तावित है बड़ा कार्यक्रम आयोजकों के मुताबिक, 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा पर दोपहर 2:15 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ‘गो-प्रविष्ठा धर्मयुद्ध’ का औपचारिक शंखनाद करेंगे और समर्थकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में संत-समाज, विभिन्न संगठनों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। काशी से लखनऊ तक यात्रा पर हैं अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों काशी से लखनऊ तक यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज, उन्नाव और नैमिषारण्य सहित कई स्थानों पर सभाएं प्रस्तावित हैं। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा गौ-रक्षा को लेकर जनजागरण अभियान का हिस्सा है और 11 मार्च को लखनऊ में इसका मुख्य कार्यक्रम रखा गया है। क्या होता है एनओसी का प्रोसेस किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए आयोजकों को संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना होता है। इसमें पुलिस, फायर विभाग, यातायात पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों की अनुमति शामिल होती है। इन विभागों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम अनुमति दी जाती है। स्मारक समिति की क्या होती है भूमिका एलडीए के अधीन आने वाले स्मारक और सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी बड़े आयोजन की अनुमति स्मारक समिति के जरिए दी जाती है। समिति यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक और परिसर की व्यवस्था प्रभावित न हो। आयोजन के लिए क्या करना होता है अधिकारियों के अनुसार आयोजकों को पहले आवेदन करना होता है, निर्धारित शुल्क जमा करना होता है और सभी संबंधित विभागों से एनओसी लेकर स्मारक समिति को सौंपनी होती है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आयोजन की अंतिम मंजूरी दी जाती है।
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