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    लखनऊ में बंगाली महिलाओं ने खेला सिंदूर देखें 10 तस्वीरें:माता रानी को भोग चढ़ाया; 450 साल पुरानी परंपरा, पति कि लंबी उम्र के लिए कामना किया

    46 minutes ago

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    लखनऊ में सोमवार को बंगाली समाज ने धूमधाम से सिंदूर खेला मनाया । 5 दिनों तक मां की आराधना के बाद विजयादशमी को बंगाली समाज की सुहागिन महिलाओं ने सिंदूर की परंपरा निभाई। गोमती नगर स्थित रविंद्र पल्ली और केसरबाग के बंगाली क्लब में विवाहित महिलाओं ने जमकर सिंदूर खेला। दुर्गा माता से परिवार की सुख, समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना की। लाल जोड़े में दुल्हन की तरह सज कर पहुंची महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ एक दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयादशमी की बधाई दी। सभी सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को पान के पत्ते से सिंदूर चढ़ाया। साथ ही मां दुर्गा को पान और मिठाई भी खिलाई। सभी महिलाएं जश्न में डूबी हुई नजर आईं। सिंदूर से भरी मां की मांग सिंदूर खेल रही अपर्णा ने बताया कि समाज की मान्यता है कि जब मां दुर्गा मायके से विदा होती हैं, तो सिंदूर से उनकी मांग भरी जाती है। उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह उत्सव होली के पर्व जैसा लगता है। इसके जरिए महिलाएं कामना करती हैं कि एक-दूसरे की शादीशुदा जिंदगी सुखद और सौभाग्यशाली रहे। मां को विदाई देकर अगले वर्ष फिर से आने की कामना करती हैं। 450 साल पुरानी परंपरा तनुश्री घोष ने बताया कि सिंदूर खेला की परंपरा 450 साल पुरानी है। ये परंपरा दशमी पर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है। मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं। बंगाली समाज की महिलाओं ने 450 साल से चली आ रही परंपरा के अनुसार मां दुर्गा, सरस्वती, कार्तिकेय, लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद उनका श्रृंगार किया। विसर्जन से पहले मां को मिठाइयों का भोग लगाया गया। विशेष प्रसाद का हुआ वितरण अदिति बोस ने बताया कि सिंदूर खेला के बाद विशेष प्रसाद रविंद्र पल्ली पंडाल में बंटता है। मां की विदाई से पहले सभी लोगों का मुंह मीठा कराते हैं। दूध, दही, केला, चुरा और बताशे मिलाकर विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है। मान्यता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करके जो भी कामना की जाए पूरी होती है। यह प्रसाद पूरे साल में सिर्फ एक बार बनता है। सिंदूर खेला के अलावा और किसी भी दिन न तो इस प्रसाद का वितरण हो सकता है और न ही इसे ग्रहण किया जा सकता है।
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